प्रियंका चौपडा, सोनम कपूर की चुदाई की दास्तान सीज्न १
प्रियंका चौपडा की सुहागरात
मेरा नाम साहिल तनेजा है। उम्र २५ साल, कद 5 फीट 6 इंच। मेरा शहर है दिल्ली ।
२३वें साल में मेरी शादी हो गई
थी। कपड़े का बिज़नेस था जो अच्छा खासा चल रहा था। रीति रिवाजों के मुताबिक शादी में
खर्चा भी काफी किया गया था। बीवी काफी सुंदर थी। प्रियंका चौपडा।
सुहागरात के दिन मेरे मन में
भी लड्डू फूट रहे थे जैसे बाकी लड़कों के दिल में फूटते हैं। मैं कमरे में गया और कुंडी
लगा दी। वो सामने फूलों से सजे बिस्तर पर बैठी हुई मेरा इंतज़ार कर रही थी। सेक्स की
जल्दी तो मुझे थी लेकिन पहली रात थी इसलिए सब्र से काम ले रहा था।
मैं प्रियंका चौपडा के पास जाकर
बिस्तर पर लेट गया, वो बैठी रही। शुरुआत कौन करे; शर्म तो मुझे भी आ रही थी लेकिन रुका
भी नहीं जा रहा था। मैंने गले में खराश की आवाज़ बनाते हुए पहल करने की कोशिश की, वो
फिर भी नहीं हिली।
मैंने सोचा, बड़ी ही शर्मीली
किस्म की बीवी है यार, चूत तो सील बंद होनी चाहिए। सोचकर मेरी पैंट में मेरे लिंग ने
तनाव में आना शुरु कर दिया था।
मैंने धीरे से प्रियंका चौपडा
को कंधे से पकड़ते हुए अपने पास लेटा लिया। उसके लहंगे की चुन्नी सरक गई और खूबसूरत
सा चेहरा शर्म का घूंघट ओढ़े हुए मेरी आंखों के सामने था। उसके कोमल बदन को छूकर मुझमें
तो हिम्मत आने लगी थी। या यूं कहें कि चुदास की आग ने धुंआ फेंकना शुरु कर दिया था।
मैंने उसके कंधों को हल्के से
दबाना शुरु कर दिया। उसका रिएक्शन अभी भी वैसा ही था, शर्मीली, सिमटी हुई सी वो मेरी
तरफ देख भी नहीं रही थी। उसके होंठ सुर्ख लाल थे। पलकों पर सुनहरी छटा और माथे में
सिंदूर। किसी अप्सरा जैसी लग रही थी। मैं खुद को बहुत ही किस्मत वाला समझ रहा था कि
ऐसी हूर की परी मुझे मिली है। इसको तो पलकों पर बिठाकर रखूंगा।
मैंने हल्के से उसके होठों पर
उंगली से टच किया। उसके गुलाबों की पंखुड़ी खुल गई। मैंने उसकी नथ को उतारा और अलग
कर दिया। जब उसने नज़रें उठाकर देखा तो मैं उसकी काली आखों की चमक में खो गया।
मन कर रहा था उसको देखता ही रहूं।
उसके हाथ को अपने हाथ में लेकर
अपने होठों से हल्का चूम लिया तो लंड ने फन उठा लिया। उसके कोमल हाथों का स्पर्श मेरे
हाथों में जिंदगी के सारे खालीपन को भरता हुआ महसूस हो रहा था। उसके हाथों से हथफूल
निकाला और उंगलियों में अपनी उंगलियां फंसाकर उसको लेटाते हुए उसके सीने पर सिर रख
दिया। उसके वक्षों के अंदर से आती दिल की धक-धक लंड को बार-बार फड़का रही थी।
उसके हाथ को हल्के से सहलाते
हुए दोबारा उठा और उसके होठों के करीब होंठ ले गया। सांसें हम दोनों की ही गर्म हो
चुकी थी। धीरे से उसके गालों पर प्यार से किस किया और उसके हाथों को दबाते हुए उसके
होठों पर अपने प्यासे होंठ रख दिए। लंड ने पैंट में फनफनाना शुरु कर दिया।
उसके लहंगे के बीच में बांया पैर डालते हुए उसके होठों को चूसने लगा। मेक-अप की महक हवस में घुलकर शर्म की दहलीज़ पार कर चुकी थी। लहंगे के ऊपर से उसकी बांई जांघ पर मेरी पैंट में तना मेरा लंड रह-रहकर उसकी जांघ पर झटके दे रहा था; और मेरे हाथ अपने आप ही उसके ब्लाउज़ पर आकर उसके दूधों को दबाने लगे। उसने मेरे हाथों को हटाना चाहा लेकिन अब मेरे अंदर का मर्द अपनी मर्दानगी के प्रदर्शन पर उतर आया था।
मैंने प्रियंका चौपडा के होठों
को चूसते हुए उसके दूधों को पहले से ज्यादा प्रेशर से दबाना शुरु कर दिया। वो भी अब
मेरा विरोध नहीं कर रही थी। उसके कोमल बदन पर उभरे उसके दूधों को दबाने का मज़ा मेरे
लंड पर भारी पड़ रहा था। लंड अपने पूरे उफान पर था और मेरी कमर मेरे लंड को उसकी जांघ
पर धकेलने लगी थी। जैसे लंड उसकी जांघ में ही छेद कर देना चाहता है।
अब मेरे हाथ उसके ब्लाउज के अंदर
जाकर उसके दूधों को छूना चाहते थे, उनकी कोमलता को महसूस करना चाहते थे। मेरी उंगलियों
और उसके दूधों के बीच में ब्लाउज की बाउंडरी अब और बर्दाश्त नहीं हो रही थी। मैंने
उसके ब्लाउज के हुक खुलवाए और उसके सफेद कोमल, मखमली चूचों के दर्शन करने में मेरी
आंखें धन्य हो गईं। दूधों के बीच में हल्के भूरे रंग के निप्पल कस कर पैने हो गए थे।
मैंने अगले ही पल उसके चूचों को अपने मुंह में भर लिया और बड़े ही प्यार से उनको चूसने
और दबाने लगा।
प्रियंका चौपडा ने अपने दोनों
हाथों को कमर के पीछे रखते हुए अपनी कमर को सहारा दे दिया लेकिन मैंने उसके हाथों को
हटवाते हुए उसे फिर से बेड पर गिराकर उसके हाथों को उसकी बगल में नीचे दबाया और उसकी
चूचियों में उभरे निप्पलों को बारी-बारी से अपने दातों के बीच हल्के से दबाकर काटने
लगा।
उसकी सिसकारी निकल पड़ी और वो
अपनी छाती को उठाते हुए पीछे तकिए को नोंचने लगी।
अब मैंने दोनों हाथों में दोनों
चूचों को पकड़ा और उनको दबाते हुए निप्पलों पर जीभ फेरने लगा। मेरी दोनों जांघें उसकी
जांघों के ठीक ऊपर आ चुकी थीं; मेरी पैंट का बीच वाला भाग उसके लहंगे के ऊपर से ही
उसकी चूत वाले भाग पर अपना दबाव बना रहा था। चूचों को दबाने और चूसने में जो आनंद मिल
रहा था वो यहां पर शब्दों में कहना मुश्किल है।
ब्लू फिल्मों में नंगी औरतों
को चुदते हुए देखकर मुट्ठ तो बहुत बार मारी थी लेकिन एक औरत के नंगे कोमल बदन की छुअन
के अहसास के सामने वो 2-3 मिनट का मनोरंजन कहीं भी स्टैंड नहीं करता। आज पता लग रहा
था कि मर्द क्यों चूत के पीछे पागल होते हैं। औरतों के नंगे जिस्म को अपनी नंगी आंखों
से अपने सामने मचलते हुए देखना, उसको छूना, उसके साथ खेलना वासना की सबसे बड़ी खूबी
है।
प्रियंका चौपडा के सफेद, कोमल
दूध अब तनकर खड़े हो गए थे जिनकी दृढ़ता मुझे अपने हाथों में अलग से महसूस हो रही थी।
उसके लहंगे का नाड़ा खोलकर मैंने उसकी टांगों से निकलवाकर लहंगे को बेड के साथ लगे
सोफे पर डाल दिया।
नीचे पेटीकोट था। उसकी पतली और
गोरी कमर पर बंधा लाल रंग का पेटीकोट गज़ब लग रहा था। मन कर रहा था उसको फाड़ के उसकी
चूत को नंगी कर दूं लेकिन चूंकि वो मेरी बीवी थी इसलिए अपनी हवस की आग पर कंट्रोल के
पानी का छींटा मारा और उसके पेटीकोट का नाड़ा खोला, नाड़ा खोलने के बाद धीरे-धीरे उसकी
जांघों से सरकाते हुए उसको नंगी कर दिया। उसकी सफेद पैंटी के बीचों बीच गीला धब्बा
दिखाई दे रहा था।
सफेद, नंगे तने हुए दूध… पतली
कमसिन कमर के नीचे चूत को ढके हुए सफेद पैंटी में वो मेरे सामने लेटी हुई अपनी जांघों
को एक दूसरे पर रगड़ रही थी जैसे चूत को छिपाना चाह रही हो।
मैंने उसके घुटनों से पकड़ते हुए उसकी टांगों को सीधा किया तो पैंटी के बीच में चूत की शेप उभर कर दिखने लगी जिसने बीचों-बीच से पैंटी को गीला कर दिया था। मैंने उसकी नाभि के पास जाकर उसके इर्द-गिर्द उसके पेट पर किस किया तो वो तड़पने लगी। उसकी जांघों को फैलाया मैंने और अपने घुटने उनके बीच में रखते हुए उसकी गीली पैंटी के नज़दीक मुंह को ले जाकर उस पर नाक रख दी।
आह…चूत…मैंने पैंटी के ऊपर से
ही अपने होंठ उसकी उभरी चूत की शेप पर रखे और उसकी चूत में मुंह मारने लगा। मेरे हाथ
उसकी छाती पर तने उसके चूचों को ढूंढते हुए उनको अपने आगोश में भरने लगे। दबाने लगे।
नीचे मैं चूत की खुशबू में खोने लगा।
अब चूत को देखने के लिए और इंतज़ार
करना मेरे वश में नहीं था। मैं धीरे से अपने दांतों से पकड़ते हुए उसकी पैंटी को नीचे
खींचने लगा और मेरी नाक में चूत की गंध का अहसास बढ़ने लगा। आंखें खोलकर देखा तो चूत
के ऊपर उगे बाल जिनको ट्रिम किया गया था, चूत के नंगी होने का संकेत देने लगे। धीरे-धीरे
पूरी पैंटी को नीचे खींच दिया मैंने और उसकी गीली चूत नंगी होकर मेरी नज़रों के सामने
थी।
अब मैं और नहीं रुक सकता था।
मैंने जल्दी से पैंटी को उसकी जांघों से निकालकर नीचे पैरों से भी निकलवाकर एक तरफ
फेंका और प्रियंका चौपडा की जांघों को चौड़ा फैलाते हुए उसकी चूत की फांकों पर अपने
होंठ रख दिए। वो अपनी जांघों के बीच में मेरे मुंह को दबाने लगी। मैंने उसके कूल्हों
के पास से उसको पकड़ा और अपनी तरफ खींचा जिससे मेरे मुंह की पहुंच अच्छी तरह उसकी चूत
तक पहुंच गई। उसकी टांगों को फैलाते हुए मैं उसकी चूत में मुंह मारने लगा। चूत से तरल
पदार्थ निकल रहा था जिसे मैं चाट रहा था और चूत फूली-फूली सी महसूस हो रही थी।
मैंने अपनी पैंट के ऊपर से अपने
लंड को मसलना शुरु कर दिया। प्रियंका चौपडा ने मेरे सिर को पकड़ा और अपनी चूत में धकेलने
लगी। वो मेरी कमर पर नोंच भी रही थी। कुछ देर तक चूत चाटने के बाद मैंने अपनी जीभ को
पैना किया और चूत के अंदर दे दी, ‘ओह्ह्हह…’ उसके मुंह से निकला. वो उछल पड़ी और अपनी
चूत को बार-बार उठाते हुए मेरे मुंह पर मारने लगी।
मुझसे ज्यादा कामुक तो मुझे मेरी
नई नवेली बीवी लग रही थी। मैं तेज़ी से उसकी चूत के अंदर जीभ को अंदर बाहर करने लगा।
साथ में अपना लंड भी रगड़ रहा था। लंड को रगड़ने में इतना आनंद मुझे भी कभी नहीं आया
था। मन कर रहा था उसकी चूत में लंड डालकर उसको फाड़ दूं लेकिन पता नहीं क्यों मैं उसको
तड़पाने में ज्यादा आनंद का अनुभव कर रहा था। कभी उसकी चूत में जीभ घुसेड़ देता तो
कभी उसकी चूत की फांकों को दांतों से खींच लेता, वो तड़पती रही, मचलती रही।
अब मुझसे भी और कंट्रोल नहीं
हुआ, मैंने उसकी चूत से जीभ निकाली और अपनी शर्ट उतारने लगा। वो नंगी बिस्तर पर नागिन
की तरह लहराती हुई मुझे देख रही थी। मैंने अपनी शर्ट और बनियान निकाल फेंका और घुटनों
के बल खड़ा होकर अपनी पैंट का हुक खोला। पैंट को नीचे किया तो मेरे लंड ने फ्रेंची
का बुरा हाल कर दिया था। मेरी फ्रेंची का आगे वाला भाग पूरा तरह से लंड के तरल पदार्थ
में सन गया था।
मैंने पैंट निकाली और फिर फ्रेंची
को भी अपनी जांघों से अलग कर दिया। लंड की टोपी पूरी गीली होकर झाग में सनी हुई थी।
मैंने प्रियंका चौपडा की चूत को अपनी चार उंगलियों से रगड़ा तो उसने मुझे अपने ऊपर
गिरा लिया और मेरे होठों को चूमने काटने लगी। उसकी टांगें मेरी कमर पर आकर लिपट गईं
और लंड चूत से जा टकराया।
उसने अपने हाथों से मेरे चूतड़ों को चूत की तरफ दबाया तो लंड उसकी चूत पर रगड़ खाने लगा। अब वो पागलों की तरह मुझे चूमने और चाटने में लगी थी। उसने मेरे चूतड़ों को अपने दोनों हाथों में लेकर कई बार दबाया, मेरी गांड की दरार में अपना हाथ फेरा और मुझे अपनी तरफ इतनी ज़ोर से धकेला की लंड उसकी चूत में जा फंसा।
लंड के फंसते ही वो फिर से मेरे
होठों को चूसने लगी। मेरी कमर पर अपने हाथों को फिराती हुई मेरी गांड पर टांगों को
लपेटे हुए मुझे बार-बार अपनी चूत चोदने के लिए भड़काने लगी। मेरी छाती उसके दूधों को
दबा रही थी और लंड चूत में अंदर ही अंदर फिसलता हुआ अपना रास्ता तय करने लगा, जब पूरा
लंड चूत में समा गया तो प्रियंका चौपडा ने अपने आप ही धक्के देना चालू कर दिया। मैं
भी हैरान था कि औरत सच में इतनी गरम होती हैं क्या..
लंड भी चिकना था और चूत भी, धक्कों
के साथ पच्च..पच्च की आवाज़ भी होने लगी। अब मैंने भी अपनी पॉजिशन संभाली और प्रियंका
चौपडा की चूत में अपनी तरफ से धक्के देने लगा। जब मैंने धक्के देना शुरु किया तो उसके
चेहरे के भाव और कामुक हो गए। उसके लाल सुर्ख होंठ इस्स.. इस्स्स् करने लगे जिनमें
हल्के मीठे दर्द का भाव भी था।
उसकी ये हालत देखकर मैं ज्यादा
देर खुद को संभाल नहीं पाया और 4-5 धक्कों के बाद ही मेरे लंड ने उसकी चूत में थूकना
शुरु कर दिया।
ये क्या हुआ…मैंने मन ही मन कहा..
अब क्या करूं, ऐन वक्त पर लंड
ने मेरा साथ छोड़ दिया और मेरे धक्के अचानक बंद हो गए।
प्रियंका चौपडा ने सिर उठाकर
देखा तो मुझे उससे नज़रें मिलाने में शर्म सी महसूस हो रही थी। वो समझ गई कि मेरी गर्मी
उसकी चूत में जाते ही ठंडी हो गई है।
उसके चेहरे के भाव धीरे-धीरे
नॉर्मल हो गए। उसने मुझे अपने से अलग कर दिया और उठकर बैठ गई। मैं भी एक तरफ लेट गया।
मेरी सांसें अभी सामान्य नहीं हुई थीं। उसने मेरे चेहरे की तरफ देखा और फिर मेरे सिकुड़ते
हुए लंड को। वो हल्के से मुस्कुराई, जैसे कुछ छिपा रही हो। फिर मेरी छाती पर हाथ फेरती
हुई मेरे साथ ही लेट गई।
मैंने उसका सिर अपनी छाती पर
रखवा लिया लेकिन 2 मिनट बाद वो अलग हो गई। उसने अपनी पैंटी पहन ली और पेटीकोट पहन कर
ब्लाउज भी पहन लिया।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- कुछ नहीं, थकान सी हो
रही है, मुझे नींद आ रही है।
इतना कहकर वो लेट गई और अपने
पेट पर हाथ रखकर उसने आंखें बंद कर लीं।
मैंने सोचा कि शायद वो सच में
ही थकी हुई है। लेकिन मेरी तो नींद उड़ गई थी। मैं सोच में था कि ये मेरे बारे में
क्या सोच रही होगी। बस 4-5 धक्कों में ही मेरी मर्दानगी हांफने लगी।
मैं इसी सोच में लेटा रहा। मुझे भी कब नींद आई पता नहीं चला, लेकिन सुबह 4 बजे के करीब फिर से आंख खुली और मैंने प्रियंका चौपडा की तरफ देखा। उसके ब्लाउज में से उसके चूचों की दरार दिख रही थी। उसकी टांगें चौड़ी होकर फैली हुई थीं। और वो गहरी नींद में थी।
उसकी ये स्थिति देखते ही लंड
खड़ा हो गया और मैंने धीरे से उसके चूचों को दबाना शुरु कर दिया। जब मेरे हाथों का
दबाव उसके चूचों पर बढ़ने लगा तो उसकी आंखें खुल गईं। उसने खुद ही ब्लाउज खोल दिया
और पेटीकोट भी निकाल दिया। मैं भी ज्यादा खेल नहीं करना चाह रहा था कि कहीं फिर से
रात वाली कहानी ना दोहराई जाए।
उसने चूत को मेरे सामने नंगी
कर दिया और मैंने प्रियंका चौपडा की टांगों को फैलाते हुए उसकी चूत पर लंड को रखा और
धक्का दे दिया। वो उचक गई और मैंने उसके होठों को चूसना शुरु कर दिया। मैंने देर ना
करते हुए उसकी चूत में लंड को अंदर बाहर करना चालू किया।
4-5 धक्कों में ही लंड ने फिर
से मेरा साथ छोड़ दिया। अबकी बार तो मैं मारे शर्म के खुद ही उठ गया और सीधा बाथरूम
में चला गया।
आपने पढ़ा कि बीवी के साथ सुहागरात
में मेरे लंड ने मेरा साथ नहीं दिया, पहली रात बीत जाने के बाद सुबह हुई; मैं निराशा
के चंगुल से निकलने की कोशिश कर रहा था और मन को बार बार यह कहकर दिलासा दे रहा था
कि पहली रात तो जोश में ऐसा हो ही जाता है, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।
लेकिन साथ में ये बात भी मुझे
खाए जा रही थी कि पता नहीं मेरी बीवी मेरे बारे में क्या सोच रही होगी, मैंने अपने
दोस्त अभि को फोन किया और सारी बात उसको बता दी। अभि मेरा खास था और वो मेरी हर बात
जानता था, हमने कई बार साथ में पॉर्न फिल्म देखते हुए मुट्ठ भी मारी हुई थी।
अभि ने मुझे दिलासा देते हुए
कहा- चिंता करने की कोई बात नहीं है, पहली रात में एक्साइटमेंट में ऐसा हो जाता है।
वैसे भी प्रियंका चौपडा जैसी सुंदर लड़की को देखकर तो किसी का भी अंडरवियर गीला हो
सकता है।
अभि की बातों से मुझे थोड़ी तसल्ली
हुई, अगले दिन अपने मायके से आने के बाद जब दूसरी रात को हमने सेक्स करना शुरु किया
तो फिर से वही हालत हो गई। उस रात को मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मैं दोबारा प्रियंका
चौपडा के बदन को छू सकूं। निराशा और चिंता ने मुझे घेर लिया, मैं करवट बदल कर सो गया।
सुबह उठकर देखा तो प्रियंका चौपडा
बेड पर नहीं थी। मैं फ्रेश होकर बाहर गया तो सब लोग नाश्ता करने में लगे हुए थे। प्रियंका
चौपडा मेरी माँ के साथ नाश्ता बनाने में हेल्प कर रही थी। मैं हॉल में जाकर टीवी देखने
लगा, मन को बहलाने की बहुत कोशिश की लेकिन ध्यान बार-बार उसी शर्मिंदगी पर जाकर अटक
जाता था।
मैं नाश्ता करने के बाद नहा-धोकर
अभि के पास उसके घर चला गया। वो पहले तो मुझ पर खूब हंसा लेकिन जब मैं सीरीयस दिखाई
दिया तो वो भी सीरीयस हो गया।
अभि ने कहा- अगर इतनी ही दिक्कत
है तो किसी ड़ॉक्टर से सलाह ले ले, आजकल तो बहुत सारी दवाइयाँ आती हैं तो जो इस तरह
की प्रॉब्लम को ठीक कर देती हैं।
अभि की बात मेरी समझ में आ गई।
हम दोनों एक देसी हकीम के पास गए, मुझे बात करने में हिचक हो रही थी इसलिए अभि ने ही मेरी तरफ से बात की। हकीम ने कुछ पुड़िया बनाकर दे दी और बोला- इनको बिस्तर पर जाने से एक घंटा पहले दूध के साथ ले लेना, अगर कोई परेशानी आए तो मुझे बताना।
4 हजार की 10 पुड़िया थी वो…
पैसों के हिसाब से तो लग रहा था कि वाकयी दवाई असरदार होगी और दवाई ने असर दिखाया भी।
उस दिन जब मैं पुड़िया खाकर प्रियंका
चौपडा के पास बिस्तर पर पहुंचा तो वो टीवी देख रही थी। मुझे घबराहट भी थी कि कहीं फिर
से बीवी के सामने शर्मिंदा न होना पड़े। लेकिन लंड प्रियंका चौपडा की चूचियों के बारे
में सोचकर पहले ही पजामे में तन चुका था। दवाई का आज पहला दिन था और मैं डर रहा था
कि अगर दवाई ने काम नहीं किया तो बात बिगड़ जाएगी।
मैं धीरे से प्रियंका चौपडा के
पास जाकर लेट गया और टीवी देखने लगा। मैंने एक दो बार गले में खराश की आवाज़ की लेकिन
उसने मेरी तरफ ध्यान नहीं दिया। वो सीरियल देखने में बिज़ी थी। या फिर हो सकता था कि
मुझे जान-बूझकर इग्नोर कर रही थी क्योंकि उसे भी पता था कि मेरा लंड चूत के अंदर जाते
ही थूक देगा।
इसलिए मेरे मन में डर बना हुआ
था कि आज क्या होगा।
मैंने प्रियंका चौपडा के बालों
में हाथ फिराना शुरु कर दिया, उसने कुछ रेस्पोंस नहीं दिया। मैंने उसके गालों को अपनी
उंगली से छेड़ा लेकिन तब भी उसने कुछ रेस्पोंस नहीं दिया। मैंने उसके कानों को छेड़ा
और उसके गालों पर हल्के से किस कर दिया।
प्रियंका चौपडा की नज़रें अब
भी टीवी की तरफ लगी हुई थीं।
मैंने धीरे से उसकी छाती पर हाथ
रख दिया और उसके दूधों को प्यार से सहलाते हुए दबाने लगा। वो थोड़ी सी कसमसाई और फिर
से टीवी देखने लगी।
मैंने आगे बढ़ते हुए उसके चूचों
को सूट के ऊपर से ही दबाना शुरु कर दिया और अपनी दाईं टांग को उसकी टांगों पर चढा़कर
उसके गालों को धीरे-धीरे किस करने लगा। लंड तो पहले से तना हुआ था और उसकी जांघों से
जाकर टकराकर झटका दे रहा था मानो उसको सलवार खोलने के लिए उकसा रहा हो।
उसके कोमल बदन की छुअन से मेरे
जिस्म की गर्मी भी बढ़ने लगी थी। मैंने प्रियंका चौपडा के हाथों से रिमोट लेते हुए
एक तरफ डाल दिया और उसके चेहरे को अपनी तरफ घुमाते हुए उसके होठों को चूसना शुरु कर
दिया। कुछ पल तो वो बेमन से मेरा साथ देती रही लेकिन धीरे-धीरे उसने भी मेरे होठों
को अच्छे से चूसना चालू कर दिया।
वो पूरी तरह से मेरी तरफ करवट
लेकर लेट गई और उसके हाथ मेरे बालों में आकर पीछे से मेरे सिर को सहलाने लगे। मैंने
एक हाथ से उसके सूट को उसको कूल्हों से हटाकर उसकी सलवार के ऊपर से ही उसके बड़े गद्देदार
नितम्बों को दबाना शुरु कर दिया। मेरी टांग पूरी तरह से प्रियंका चौपडा की टांगों पर
चढ़ी हुई थी। दोनों के जिस्म गर्म हो चुके थे।
प्रियंका चौपडा ने पजामे के ऊपर
से ही मेरे लंड को पकड़ लिया, उसके कोमल हाथों की पकड़ में आते ही लंड ने अपना कड़ापन
और बढ़ा दिया। लंड उसके हाथों में झटके पर झटके देने लगा। एक बार तो लगा कि झड़ जाऊंगा
लेकिन शायद दवाई असर हो रहा था, उसके कोमल हाथों की मसलन के बाद भी लंड यूं का यूं
अड़ा हुआ था। मेरे अंदर की हिम्मत के साथ खुशी भी बढ़ती जा रही थी।
मैंने प्रियंका चौपडा के लाल शर्ट को निकलवा दिया और उसकी गुलाबी ब्रा में उसके सफेद दूध मेरी नज़रों पर कहर ढहाने लगे। मैंने उसके चूचों को ब्रा के ऊपर से ज़ोर से दबा दिया और प्रियंका चौपडा की टांगें भी मेरी टांगों पर चढ़ने की कोशिश करने लगीं।
मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला
और उसको नीचे सरका कर उसकी गुलाबी पैंटी के पीछे हाथ डालकर उसके चूतड़ों की दरार में
उंगलियां चलाते हुए दरार को अपनी तरफ खींचने लगा।
प्रियंका चौपडा ने खुद ही मेरा
हाथ पकड़ा और चूतड़ों से हटाकर आगे पैंटी में डलवा दिया।
उसकी गरमा गरम चूत गीली हो रही
थी जिसकी चिकनाहट मुझे अपनी उंगलियों पर महसूस हुई। चूत पर हाथ लगते ही फिर से फीलिंग
आई कि अब तो लंड पिचकारी मार ही देगा लेकिन 2 मिनट बाद तक भी उसकी चूत को सहलाने का
आनंद लेकर मेरा लंड मैदान में डटा हुआ था।
मैंने उस देसी डॉक्टर को मन ही
मन दुआएं देना शुरु कर दिया। मेरी खुशी और जोश दोनों ही बढ़ते जा रहे थे।
प्रियंका चौपडा भी पूरी गर्म
हो चुकी थी, मेरी होठों को चूम-काटकर लाल कर चुकी थी और मेरे बनियान को ऩिकालने लगी
थी।
मैंने बनियान निकालकर एक तरफ
फेंक दी और उसको ब्रा का हुक खोलने के लिए इशारा किया।
उसने मेरा हाथ पैंटी से निकलवाया
और बैठते हुए ब्रा का हुक खोल दिया। उसके मोटे गोरे चूचे नंगे हो कर मेरी नज़रों के
सामने हवा में झूल गए। मेरे कड़क हाथों के दबाव ने निप्पलों को तानकर नुकीला कर दिया
था।
मैंने जोश में आते हुए प्रियंका
चौपडा को बेड पर पटका और उसको निप्पलों को चूसते हुए दांतों से काटने लगा। वो कसमसाने
लगी, मेरी नंगी कमर पर हाथ फिराने लगी। उसने मेरे पजामे का नाड़ा खोलने का प्रयास किया
तो मैंने उसके चूचों को चूमते हुए ही नाड़ा खोलकर पजामा नीचे सरका लिया और साथ ही फ्रेंची
भी सरका डाली।
उसका हाथ नीचे से मेरे लंड को
सहलाने लगा।
ओहह्ह… क्या अहसास था वो… उसके
नरम कोमल हाथों के सीधे संपर्क में आते ही लंड ने जन्नत का अहसास लेना शुरु कर दिया।
प्रियंका चौपडा एक हाथ से मेरे
लंड को सहला रही थी और उसका दूसरा हाथ मेरे चूतड़ों को दबा रहा था। बहुत मज़ा आ रहा
था।
कुछ देर लंड को सहलाने के बाद
उसने मेरे लंड के टोपे को आगे पीछे चलाना शुरु कर दिया। लंड पगलाने लगा और साथ ही मैं
भी… मैंने लंड को उसके हाथ से छुड़ाया क्योंकि अब शायद दवाई भी फेल होने वाली थी। मैंने
उसके चूचों से मुंह हटाया और उसके पेट की तरफ नीचे बढ़ने लगा। उसकी पैंटी पूरी गीली
हो चुकी थी। मैंने उसकी नाभि पर किस किया और दांतों से उसकी पैंटी को नीचे खींच दिया।
चूत पूरी भीगी हुई थी।
मैंने देर किए बिना होठों को
उसकी चूत का फांकों पर रख दिया और उसकी टांगें फैल गईं। मुंह से सिसकारियां निकलने
लगीं। उसने मेरे सिर को चूत में धकेलना शुरू कर दिया और मैंने जीभ को उसकी चूत के अंदर।
प्रियंका चौपडा अपनी चूत को उछालते हुए मेरी जीभ को पूरा अंदर तक लेने की कोशिश कर रही थी। मैं उसकी तड़प को समझ गया था लेकिन अगले ही पल मैंने जीभ को निकाला और अपनी दो उंगलियों को उसकी चूत में डालकर अंदर बाहर करने लगा।
चूत की गर्मी मुझे पागल किए जा
रही थी। ऊपर नज़र उठाकर देखा तो प्रियंका चौपडा के चूचों के निप्पल तनकर नुकीले पहाड़
के समान हो चुके थे और हवा में इधर-उधर हिल रहे थे और वो दोनों हाथों से पीछे बेड के
सिरहाने को पकड़कर अपनी चूत को उठा-उठाकर मेरी उंगलियों को अंदर-बाहर करवा रही थी।
इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया।
नंगी बीवी को अपनी नज़रों के सामने तड़पता हुआ देखने का अहसास निराला ही होता है।
मैंने उंगलियों की स्पीड बढ़ा
दी और प्रियंका चौपडा की सिसकारियां भी बढ़ने लगी, मेरी नवविवाहिता बीवी प्रियंका चौपडा
पागलों की तरह मचलने लगी। जब उसके सब्र की सीमा पार हो गई तो उसने मुझे कंधों से पकड़ा
और ऊपर अपनी तरफ खींचते हुए मुझे अपने ऊपर लेटाकर मेरे होठों को चूस डालते हुए नीचे
से अपने हाथ में लंड को पकड़ा और चूत पर लगाकर मुझे बांहों में भर लिया। लंड चूत के
अंदर फिसलता हुआ गहराई में उतरने लगा।
ओह्ह्ह्ह… मेरे आनंद का ठिकाना
नहीं था।
प्रियंका चौपडा मेरे होठों को
चूस रही थी और लंड उसकी चूत में समाता जा रहा था। मेरी छाती उसके चूचों पर जाकर सट
गई थी। उसकी टांगें मेरे चूतड़ों पर आकर लिपट गई थीं। अब मुझसे भी कंट्रोल नहीं हुआ
और मैंने प्रियंका चौपडा की चूत को चोदना शुरु कर दिया। साथ ही हम दोनों एक दूसरे के
होठों को चूसने में लगे हुए थे। लंड गचा-गच अंदर बाहर होने लगा।
लेकिन 3-4 मिनट बाद लंड ने अकड़ना
शुरु कर दिया और मेरे ना चाहते हुए भी प्रियंका चौपडा की चूत में पिचकारी मारने लगा।
मैं पसीना-पसीना होकर प्रियंका चौपडा के ऊपर गिर गया और वो प्यार से मेरी कमर पर हाथ
फिराने लगी।
2 मिनट बाद जब मैं उठा तो उसके
चेहरे पर मुस्कान थी। मैं समझ गया कि आज मैंने उसको खुश कर दिया है। उस रात हम दोनों
नंगे ही एक-दूसरे की बांहों में लिपटे पड़े रहे।
अब तो मेरे अंदर का आत्मविश्वास
जागने लगा था। धीरे-धीरे 3-4 मिनट से बढ़कर सेक्स की टाइमिंग 6-8 मिनट तक पहुंच गई
थी। प्रियंका चौपडा भी काफी खुश रहने लगी थी। मैंने सोचा कि मेरी सबसे बड़़ी परेशानी
खत्म हो गई है। लगभग तीन महीने होने को आए थे और दवाई का कोर्स भी पूरा हो चुका था।
दवाई खत्म होने के बाद मैंने और दवाई नहीं ली और उसके हफ्ते भर बाद तक सेक्स की टाइमिंग
में कोई बदलाव नहीं आया।
लेकिन जब 15-20 दिन का समय बीत
गया तो फिर से टाइम कम होना शुरु हो गया। मेरी चिंता फिर से बढ़ने लगी। मैं दोबारा
हकीम के पास गया और दवाई लेकर आ गया। टाइम में थोड़ा इजाफा हुआ लेकिन जो फर्क पहले
लगा था अबकी बार वो असर नहीं दिखा। अगले तीन महीने बीतने के बाद भी वही हालत रही। बल्कि
अब तो प्रियंका चौपडा के हाथ में लंड आते ही कंट्रोल छूट जाता था और स्थिति बद से बदतर
होती चली गई। मैं डिप्रेशन में जाने लगा।
इधर प्रियंका चौपडा प्रेग्नेंट
हो चुकी थी, अब वो मुझमें इंटरेस्ट नहीं लेती थी और घर का काम करने के बाद टीवी और
इधर-उधर की बातों में लगी रहती थी।
एक रात की बात है जब मैंने प्रियंका चौपडा को सेक्स के लिए उकसाया तो उसने ताना देकर कह ही दिया- रहने दो, आपके बस का नहीं है। मेरा मूड भी क्यों खराब करते रहते हो।
उस दिन मुझे काफी धक्का लगा।
धीरे-धीरे हमारी अनबन शुरु हो
गई और लड़ाई भी हो जाती थी।
कुछ दिन बाद रोज़ ही झगड़ा होने
लगा, सेक्स की पूर्ति ना होने की खुंदक जुबानी जंग के रूप में सामने आने लगी। मैं भी
अक्सर रात के समय घर से बाहर दोस्तों के पास रुकने लगा क्य़ोंकि घर में अब मन नहीं लगता
था।
एक दिन सुबह जब मैं घर लौटा तो
घर वाले इकट्ठा हो रहे थे, सब सिर पकड़े हुए बरामदे में बैठे हुए थे।
मैंने पूछा तो माँ ने बताया कि
बहू घर छोड़कर चली गई है।
मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन
खिसक गई, मैंने प्रियंका चौपडा को फोन लगाया तो उसने फोन नहीं उठाया। मैं उसके घर गया
तो वो सामने भी नहीं आई। उसकी माँ यानि कि मेरी सास से बात हुई तो पता चला कि प्रियंका
चौपडा तलाक लेना चाहती है। वो इस शादी से खुश नहीं है।
मैंने कारण पूछना चाहा लेकिन
शर्म के मारे पूछते-पूछते रह गया। कारण शायद मेरी सास भी जान चुकी थी और हम दोनों पति-पत्नी
भी। मैं अपना सा मुंह लेकर वहां से आ गया।
मुझसे ये सदमा बर्दाश्त नहीं
हुआ और मैंने यार दोस्तों के साथ दारू पीना शुरु कर दिया।
तलाक में अभी कुछ वक्त बाकी था
लेकिन तलाक तो निश्चित हो ही चुका था। मैं अपना ग़म भुलाने के लिए दारू का सहारा लेने
लगा। रात को देर तक दोस्तों के रूम पर पड़ा रहता था। और कई बार सुबह घर आता था।
मेरी इस हालत से घर वाले भी परेशान
रहने लगे थे, वो मेरी दूसरी शादी करवाने का प्लान करने लगे लेकिन मैंने हाँ नहीं की
क्योंकि खुद पर से मेरा भरोसा उठ गया था और मैं अब दूसरा सदमा बर्दाश्त करने की हालत
में नहीं था।
न काम में मन लगता था और न आराम
में… बस यहां-वहां टाइम पास करता फिरता रहता था।
जिंदगी बोझ सी लगने लगी थी।
6 महीने होने ही वाले थे कि एक
दिन अचानक प्रियंका चौपडा की माँ हमारे घर पर आई। मैंने तो उनसे बात नहीं की लेकिन
उनके जाने के बाद पता चला कि प्रियंका चौपडा अपना घर छोड़कर किसी और के साथ भाग गई
है… जब मुझे ये बात पता चली तो मैं ज़ोर-जो़र से हंसने लगा लेकिन जल्दी ही आंखों में
आंसू भी आने लगे। उसने अपने घर की इज्जत के साथ-साथ हमारे घर की इज्जत का भी फालूदा
बना दिया, जिसे समाज बड़े मज़े से रोज़ चटखारे लेकर खाने लगा।
मेरी बीवी प्रियंका चौपडा के
साथ मेरा तलाक होने वाला था लेकिन वो उससे पहले ही किसी और के साथ भाग गई। पड़ोस में
बात फैल गई और जब बात फैल ही गई तो हर तरह की बात होने लगी। मुझे भी माँ से रोज़ कुछ
न कुछ नया सुनने को मिलने लगा।
तलाक की वजह भी सब लोग जान चुके थे इसलिए मुझे घर से बाहर निकलने में भी शर्म महसूस होती थी। लेकिन क्या करता… किस-किस का मुंह बंद करता इसलिए चुपचाप निकल जाता और ऐसे ही आकर बिस्तर पर गिर पड़ता।
मैं डिप्रेशन में जाने लगा। विकी
को भी मेरी चिंता होने लगी, विकी ने मुझे बहुत समझाया लेकिन मैं इस बेइज्जती को बर्दाश्त
कर ही नहीं पा रहा था। दुकान धंधा बिजनेस सब चौपट हो गया।
मैं हर वक्त नशे में रहने लगा
था। शक्ल पर 12 बज गए थे। मेरे घरवाले भी मुझे ताने देने लगे थे कि अपना ध्यान काम
में क्यों नहीं लगाता। अगर बीवी ही चाहिए तो हम तेरी दूसरी शादी भी करवाने के लिए तैयार
हैं।
लेकिन मैं अंदर से टूट चुका था।
विकी अभी कुंवारा था इसलिए मैं
उसके साथ ही पड़ा रहता था। कई बार नशे में दोनों ने एक दूसरे के लंड को भी सहलाया लेकिन
लंड को तो छेद में घुसे बिना चैन कहां आने वाला था। विकी ने कहा अगर तुझसे सेक्स किए
बिना नहीं रहा जाता तो मेरी गांड ही मार ले लेकिन ऐसे अपनी ज़िंदगी बर्बाद करने पर
क्यों तुला हुआ है।
उसकी यह बात सुनकर मुझे और बुरा
लगा। हालांकि वो मेरे भले के लिए ही कह रहा था लेकिन मैंने कभी उसके बारे इस तरह से
नहीं सोचा था।
उसने कहा कि अगर तुझे छेद ही
चाहिए तो मैं पैंट निकाल देता हूं, चोद ले मुझे।
मैं हैरान था कि ये कैसी बातें
कर रहा है, मैंने कहा- तू पागल हो गया है क्या? टाइम पास करने तक तो ठीक था लेकिन मैं
इतना भी गिरा हुआ और गंदा काम नहीं करूंगा कि दोस्त की ही गांड मार लूं।
उसने कहा- तो फिर और तू चाहता
क्या है?
मैंने कहा- अकेलापन…
कहकर मैं वहां से उठकर चला गया,
वो मुझे आवाज़ लगाता रहा लेकिन मैं नहीं रुका। कुछ दिन तक मैंने विकी से भी बात नहीं
की। उसके फोन भी आए लेकिन मैंने फोन पर भी बात नहीं की।
एक दिन वो मेरे घर आ गया, मैं
ऊपर अपने कमरे में पड़ा हुआ था, वो आकर मेरे पास बेड पर बैठ गया लेकिन मैं उससे नाराज़
था।
विकी ने कहा- मेरी शादी तय हो
गई है।
उसकी ये बात सुनकर मुझे खुश होना
चाहिए था लेकिन बजाये खुश होने के मेरे मन में एक और बात ने घर कर लिया। अब तक उसके
साथ किसी तरह जिंदगी बीत रही थी लेकिन अब उसकी भी शादी होने जा रही है।
मैंने ऊपरी मन से कहा- अच्छी
बात है, पार्टी लूंगा बड़े वाली।
मेरे चेहरे को देखकर वो मुस्कुराया
और कहा- हां, तू जैसी चाहे वैसी पार्टी ले लेना… लेकिन ऐसे बेवड़ों की तरह जीना छोड़
दे।
मैंने कहा- शादी कब है?
उसने बताया कि अगले महीने ही
है।
कुछ देर हम दोनों में बातें होती
रहीं और वो उठकर चला गया। देखते ही देखते उसकी शादी का दिन भी आ गया।
सोनम कपूर की चुदाई की दास्तान
मेरा नाम सोनम कपूर है.. मैं
महाराष्ट्र से हूँ और कॉलेज की स्टूडेंट हूँ। मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच है और मैं अभी
21 साल की हूँ। मेरा फिगर ३४-२८-३० का है और रंग गोरा है।
जो घटना आज सुनाने जा रही हूँ..
तब मैं कॉलेज के दूसरे वर्ष में थी। कॉलेज के एग्जाम खत्म हो गए थे और एक महीने की
छुट्टियाँ थीं, तो मैंने हॉस्टल से घर जाने की सोची।
इस वक्त ट्रेवलिंग सीजन चल रहा
था इसलिए ट्रेन की कन्फर्म बुकिंग नहीं मिल रही थी। मेरी सारी सहेलियां घर जा चुकी
थीं पर मेरे जाने के दिन भी मेरी टिकट कन्फर्म नहीं हुई थी और मुझे RAC में बर्थ शेयर
करना पड़ा।
ट्रेन का टाइम भी रात को 10 बजे
का था। मैंने हॉस्टल से स्टेशन तक ऑटो की, उस दिन मैंने लॉग स्कर्ट और स्लीवलेस टी-शर्ट
पहनी हुई थी।
ट्रेन आने के बाद मैं अपने बर्थ
पर बैठ गई। आरएसी की बर्थ साइड लोअर होती हैं.. और इस बर्थ पर मेरे साथ जो महिला ट्रेवल
करने वाली थी, वो अपने पति के साथ आई हुई थी।
ऐन मौके पर उसने अपनी बर्थ एक्सचेंज
कर ली। अब वो अपने पति की बर्थ पर चली गई और मेरे बर्थ पर एक लड़के को भेज दिया।
जब मैंने उसको देखा तो बस देखती
ही रह गई वो एक मिलिट्री अफसर था। उसकी उम्र लगभग 24-25 की होगी। वो युवक लम्बा और
हैंडसम था।
उसने मुझे ‘हाय..’ कहा.. मैंने
भी उसे ‘हाय..’ कहा।
उसने अपना सब सामान एडजस्ट करके
रखा और बैठ गया।
करीब 15-20 मिनट तक तो बस हम
दोनों एक-दूसरे को चोरी-छुपे ही देखते रहे। फिर उसने बात करना चालू किया। पहले उसने
मेरा नाम पूछा और अपना नाम साहिल बताया।
फिर उसने मुझसे मेरे होमटाउन
के बारे में पूछा.. मेरे कॉलेज के बारे में पूछा। इस तरह बातचीत शुरू हो गई। टीसी भी
टिकट चैक करके चला गया।
सब लोग सोने की तैयारी कर रहे
थे, सिर्फ हम दोनों ही बातें कर रहे थे। वो अपने मिलिट्री के किस्से सुना रहा था और
मैं अपने कॉलेज के किस्से बता रही थी।
धीरे-धीरे हम एक-दूसरे की ओर
आकर्षित हो रहे थे।
फिर बातचीत थोड़ी पर्सनल होती
चली गई। वो बीच-बीच में नॉनवेज जोक्स और किस्से सुनाने लगा। मैं बस उन्हें सुनकर हँस
देती थी। रात होते ही ठण्ड बढ़ने लगी.. तो मैंने अपना ब्लैंकेट अपने पैरों पर ओढ़ लिया।
उसके पास कोई ब्लैंकेट नहीं था..
तो मैंने भी उसे रिक्वेस्ट की कि वो भी ब्लैंकेट से अपने पैर ढक ले।
उसने मेरी बात मानते हुए अपने पैर भी मेरी ब्लैंकेट में डाल दिए।
अब बात करते टाइम कभी-कभी हमारे
पैर एक-दूसरे को टकरा जाते थे.. पर मैं कुछ नहीं बोलती थी।
इससे उसकी हिम्मत बढ़ गई और उसने
बात करते-करते ब्लैंकेट के नीचे मेरे पैरों पर हाथ रख दिए और धीरे-धीरे सहलाने लगा।
इसी के साथ हम दोनों ने बातें करना भी जारी रखा।
मेरे तरफ से कुछ भी विरोध न पाते
देख उसने हाथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसका कर मेरे नंगे टाँगों को घुटनों तक सहलाना चालू
कर दिया।
मेरा तो मन कर रहा था कि जाऊँ
और उसकी गोद में बैठ जाऊँ.. पर ट्रेन में हम उतना ही कर सकते थे।
फिर उसने अपना पैर मेरे दोनों
पैरों के बीच में मेरे स्कार्ट के अन्दर डाल कर सीधा मेरी चूत तक ले आया। मैंने डर
कर इधर-उधर देखा कि कोई देख न ले। लेकिन सब लोग सो रहे थे।
फिर वो अपने अंगूठे से मेरी चुत
को मेरी पेंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा, वो मुझे लगातार देखते हुए मेरी चुत सहला रहा
था।
मैंने उत्तेजना में अपनी आंखें
बंद कर लीं और थोड़ी ही देर में मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया, मैंने हाँफते हुए उसके अंगूठे
को पकड़ लिया और उसको रुकने को इशारा किया।
वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा
रहा था।
फिर मैंने थोड़ा सोच कर उसका पैर
मेरी स्कर्ट में से हटा दिया.. यह देख कर वो नाराज हो गया। मैं वहाँ से उठकर बाथरूम
की तरफ चली गई और उसकी ओर देख कर मुस्कुराते हुए अन्दर चली गई।
मेरा इशारा समझते ही वो मेरे
पीछे-पीछे बाथरूम में आ गया और दरवाजे का लॉक लगा दिया।
अब उसने मुझे गले लगा लिया। हम
दोनों किस करने लगे। वो मेरी गांड को कपड़ों के ऊपर से सहला रहा था और दबा रहा था। थोड़ी
देर किस करने के बाद उसने मेरी टी-शर्ट को निकाल दिया और मुझे घुमा कर मेरी पीठ और
नेक पर किस करने लगा। फिर वो अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को दबाने लगा।
मैंने अपनी आँखें बंद कर ली थीं
और जोर-जोर से सांस ले रही थी। उसका लंड मुझे कपड़ों के ऊपर से ही मेरी गांड की दरार
में महसूस हो रहा था।
थोड़ी देर बाद उसने मेरी ब्रा
का हुक खोला ओर मेरी ब्रा भी उतार दी। फिर मुझे अपनी तरफ घुमा के मेरे निप्पलों को
बारी-बारी चूसने लगा। मैं तो पागल होने लगी थी और अपने हाथों से उसके बाल पकड़ कर उसका
सिर अपने मम्मों पर दबा रही थी।
वो एक निप्पल अपने होंठों में
लेकर चूसता.. तो दूसरे को अपने हाथों से दबा देता। मेरी तो सिसकारियां उम्म्ह… अहह…
हय… याह… निकलने लगी थीं।
थोड़ी देर बाद उसने मेरा स्कर्ट मेरी पैंटी के साथ ही निकाल दिया और मुझे पूरा नंगी कर दिया, उसने मुझे उठा कर मुझे वाशबेसिन पर बिठा दिया और खुद घुटनों पर बैठ गया। अब उसने मेरी टांगें चौड़ी करते हुए मेरी जांघों को किस करते हुए धीरे-धीरे मेरी चुत तक पहुँच गया, फिर उसने धीरे से मेरी क्लिट को अपने मुँह में भर लिया और चूसना चालू कर दिया।
मेरे मुँह से एक तेज ‘आहह..’
निकल गई।
उसने दोनों हाथ ऊपर करके मेरे
मम्मों को दबाते हुए मेरी क्लिट को चबाना चालू रखा। मैं यह सहन नहीं कर पाई और जोर
से उसके बाल खींचते हुए अपना पानी छोड़ दिया। उसने बिना रुके मेरा सारा पानी चाट लिया
और अपनी जीभ की नोक से मेरी चुत को चोदने लगा।
मेरी हालात खराब होती जा रही
थी, वो मेरे मम्मों को दबाता जा रहा था और मेरी चुत को जीभ से चोदे जा रहा था।
कुछ ही पलों में मेरी चुत उसकी
जीभ के सामने फिर से हार गई और मैं तीसरी बार झड़ गई।
फिर मैंने उसको खड़ा किया और बेसिन
से उतर गई, अब मैं उसको किस करने लगी, फिर उसके शर्ट के बटन खोलते हुए उसके सीने पर
हाथ फेरने लगी।
उसने अपनी शर्ट को निकाल दिया,
मैं उसके सीने पर किस करते हुए उसके निप्पल को दाँतों में लेकर काटने लगी और चूसने
लगी। वो भी पागलों की तरह मेरे मम्मों और गांड को दबा रहा था।
फिर धीरे-धीरे मैं किस करते-करते
नीचे जाने लगी और अपने घुटनों के बल बैठ गई। वो मेरा इशारा समझ गया और उसने अपनी पैंट
खोल कर अपना लंड बाहर निकाल लिया।
मैंने एक हाथ से उसके लंड को
पकड़ लिया और हाथों से मुठ मारने लग गई और मैं दूसरे हाथ से उसके बॉल्स से खेल रही थी।
मैंने उसकी ओर देखा तो उसने मुझे लंड चूसने का इशारा किया, मैंने भी मुस्कुराते हुए
उसके लंड के सुपारे को किस किया और जीभ से उसके लंड को पूरा चाट लिया।
फिर मैंने उसके लंड के सुपारे
को मुँह में लेकर चूसने लगी, मैं कभी लंड को चूसती.. कभी जीभ से चाटती.. कभी उसके लंड
की गोटियों को चाटती और एक हाथ से अपनी चुत सहलाती जाती।
थोड़ी देर लंड चूसने के बाद उसने
मेरे सिर को जोर से पकड़ लिया और जोर से अपना लंड मेरे मुँह में अन्दर-बाहर करने लगा।
मैं समझ गई कि वो झड़ने के करीब है।
थोड़ी ही देर में उसने मेरे मुँह
में ही अपना पानी निकाल दिया और जोर-जोर से हाँफने लगा। मैंने उसका लंड चाट कर साफ़
कर लिया और पानी से अपना मुँह साफ़ कर लिया।
उसने मुझे अपना लंड चूस कर खड़ा
करने को बोला ताकि वो मुझे चोद सके लेकिन मैंने उसको मना कर दिया।
हमको बाथरूम में आए हुए बहुत
टाइम हो गया था, फिर हम दोनों ने कपड़े पहन लिए। पहले वो बाहर चला गया.. थोड़ी देर बाद
मैं भी अपने बर्थ पर वापस आ गई।
अब हम दोनों एक-दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे।
फिर हमने थोड़ी देर बातें की एक-दूसरे
का मोबाइल नंबर लिया और सो गए। मेरा स्टेशन आने से दो घंटे पहले हम वापस बाथरूम में
गए। मैंने फिर से उसके लंड को चूसा। उसने मेरी चुत को चूसा और हम दोनों झड़ गए। उस दिन
के बाद हम हर रात फ़ोन पर बात करते हैं और जल्द ही मिलने के बारे में सोच रहे हैं।
कुछ दिन बाद हमने मिलने का प्लान
बनाया, हमने एक जगह फिक्स की जो मेरे कॉलेज से 150 किलोमीटर दूर थी, जहां हम दोनों
को कोई भी नहीं पहचानता था.
उस दिन मैंने लाल रंग का एक वन
पीस ड्रेस पहन रखा था जो मेरे घुटनों तक लंबा था और उसमें मेरे गोरे पैर सबको दिखते
थे, मैंने गले में एक नेकलेस पहन रखा था जो मेरे ड्रेस के साथ अच्छा लग रहा था और कानों
में इयरिंग्स पहनी हुई थी.
मैं अपने हॉस्टल से निकली और
दोपहर बाद करीब चार बजे उस जगह पर पहुंची, वो पहले से अपनी कार लेकर वहां पहुंचा हुआ
था, हमने एक दूसरे को देखा फिर हाथ मिला कर हाई बोला, फिर उसने मेरे लिए अपने गाड़ी
का दरवाजा खोला और मैं गाड़ी में बैठ गई.
दो-तीन घंटे हम वहां घूमे फिरे,
कुछ प्लेसेस देखे, फिर एक रेस्ट्रोरेंट में जाकर खाना खाया.
तब हम होटल की तरफ निकले, साहिल
ने पहले से ही एक रूम बुक किया था, रिसेप्शन से चाबी लेकर हम सीढ़ी से हमारे रूम की
तरफ निकले, साहिल ने दरवाजा खोल दिया और हम दोनों अंदर चले गए, उसने दरवाजा लॉक किया
और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचा.
मैं घूमती हुई उसकी बाहों में
चली गई, उसने अपने दोनों हाथों से मुझे उठाया और बेड की तरफ चल पड़ा, उसने मुझे हल्के
से बेड पर लिटा दिया, मैं उसकी तरफ वासना भरी निगाहों से देखने लगी.
उसने मेरे ऊपर आते हुए अपने होंठ
मेरे होंठों पे रख दिए, मेरे होंठ उसके होंठों के स्पर्श से थरथरा उठे, साहिल उठ खड़ा
हुआ, उसने अपना जैकेट निकाल दिया, अपनी घड़ी निकाली और अपने शर्ट की बाजू के बटन खोल
दिए, मैं खड़ी होकर उसके पास गई और उसकी शर्ट के बटन एक एक करके खोलने लगी.
वो भी मेरी तरफ प्यासी निगाहों
से देख रहा था, मैंने उसकी शर्ट के सारे बटन निकाल दिए और शर्ट को साइड पर रख दिया
और उसके सीने पर किस करने लगी, उसके सीने को चूमते हुए मैंने उसकी बेल्ट खोली और पैंट
के हुक को खोल कर पैंट नीचे सरका दी, अब वो सिर्फ अपनी अंडरवीयर में था.
मेरे नाजुक हाथों के स्पर्श से
वो मचल उठा था, उसने मुझे कस के गले लगाया, मेरे चुचे उसके सीने में गड़ गये, मैं भी
बहुत उत्तेजित हो गई थी.
वह वैसे ही मुझे पलंग के पास
ले गया और मुझे पलंग पर बिठाया, मेरे पैर पलंग से नीचे झूल रहे थे.
साहिल मेरे सामने बैठा, मेरे
पैर ऊपर उठा कर मेरे पैरों से सैंडल निकाल दिए, मेरे गोरे पैरों को देख कर उससे रहा
नहीं गया और वो मेरे पैरों को चूमने लगा, वो मेरे तलवों को भी चूम रहा था,
वो मेरे तलवो पे उंगलियों से गुदगुदी करने लगा, गुदगुदी की वजह से मैं मेरा पैर इधर उधर हिलाने लगी, घुटनों तक की ड्रेस की वजह से उसकी नजर मेरी जांघों पर पड़ी, वो धीरे धीरे अपना हाथ ऊपर सरकाते हुए मेरे पैरों को घुटनों तक सहलाने लगा.
मर्दाना स्पर्श से मेरे रोंगटे
खड़े हो गए थे, मैं कुछ विरोध ना करते हुए उस पल का मजा ले रही थी, वो सेक्स मैं एक
निपुण खिलाड़ी के तरह मुझे उत्तेजित कर रहा था.
उसने मेरे बगल में हाथ डाल कर
मुझे खड़ा किया और नीचे बैठते हुए मेरी ड्रेस को पकड़ा और ऊपर उठाते हुए मेरे शरीर से
अलग कर दिया, मैंने भी अपने हाथ ऊपर उठा कर ड्रेस निकालने में उसकी मदद की.
वो थोड़ा पीछे हुआ और मेरे गोरे
शरीर को निहारने लगा, वो मेरे पैरों को घुटनों तक नंगा देख चुका था, अब वो मेरी नंगी
जांघें, नाजुक कमर को देख रहा था, मेरे सफ़ेद पेट, गहरी नाभि देख रहा था.
मैंने उस दिन काले रंग की ब्रा
पहनी हुई थी, मेरे गोरे गले पे वो नेकलेस चमक रहा था, वो मुझे ऊपर से नीचे तक निहार
रहा था, मैं उसके सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में खड़ी थी.
वो मेरे सामने घुटनों पर बैठ
गया और मेरे पेट पर किस करने लगा, धीरे धीरे ऊपर सरकते हुए वो मेरे चुचों के पास पहुंचा,
फिर उसने हाठ मेरे पीछे पीठ पर ले जाते हुए मेरी ब्रा के हुक को खोला और ब्रा निकाल
दी, मेरे गोरे स्तन उसके सामने नंगे हो गए, वो मेरे ब्राउन ऐरोला को, खड़े हुए निप्पल्स
को देख रहा था, मेरे दायें ऐरोला के पास के तिल पर उसकी नजर पड़ी, तो उसने पहले मेरे
तिल को चूमा फिर अपने होंठों को मेरे ऐरोला पर घुमाया, फिर मेरे निप्पल को धीरे से
काटा, ये सब उसने इतने नजाकत से किया कि दर्द होने के बजाय मैं और चुदासी हो गई.
फिर वो अपनी जीभ से मेरे निप्पल्स
को छेड़ते हुए मेरे एक एक निप्पल बारी बारी चूसने लगा, मेरा हाथ अब उसके बालों में घूमने
लगा था और मेरी आँखें सेक्स के नशे में बंद हो गई थी, उसने निप्पलों को चूसना छोड़ दिया
और वापस किस करता हुआ मेरे पेट तक पहुंचा, फिर उसने अपनी उंगलियों को मेरे पेंटी की
इलास्टिक में फंसाया और धीरे से मेरी पेंटी को उतार दिया.
उसका सर बिल्कुल मेरी चुत के
पास था, मेरी चुत की खुशबू उसे मदहोश कर रही थी, मैंने अपनी गोरी चुत को सुबह ही शेव
किया था, मेरे चुत के होंठ अब गीले हो गए थे, साहिल ने मेरे नीचे के होंठों पर अपनी
नाक को रगड़ा, तो मेरी चुत ने अपने आप ही पंखुड़ियों को खोल कर बंद किया, मेरी चुत की
खुशबू फिर एक बार उसके नथुनों में भर गई, उसकी निक्कर में अब एक बड़ा सा टेन्ट बना हुआ
था.
उसने मेरी चुत को हल्के से चूमा
और फिर धीरे से पंखुड़ियों को अलग किया और मेरे क्लिट को अपनी जीभ से छुआ, मेरा तन बदन
सिहर उठा और मेरे मुख से ‘आह…उम्म्ह… अहह… हय… याह… ‘ निकल गया.
मैंने अपने दांतों तले मेरे निचले
होंठ को दबाया हुआ था, वो अपने थूक से मेरी क्लिट को गीला कर रहा था, मैंने अपने हाथों
से उसका सिर पकड़ लिया और अपनी चुत पर दबाने लगी, वो भी अपनी जीभ से मेरी क्लिट को मसल
रहा था.
उसने अपनी उंगली मेरी चुत में
घुसा दी और गोल गोल घुमाने लगा, थोड़ी ही देर बाद मैं झड़ गई, वो लपालप मेरी चुत का रस
पिए जा रहा था.
मैं थक कर पलंग के किनारे पैर
पसार कर बैठ गई, वो आगे आकर फिर से मेरी चुत चाटने लगा, मैंने भी उसका सिर पकड़कर मेरे
चुत पे दबाया और इशारे से ही मुझे और चाहिए बताया.
उसने फिर से दो उंगलियाँ मेरी चुत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा, मैं उसके वार सहन नहीं कर सकी और मेरा बदन अकड़ने लगा, मैंने अपने पैर भींच लिए पर उसका काम बिना रुके चालू था, मैं पीछे लेट के फिर से झड़ने का मजा लेने लगी, मेरे पैर अभी भी पलंग के नीचे थे.
साहिल खड़ा हो गया, उसने अपनी
निकर निकाल दी, फिर मेरी टांगों के बीच आकर उसने मेरी चुत पर अपना लंड रखा और अपने
लंड से मेरी चुत को मसलने लगा, फिर धीरे से अपना सुपारा मेरी चुत के अंदर घुसा दिया.
मेरी टाइट चुत वैसे भी बहुत पानी
छोड़ रही थी तो उसे कोई दिक्कत नहीं हुई.
उसने फिर एक धक्का मार कर अपना
आधा लंड अंदर घुसेड़ दिया, उसने अपने उंगली से मेरी क्लिट को छेड़ा तो मेरी चुत फिर से
गीली होने लगी, उस गीलेपन की मदद से उसने एक ही धक्के में अपना बाकी लंड अंदर घुसेड़
दिया.
वो खड़े खड़े ही मेरी चुत में धक्के
लगा रहा था, उसके लंड के घर्षण से मेरी चुत धीरे धीरे पानी छोड़ रही थी और वो पानी बह
कर बेड पर गिर रहा था, मैं भी अपनी आँखें बंद करके चुदाई का मजा ले रही थी, उसके जोर
के धक्कों से मेरा पूरा बदन हिल रहा था.
उसकी नजर मेरी चुची पर अटकी हुई
थी, चूसने के वजह से मेरे निप्पल उभर आये थे हल्की सी रोशनी में मेरी गोरी चुची चमक
रही थी, मेरे बदन का हिलना, बीच बीच में रोंगटे खड़े होना, मेरी उत्तेजना को दर्शा रहा
था.
उसने मेरे पैरों को पकड़ा, खुद
थोड़ा नीचे झुका, मेरे पैर अपने कंधों पर रख दिए, उसने उसी पोजीशन में धक्के देने चालू
रखा, उसने अपना सिर नीचे लेते हुए मेरा एक निप्पल अपने होंठों में पकड़ा और चूसने लगा,
अपनी जीभ से मेरे निप्पल को छेड़ने लगा.
उसके धक्के तेज होने लगे थे,
उसका शरीर अकड़ने लगा था, वो झड़ने के बहुत करीब था, और फिर उसने अपना गर्म गर्म लावा
मेरी चुत में छोड़ दिया, मैं भी बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसके साथ ही झड़ गई, उसने थोड़े
धक्के और लगाये, फिर मेरे पैर अपने कंधों से नीचे ला कर मेरे ऊपर ढेर हो गया.
हम दोनों को थकान की वजह से कब
नींद लगी, पता ही नहीं चला.
रात में हमने फिर एक बार सेक्स
किया और नंगे ही एक दूसरे के बाहों में लेट गए, साहिल ने उस रात मुझे पूरी संतुष्ट
कर दिया.
सुबह हमने साथ नाश्ता किया और
उसने मुझे बस स्टॉप पे छोड़ दिया, उसके बाद वो अपनी ड्यूटी पर चला गया.
और हमारी फिर कभी मुलाकात नहीं
हुई.
बात तब की है.. जब मैं कॉलेज
में पढ़ती थी। मैं और मेरी क्लासमेट एक रूम में ही रहते थे।
मेरी रूममेट हमेशा अपने बॉयफ्रेंड
से रात-रात भर फ़ोन पर बातें किया करती थी।
मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं था..
तो मैं अकेलापन महसूस करके रह जाती थी।
हमारी बिल्डिंग के पास एक गार्डन
है और एक रेस्टोरेंट भी है। मैं रोज शाम को वहाँ नाश्ता करने जाती थी और छोटे बच्चों
को खेलते हुए देखती थी।
एक दिन जब मैं वहाँ गई.. तब वहाँ एक डेढ़ साल की बच्ची रो रही थी, उसके आस-पास कोई नहीं था। तो मैं उसके पास गई और उससे उसका नाम पूछा और थोड़ी बात की.. और उसे आइसक्रीम दिला दी।
थोड़ी देर बाद उसने बताया कि उसका
नाम परी है और वो अपने पापा के साथ आई है।
इतने में उसके पापा भी वहाँ आ
गए और उन्होंने मुझे थैंक्स बोला और कॉफ़ी ऑफर की।
मैंने ‘ना’ कहा.. लेकिन बाद में
उनके बहुत रिक्वेस्ट करने पर ‘हाँ’ बोल दिया।
उनका नाम साहिल था और वह सिटी
में नए थे।
अब जब मैं पार्क में जाती थी..
तो साहिल और परी से मिलती थी। बातों-बातों में साहिल ने बताया कि उनकी वाइफ की डेथ
उनकी परी के जन्म के समय ही हो गई थी और परी के लिए उन्होंने दूसरी शादी नहीं की।
मुझे उनके लिए दुःख लगा।
अब हम रोज 2-3 घन्टे पार्क में
बातें करते थे और रात को मैसेज किया करते थे।
मुझे अब वो अच्छे लगने लगे थे।
परी और मैं भी आपस में घुल-मिल गए थे।
एक सन्डे को साहिल का कॉल आया
और उन्होंने बोला- मेरे ऑफिस से अर्जेंट कॉल आया। मुझे 5-6 घन्टे के लिए जाना है..
अभी तक परी की आया भी नहीं आई है.. तो क्या तुम परी का ध्यान रख लोगी?
मैंने ‘हाँ’ कर दी.. साहिल मुझे
लेने मेरी बिल्डिंग के पास आए और मुझे साथ लेकर अपने घर पर छोड़ दिया और ऑफिस चले गए।
उनके घर पर मैंने परी को खाना
दिया और उसे नहलाने लगी.. तो मेरा ड्रेस गीला हो गया।
मैंने उसे सुलाया और कपबोर्ड
में ड्रेस देखने लगी, मुझे साहिल की वाइफ की बहुत साड़ी और ब्लाउज मिले। उसकी और मेरी
फिटिंग लगभग एक सी थी। मैंने सोचा कि ड्रेस सूखने पर वापस चेंज कर लूँगी।
साहिल को आने में अभी टाइम था..
तो मैंने एक-एक करके साड़ी पहन कर देखना शुरू कर दीं।
उसमें एक पिंक कलर की साड़ी थी..
जब मैंने वो पहनी.. तभी दरवाजे की घंटी बजी और परी की नींद खुल गई और वो रोने लगी।
मैंने दौड़ कर दरवाजा खोला तो
साहिल थे, मुझे उनकी वाइफ की साड़ी में देख कर वे चौंक गए।
मैं जाकर परी को शांत करने लगी,
थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई।
जैसे ही मैं खड़ी हुई.. तो साहिल
ने मुझे पीछे से पकड़ लिया। मैं कुछ समझती.. तब तक साहिल ने मेरे नंगे पेट पर और छाती
पर हाथ फेरना चालू कर दिया।
मैंने विरोध किया.. पर उनकी ताकत
ज्यादा थी।
थोड़ी देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा और मेरा विरोध कमजोर होने लगा। उन्होंने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मुझे चुम्बन करने लगे, मैं भी साथ देने लगी।
कब हमारे कपड़े उतर गए.. पता ही
नहीं चला। वो मेरे स्तनों को चूसने लगे.. मैंने अपनी आंखे बंद कर लीं और उनके बाल पकड़
लिए।
वो कभी मुझे किस करते तो कभी
स्तन चूसते.. कुछ मिनट बाद उन्होंने मुझे चोदने की स्थिति में लिटा कर अपना लिंग मेरे
अन्दर घुसा दिया।
मुझे थोड़ा दर्द हुआ पर मैं सहन
कर गई।
दस मिनट के बाद हम साथ ही झड़
गए और वैसे ही लिपट कर सो गए।
एक घन्टे बाद नींद खुली तो साहिल
मुझे ‘सॉरी’ बोलने लगे।
मैंने भी कहा- जो कुछ भी हुआ
उसमें मेरी भी मरजी थी।
तो वो खुश हुए और मुझे चूमने
लगे।
उस रात मैं उनके घर में ही रही।
उसके बाद हर 3-4 दिन बाद हम सेक्स करने लगे थे। बाद में जब मेरा कॉलेज खत्म हुआ और
मैं वो शहर छोड़ कर पढ़ाई के लिए दूसरे शहर में चली गई।
मेरा नाम सोनम कपूर है, उम्र
२३ हाइट 5’4″ साइज ३४-३०-३६ है, मेरा रंग गोरा है और दिखने
में बहुत सुन्दर हूँ, मैं हमेशा ट्रेंडी और अट्ट्रक्टिव रहती हूँ.
मेरे पति साहिल पाटिल २८ साल
के मुझसे ५ साल बड़े हैं, मेरे जितनी हाइट है और दिखने में गोरे और हैंडसम हैं, उनका
खुद का बिज़नेस है, हमारी शादी को १ साल हुए हैं।
हमने अपना बंगलो पेंट करने का
फैसला लिया और हमारे 4bhk बंगलो को रंगने का काम एक पेंटर को दिया, वो पेंटर कॉन्ट्रैक्ट
लेता था और जरूरत के अनुसार दो तीन पेंटर भेज देता था, उसके और जगह पे भी काम चालू
थे.
सबसे पहले वो पेंटर घर देखने
और रेट फिक्स करने आया तभी मुझे उसकी नज़र ठीक नहीं लगी, वो सुबह सुबह घर पर आया तब
मैंने 3 पीस लाल रंग की नाईटी पहनी हुई थी, मेरे पति नाशता कर रहे थे तो मैंने दरवाजा
खोला तो सामने 6 फुट का एक सांवला सा मस्क्युलर आदमी खड़ा था, उसकी नजर मेरे स्तनों
पर टिकी थी.
उसने मुझे मुस्कुरा कर ‘हेल्लो’
बोला पर मेरे स्तनों से नजर नहीं हटाई.
‘हेल्लो’ मैंने सोचते हुए जवाब
दिया.
‘मैं साहिल पेंटर…’ वो मेरे सारे
बदन को देखते हुए बोला.
‘आओ अंदर आओ!’ मैं दरवाजे से
बाजु होकर बोली और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया.
‘बैठो…’ मैं सोफे की तरफ इशारा करके किचन की तरफ जाने लगी तो वो मेरे गोल नितम्बों की तरफ देखने लगा.
‘सुनते हो… पेंटर आया है!’ मैंने
अपने पति से कहा.
मेरे पति बाहर आये, नार्मल बातचीत
हुई फिर पेंटर घर देखने लगा, ग्राउंड फ्लोर पे दो बैडरूम किचन और हॉल था और ऊपर के
फ्लोर पर दो बैडरूम थे, हमारा मास्टर बैडरूम ऊपर के फ्लोर पर था और सास-ससुर अगर गांव
से आये तो उनके लिए नीचे का बैडरूम था. मेजरमेंट टेप लेकर मैं, साहिल और पेंटर हर रूम
में जाने लगे.
ऊपर के फ्लोर पे जाने के बाद
पहले दूसरा बैडरूम देखा, फिर हमारे बैडरूम में जाने लगे।
तभी मेरे पति का मोबाइल किचन
में बजने लगा, उसको लेने के लिए वो नीचे चले गए.
‘बिज़नस डील होगी तो फोन पे कितना
टाइम लगेगा, उसका भरोसा नहीं, मैं दिखाती हूँ बैडरूम!’ मैंने पीछे से उसे कहा तो वो
पीछे देखने लगा और एक फुट के दूरी से आँखों से मेरा नाप लेने लगा.
इतनी देर पति साथ में थे तो उसने
मुझ पे जरा भी ध्यान नहीं दिया था।
‘चलेगा मेम साब…’ बोल कर उसने
मुझे दरवाजा खोलने के लिए जगह दी, मैं दरवाजा खोलने के लिए आगे गई तो मेरे हाथ को उसका
टच हुआ, वो टच गलती से हुआ या जानबूझ कर किया ये मुझे पता नहीं चला, मैं दरवाजा खोल
कर जल्दी से अंदर आ गई, वो मेरे पीछे अंदर आ गया, उसकी नजर अब भी मेरे नितम्बों पर
ही थी.
‘आपने बैडरूम तो बहुत अच्छे से
सजाया है मेमसाब!’ वो हमारे किंग साइज बेड की तरफ देखते हुए बोला.
तभी मेरी नजर बेड के करीब के
टेबल लैंप पे गई और मुझे शॉक ही लगा, आज सुबह सुबह लगभग एक घंटे पहले ही मैंने और मेरे
पति ने सेक्स किया था, सेक्स के दौरान प्रोटेक्शन के लिए कंडोम्स हम दो साल से इस्तमाल
कर रहे हैं.
‘ओ गॉड…’ सुबह सेक्स में इस्तमाल
किया हुआ कंडोम मेरे पति ने टेबल लैंप के बाजु में ही रखा था.
पेंटर लैंप के नजदीक खड़ा था और
मैं बेड के दूसरी तरफ खड़ी थी, मेरी टेंशन शायद उसको समझ आई थी, मेरी नजर कहाँ पे है
उसने देखा, तो उसकी नजर इस्तमाल किये हुए कंडोम पर गई, उस हरामी ने कंडोम को उंगली
से पकड़ के उठाया और हवा में लहराया, पेंटर कुछ बड़बड़ाया.
मुझे बस इतना ही सुनाई दिया-
कितना छोटा है!
‘क्या बोला तू? ला वो इधर!’ मैंने
हाथ आगे किया.
‘आपको इससे बड़ा मांगता है?’ उसने
मेरे हाथ में कंडोम रखते हुए बोला.
‘शट अप!’ मैंने गुस्से से उसे
बोला, तभी पैरों की आवाज सुनाई दी, मेरे पति ऊपर आ रहे थे, मैंने कंडोम अपने मुट्ठी
में छुपा लिया.
‘सच में मेमसाब!’ वो फिर भी बोला.
‘चुप रहो!’ मैंने गुस्से से कहा.
‘गिनना हो गया?’ मेरे पति ने
बैडरूम में आते हुए कहा.
‘पेंटर कहता है बहुत छोटा है!’
मैंने पेंटर पर बम गिरा दिया, उसके चेहरे का रंग ही उड़ गया।
‘मतलब?’ पेंटर ने डरते हुए पूछा.
‘अच्छा?’ पति ने कंफ्यूज होकर
पूछा- आमतौर पर पेंटर ‘काम बहुत बड़ा है’ बोलते हैं, ये कैसे ‘काम छोटा है’ बोल रहा
है?
‘हाँ, अभी मुझे बोला छोटा है,
तो पेंटिंग का खर्च भी कम आएगा.’ मैं उसकी टांग खींचते हुए बोली.
‘क्या मेम साब, बहुत बड़ा है आपका,
बहुत काम करना पड़ेगा!’ उसने मेरी चुची को देख के बोला, काम के बहाने वो मेरे स्तनों
के बारे में बोल रहा था.
वो नीचे चले गए, मैंने हाथ में
छुपाया हुआ कंडोम डस्ट बिन में फेंक दिया और नीचे चली आई.
सब घर गिन के काम की कीमत फिक्स
की, वह कल से काम चालू करने का बोल के घर चला गया, मेरे पति तैयार होकर कंपनी में चले
गए.
कचरा फेंकने के लिए मैंने डस्ट
बिन उठाई, मुझे उसमे कंडोम दिखा तब मुझे पेंटर की याद आई, मैंने कंडोम उठा कर हाथ में
लिया, जैसे उस पेंटर ने हवा में पकड़ा था, वैसे ही मैंने भी पकड़ा, मैंने कंडोम के साइज
का अंदाजा लिया, पेंटर ने साइज के बारे में जो बात कही थी वो मेरे पति के लिंग के लिए
थी, उसके हिसाब से उनका लिंग आकार में छोटा था, पर मुझे ऐसा नहीं लगा, मैंने कंडोम
के साइज का अंदाज लगाया, लगभग 5 इंच का था, मुझे मेरे पति ने कई बार सुख दिया था, पर
मुझे कभी भी उसके साइज में कोई कमी नहीं लगी।
मुझे उस पेंटर पे बहुत गुस्सा
आया और कैसे मैंने उसकी विकेट ली यह सोच कर मुझे बहुत हंसी भी आई, मेरे पति का लिंग
नार्मल साइज का था, फिर भी वो पेंटर ऐसा क्यों बोला, शायद उसका लिंग…
मैं सोच बदल कर काम मैं लग गई.
दूसरे दिन साहिल पेंटर दो और
पेंटर को लेकर आया, खाली किये हुए रूम मैं उन्हें काम पे लगा दिया, मैंने तीनों को
चाय दी.
थोड़ी देर में मेरे पति ऑफिस चले
गए, साहिल उन दोनों पेंटर के काम पे ध्यान दे रहा था.
मैं बैडरूम मैं जाने लगी तो वो
भी मेरे पीछे पीछे आ गया- मेमसाब मुझे ऊपर के रूम का नाप लेकर कलर मंगवाना है, कल नाप
नहीं लिया था ना!
वो मेरे पीछे पीछे चलते हुए बोला.
‘बाद में नाप ले लेना, मुझे अभी
नहाना है.’ मैं उसे बोल कर ऊपर जाने लगी.
‘कसम से क्या गांड है!’ साहिल
जान बूझ के ‘मुझे सुनाई दे’ इतनी ऊंची आवाज में बोला.
‘क्या बोला?’ मैंने आवाज ऊंची करके उसे पूछा.
‘मैंने कहाँ कुछ बोला?’ उसने
ऐसे कहा जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
मैंने उसे मना किया था आने के
लिए… फिर भी वो मेरे चूतड़ों पे नजर गड़ाये हुए मेरे पीछे पीछे बैडरूम तक आ गया.
‘शर्म नहीं आती क्या? मैंने मना
किया ना… जाओ नीचे!’ मैंने चिल्ला के उसे बोला.
पर वो बड़ा बेशर्म था- क्यों गुस्सा
होती हो मेमसाब, आप जाओ बाथरूम मैं, मैं बेडरूम मैं मेरा काम कर लेता हूँ!
‘पर मेरे कपड़े यहाँ बैडरूम मैं
हैं’ मैंने कहा.
‘क्या आप बिना कपड़ों के बाहर
आती हो क्या?’ उसने मुझसे कहा.
‘मैं तुमको क्यों बताऊ कि मैं
कहाँ क्या करती हूँ, ज्यादा होशियारी की तो में साहब से बोल दूंगी’ मैंने उसे कहा,
‘गुस्सा क्यों होती हो मेमसाब,
मैं बाहर रुकता हूँ.’ उसने मुझसे कहा.
‘बाहर नहीं, नीचे जाओ!’
मेरे कहते ही वो नीचे चला गया
और उसने कहा- तुझको मेरे नीचे लेता हूँ.
मैंने सुन लिया.
मैं दरवाजा लॉक करके बाथरूम में
गई, उसके शब्द याद आये और मैं उत्तेजित हो गई, फिर मुझे उसका डर लगने लगा.
मैंने नहा कर साड़ी पहनी और नीचे
आ गई.
दो तीन दिन काम बहुत तेजी से
होता रहा, साहिल आकर काम देख जाता था, पर मुझसे काम ही बात होती थी, मेरी डांट की वजह
से वो सीधा हो गया था, पर उसकी नजर अब भी मेरे बदन पर होती थी.
दो तीन दिन बाद उसके दोनों आदमी
नहीं आये, मैंने फ़ोन करके मेरे पति को यह बात बता दी.
मेरे पति ने साहिल को फ़ोन किया
तो उसने बताया- वो दोनों आज काम पे नहीं आएँगे.
लेकिन काम न रुकने का वादा भी
किया।
एक घंटे बाद साहिल आया, उसकी
नजर हमेशा की तरह मेरे स्तनों पर ही थी। ये मेरे लिए कुछ नया नहीं था.
‘मेमसाब आज लोग काम पर नहीं आएंगे!’
उसने कहा.
‘तो फिर काम कैसे पूरा होगा?’
मैंने उसे बीच में टोकते हुए पूछा.
‘आप बहुत टेंशन लेती हो मेमसाब,
मैं आपका काम रुकने नहीं दूंगा.’
नीचे के रूम की घिसाई हो गई थी, पर ऊपर के रूम का कुछ भी नहीं हुआ था.
नीचे के बैडरूम में साहिल गया
और काम शुरु कर दिया, मैं भी उसके पीछे पीछे गई, उसने कलर का डिब्बा खोला.
‘यह तो सफ़ेद कलर है!’ मैंने चौंकते
हुए कहा.
‘मेमसाब, यह कलर नहीं है, यह
प्राइमर है कलर से पहले लगाना पड़ता है.’ उसने इधर उधर देखते हुए कहा.
‘मेमसाब, वो कैरी बैग देना!’
मेरे पैरों में एक कैरी बैग पड़ी
थी, मैंने उसे वो उठा के दी, वो बेडरूम के दरवाजे के पास खड़ा था, बीच में एक सीढ़ी थी
और मैं बेड के पास खड़ी थी.
एकाएक वो अपने शर्ट के बटन खोलने
लगा, उसने अंदर बनियान नहीं पहनी थी, उसकी सांवली त्वचा चमक रही थी, उसका पूरा शरीर
कसरती था.
शर्ट उतारने के बाद वो शर्ट को
टांगने के लिए जगह ढूंढने लगा, हेंगर मेरे तरफ के दिवार पे था, वो मेरे एकदम पास में
आके खड़ा हुआ, अब हम दोनों बेड और सीढ़ी के बीच में खड़े थे, एक तो वो छह फुट लंबा और
तगड़ा था उस पर उसने शर्ट निकाली हुई थी और ऐसा आदमी मेरे पास खड़ा था तो मुझे अजीब फील
हो रहा था, क्या करूँ यह सोच कर मैं वहीं खड़ी रही क्योंकि बाहर जाने के लिए कोई रास्ता
नहीं था.
उसने पैंट की चैन खोली और झट
से पैंट उतार दी, तो मेरी नजर उसके अंडरवियर पे गई, उसने ग्रीन कलर की फ्रेंची पहनी
हुई थी और उसका वो वाला हिस्सा बहुत फूल गया था, अब मैं एक छोटी सी फ्रेंची पहने हुए
आदमी के बहुत पास खड़ी थी।
‘आपको यकीन नहीं होता ना साहब
की साइज छोटा है… मैं आपको यकीन दिलाता हूँ कि उससे काफी बड़ा भी होता है.’ वो अपनी
फ्रेंची के फूले हुए हिस्से पे हाथ घुमाते हुए बोला।
मेरी नजर फिर उसके उस वाले हिस्से
पे गई, यह बात उसने भी देख ली.
‘चलो मेमसाब आप को दिखा ही देता
हूँ!’ ऐसे कह कर उसने अपना हाथ फ्रेंची के अंदर डाला.
‘नहीं, कोई जरुरत नहीं, जाने
दो मुझे!’ मैं उसे मना कर रही थी पर ‘उसका लिंग कैसा होगा’ इसके बारे में सोच भी रही
थी.
‘अरे मैडम, आपको कुछ करने वाला
थोड़ी हूँ, आप देख लो असली लौड़ा कैसा होता है.’ वो अपने फ्रेंची के अंदर हाथ हिलाने
लगा.
‘ईई… कितना गन्दा बोलते हो, कोई
जरूरत नहीं!’ पर मैं उसके हिलते हुए हाथ की ओर देख रही थी.
‘मेमसाब लंड को लंड नहीं कहेगे
तो क्या कहेंगे?’ वो बेशर्मी से बोला.
मेरी नजर वहीं थी, यह देख कर
उसने अपना लिंग फ्रेंची से बाहर निकाल लिया.
‘ये क्या है?’ मेरा मुंह खुला का खुला ही रह गया, बहुत मोटा और काला लिंग था उसका, अभी नॉर्मल था फिर भी 5 इंच का था, पूरा खड़ा हो गया तो कितना मोटा होगा मैं सोचने लगी.
‘इसे कहते हैं लौड़ा, आपको कैसा
लगा मैडम?’ उसने बेशर्मी से पूछा और मेरा खुला मुंह देख के बोला- मेमसाब, आपको तो सदमा
लगा है!
‘नहीं वो… मतलब!’ मैं क्या बोल
रही थी मुझे ही पता नहीं था, मेरी नजर उसके लिंग से हटकर उसकी नजर से जा मिली.
‘देख के क्या होगा मेमसाब, इसको
हाथ में ले के देखो!’ उसने हंस के बोला.
‘नहीं प्लीज!’ मैं उसको रिक्वेस्ट
करने लगी.
‘अरे मेमसाब, आप पकड़ के तो देखो,
ऐसा लंड आपने थोड़े ही पहले पकड़ा होगा? और मैं थोड़े ही आपको कुछ करूँगा!’
मैंने ‘ना’ में सर हिलाया तो
वो जोर से हँसने लगा.
मैं बाहर जाने के लिए एक कदम
आगे बढ़ी लेकिन उसके आगे मैं नहीं जा सकी क्योंकि वो वहीं खड़ा था और उसने आगे आकर मेरा
रास्ता रोक लिया.
‘जाने दो मुझे!’
यह सुनते ही वो जोर से हँसा,
उसको भी पता चल गया कि मेरा विरोध कम हो गया है।
‘मेमसाब अपुन जबर्दस्ती नहीं
करेगा… वैसे अपुन जानता है लौड़ा लेने का मन आपका भी है.’ उसको मेरे मन की बात पता चल
गई थी.
‘डरो मत, किसी को कुछ पता नहीं
चलेगा!’
‘मैं नजर नीची करके अपने दोनों
हाथों से अपने साड़ी के पल्लू से खेल के टाइम निकाल रही थी, मेरी हिम्मत नहीं हो रही
थी, मेरे मन में युद्ध चल रहा था, ‘लिंग इतना बड़ा भी होता है, हाथ में लेने में क्या
जाता है.’
‘नहीं, लिंग देखा वो ही बड़ी बात
हो गई… अगर इसने जबर्दस्ती की तो?’
‘तो… तो मैं कुछ नहीं कर सकती,
कितनी मस्क्युलर बॉडी है इसकी…’
‘वैसे ही वो हाथ में लेने के
लिए ही जोर दे रहा है, उसकी ख्वाइश पूरी हो जायेगी, मैं भी यहाँ से चली जाऊँगी और इतना
बड़ा लिंग हाथ में लेने को मिलेगा.’
‘और किसी को पता चला तो?’
‘वो कह रहा है ना किसी को पता
नहीं चलेगा!’
‘कितना बड़ा लिंग है… बस हाथ में
लूँगी, बाकी कुछ नहीं!’
‘चलो मेमसाब जल्दी करो, अब तो ये लौड़ा भी रुकने को तैयार नहीं, देखो कैसे फूल गया है.’
मैंने लिंग पे नजर डाली वो अपने
विराट रूप में आ गया था, मैंने पल्लू से खेलना रोक दिया और हाथों को नीचे छोड़ दिया,
उसको मेरा इरादा पता चल गया और उसने मेरे हाथ की कलाई को पकड़ लिया, मैंने उसकी तरफ
देखा और तुरंत नजर चुरा ली.
‘अरे मेमसाब क्या शरमा रही हो!’
उसने मेरा हाथ छोड़ दिया और अपने हाथ से अपना लिंग हिलाया और फिर छोड़ दिया.
‘ले ले जल्दी से, शरमा मत!’ वो
अब आप से तू पे आ गया था, वो अब उतावला हो गया था.
‘मैंने हाथ आगे किया, मेरे कांपते
हुए हाथों ने उसका लिंग मुट्टी में पकड़ लिया और फिर मुट्टी टाइट कर ली. मुझे लगा कि
मैंने कोई गर्म लोहे का रॉड पकड़ा है… उसका लिंग इतना कड़क था और बहुत मोटा था, मेरे
हाथ में नहीं बैठ रहा था, लंबे लंड पर मेरा एक हाथ काम पड़ने लगा, तो मैंने दूसरे हाथ
की मदद ली, बायें हाथ से लिंग के जड़ को पकड़ा और दायें हाथ से आगे की ओर पकड़ कर मैं
दोनों हाथ से उसका लिंग हिलाने लगी.
मैं उसके सामने खड़ी होकर दोनों
हाथों से लिंग हिला रही थी इसलिए स्पीड बहुत कम थी.
मेरी तकलीफ उसके समझ में आ गई,
एकाएक उसने मेरा हाथ छुड़ा लिया और मेरी तरफ पीठ करके खड़ा हो गया, मेरे दोनों हाथ पकड़
के उसने मुझे अपने पीछे से खींचा और मेरा हाथ उसके लिंग पर रखा, मैं उसको पीछे से पूरी
चिपकी हुई थी, मेरे स्तन उसके पीठ में गड़ गए थे.
‘मत करो प्लीज…’ मैंने उसे कहा.
लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ.
‘बहुत बड़े मम्मे हैं तुम्हारे!’ मेरे स्तनों को अपनी पीठ पे फील करते हुए उसने कहा.
‘मत करो न… प्लीज!’ मैंने उसे
फिर से रिक्वेस्ट की और थोड़ी देर और उसके लिंग को मसला.
उसने मेरे दोनों हाथ छुड़ा लिए
और अपना एक पैर सीढ़ी पे रखा और मुझे बोला- नीचे से हाथ में लो!
मैंने बैलेंस बनाने के लिए एक
हाथ उसकी कमर पर रखा और अपना दायाँ हाथ उसके नीचे से सामने लेकर आई, पीछे से मुझे उसका
लिंग नहीं दिखाई दे रहा था, मैं अंदाजे से उसके लिंग को पकड़ने की कोशिश करने लगी, मेरे
हाथ में उनके अंडकोष आ गये, उसके अंडकोष बहुत बड़े थे, मैंने गलती से उनको जोर से दबाया
तो पेंटर जोर से चिल्लाया- आह… माँ कसम क्या चुदासी रांड है! उम्म्ह… अहह… हय… याह…
वो ख़ुशी से बोला.
‘नीचे बैठ के कर!’ उसने मुझे
हुक्म दिया.
मैं नीचे बैठ गई उसके नितम्ब
अब मेरे सामने आ गये, उसका लिंग हिलाने के समय मेरा होठों का घर्षण उसके अंडकोष और
नितम्ब के बीच की जगह में होने लगा, मैंने बैलेंस बनाने के लिए मेरा हाथ उसके नितम्बों
पे रखा तो गलती से मेरा हाथ उसके नितम्ब के छेद को लगा.
‘गांड मारना चाहती है क्या मेरी?’ वो फिर से अश्लील भाषा में बोलने लगा, लेकिन मुझे वो सुनने में मजा आने लगा था, इतने बड़े सांड को मैंने चिल्लाने पे मजबूर किया था, अब मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी, मैं अपनी उंगली उसके नितम्ब के होल में गोल गोल घुमाने लगी तो वो सिसकारियाँ भरने लगा था ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
उसने मेरा हाथ खींचा और मुझे
अपनी दोनों टांगों के बीच में से खींच कर अपने सामने लेकर आ गया, उसने उसका लिंग अपने
हाथ से पकड़ कर मेरे मुंह के सामने लेकर आया, मुझे उसका इरादा समझ में आ गया, मैंने
उसका लिंग हाथ से पकड़ कर अपने मुंह में डाला, मेरे जीभ के हमले से वो फिर से सिसकारियाँ
लेने लगा- क्या चूसती है साली… पक्की चुदासी रंडी है… तेरे पति से बड़ा है कि नहीं?
वो मुझे चिढ़ाने के लिए बोला,
मैंने उसे कुछ नहीं बोला और चूसना चालू रखा.
‘पति का चूसने से भी ज्यादा मजा
आ रहा है कि नहीं?’ उसने मेरे मुंह से लिंग बाहर निकाला.
क्या मस्त चूसती है तू, क्या
बोलती है तू इसको?’ वो अपना लिंग हिलाते हुए बोला.
‘लिंग!’ मैं शरमाते हुए बोली.
तो वो हंस पड़ा- लंड बोल इसको,
बोल! क्या चूसती है तू?’
‘लंड…’ मैं जैसे तैसे बोली, पर
मुझे बहुत उत्तेजक लगा.
‘हां, ऐसे ही बोलने का, लंड को
लंड बोलने में ही ज्यादा मजा आता है!’ ऐसे बोल कर वो मेरे मुख में धक्के देने लगा,
उसके विशाल लंड के धक्कों से मेरी सांस फूलने लगी, तो मैंने उसका लंड बाहर निकाल लिया,
तो वो अपने लंड को मेरे गाल पर मारने लगा.
अचानक उसने अपने मर्दाने हाथों
से मेरा दायाँ स्तन दबा दिया और बायें कंधे को पकड़ लिया.
‘नहीं बहुत हो गया!’ मैं उसके
हाथों को मेरे स्तनों से हटाने लगी, पर उसने मजबूती से मेरा स्तन पकड़ रखा था.
‘चल अब ज्यादा नाटक मत कर!’ कहते
हुए उसने मुझे खड़ा किया, मेरा पल्लू पकड़ के एक झटके में मेरी साड़ी को उतार दिया और
पेटीकोट का नाड़ा खींचा तो पेटीकोट मेरे पैरों में गिर गया.
‘क्या मक्ख़न बदन है साली का!’
वो मेरे पेट, जांघ जो जो भाग खुला था उस पर हाथ फेरने लगा.
उसका हाथ घूम कर मेरे ब्लाउज
पर आ गया और वो मेरे ब्लाउज के हुक्स को खोलने लगा, मैं मेरा हाथ उसकी छाती पर घुमाने
लग गई.
उसने जल्दी से हुक्स खोल कर ब्लाउज
को मेरे शरीर से अलग कर दिया, मैंने सफ़ेद ब्रा पहनी थी, उसने ब्रा के कप को नीचे करके
मेरा एक स्तन बाहर निकाल लिया.
‘माँ कसम… क्या मम्मे है साली
के!’ कह कर वो मेरे स्तन दबाने लगा.
‘ऐ गली मत दो न!’ मैंने उसे रिक्वेस्ट की तो वो हंस
कर बोला- मजा आता है… तुमको भी आ रहा है!
वो मेरे ब्रा के हुक्स खोलते हुए बोला, मैं उसका साथ दे रही थी.
उसने मेरी ब्रा उतार दी, अब मेरे
शरीर पर सिर्फ पेंटी बची थी, वो अब पागलों की तरह मेरे स्तनों को दबाने और मसलने लगा,
मैं बस आँख बंद करके मजा ले रही थी.
फिर उसने मुझे गले लगा लिया,
मेरे गोरे शरीर पर उसके विशाल सांवले शरीर को सटा लिया, अपने हाथों को मेरे नितम्बों
पर लाया, मेरी पेंटी को मेरे नितम्बों की दरार में घुसा दिया और मेरे नितम्बों को नंगा
कर दिया, वो अपने हाथों को धीरे धीरे मेरे नितम्ब पर गोल गोल घुमाने लगा और फिर जोर
से दबाने लगा, उसका मुँह मेरे गालों पे, गर्दन पे घूम रहा था, उसने अपना एक हाथ मेरे
नितम्ब से हटाया और मेरे सर के पास लाया, फिर एक गाल पर चार उंगलियाँ और एक गाल पे
अंगूठा रख कर मेरे सर को पकड़ कर मुझे जबर्दस्त किस करने लगा.
वो बहुत जंगली तरीके से सब कुछ
कर रहा था, मैंने बचावात्मक तरीका अपनाया और मजा लेने लग गई.
सब कुछ वो ही कर रहा था.
मेरी पेंटी के इलास्टिक को पकड़
कर उसने मेरी पेंटी जांघों तक नीचे की, फिर अपने पैर के अंगूठे में पकड़ कर नीचे की,
मैंने भी अपने पैर उठा कर उसकी मदद की.
मैं अब पूरी नंगी हो गई थी, मेरा
एक पैर पकड़ कर उसने सीढ़ी के दूसरे स्टेप पे रखा, उससे मेरे पैर फ़ैल गए. उसने भी अपने
पैर फैला लिए और अपने लंड को अपने हाथों से पकड़ कर मेरी योनि के पास ले आया.
मैं उसे मना करने लगी पर वो अब
सुनने के मूड में नहीं था- एक बार लेकर तो देखो, बार बार मांगोगी! वो बोला.
‘नहीं… प्लीज नहीं!’
मैं उसे मना करने लगी ‘नहीं…
प्लीज नहीं!’
मैं ऊपर ऊपर से ना कह रही थी.
वो अपना एक हाथ मेरे योनि पे
लाया, मेरी योनि ने बहुत पानी छोड़ दिया था, उसने उंगलियों से मेरी योनि को छेड़ा तो
मेरा पानी उसकी उंगलियों पर लग गया.
‘साली छिनाल, नौटंकी करती है,
चूत ने देख कितना पानी छोड़ा है!’ उसने अपनी उंगलियों को सूंघ लिया.
‘वाह क्या खुशबू है तेरी चूत
के रस की!’ फिर उसने अपनी उंगलियों को चाट लिया- रंडी साली, तेरी चूत का स्वाद भी बहुत
अच्छा है!
उसका गन्दा बोलना शुरू रखते हुए
उसने अपना लंड मेरे योनि तक लाया, मुझे एक हाथ से जोर से पकड़ा, फिर अपना लंड मेरी योनि
मुख पे रखा और मुझे कुछ समझ में आने से पहले एक जोर का धक्का दिया.
‘आह ! माँऽऽऽ’ मैं जोर से चिल्लाई
और अपने नाख़ून उसके कंधे में गड़ा दिए.
उसने मेरी तकलीफ पर जरा भी ध्यान नहीं दिया और फिर एक बार जोर से धक्का देकर अपना लंड जोर से मेरी योनि के और अंदर डाल दिया.
‘आऽऽऽह! हे भगवान! बहुत बड़ा है
तुम्हारा!’ मैं चिल्लाई.
‘बहुत टाइट चूत है तेरी, मजा
आ रहा है!’ वो धक्कों पे धक्के लगाते जा रहा था.
‘कुत्ते कितना बड़ा लंड है तेरा,
उम्म्ह… अहह… हय… याह… मेरी योनि फट गई.’
‘आऽऽह आऽऽह आऽऽह’ उसके हर धक्के
के साथ मैं सिसकारियाँ लेने लगी, मैं भी उसके रंग मैं रंगने लगी थी.
‘योनि नहीं चूत बोल!’ उसने स्पीड
से धक्के देना चालू रखा.
‘नालायक कितना बड़ा लंड है तेरा,
रुकने का नाम ही नहीं ले रहा, चूत फड़ेगा आज मेरी!’ मैं चुदाई के नशे में कुछ भी बोल
रही थी.
कुछ भी कहो ‘बड़ा लंड चूत में
लेने का मजा ही कुछ और है.’
उसका मजबूत शरीर, जंगली जैसा
मेरे शरीर से खेलना, गन्दी बातें करना और सबसे ज्यादा अपने विशाल लंड से जोरदार और
न रुकते हुए धक्के लगाना… इन सबसे आगे में कब तक टिकने वाली थी?
और मैं जोर से झड़ गई, मैं अब
ठीक से खड़ी भी नहीं रह सकती थी, मेरी पूरी ताकत खत्म हो गई थी, मैंने अपना पूरा शरीर
उसकी बांहों में छोड़ दिया.
‘बस रुको अब… मैं झड़ गई!’ मैं
उसको बोली.
लेकिन वो तो हरामी निकला, मुझे
बांहों में पकड़ के उसने मेरी चूत को फाड़ना चालू ही रखा, उल्टा उसका जोश और भी बढ़ गया,
मैं उसकी बांहों में दब गई थी और उसका मेरी बुर को पेलना चालू ही था, मैं अब चिल्लाने
लगी, झड़ने के बाद अब मुझे उसके धक्के सहन नहीं हो रहे थे- हरामखोर… झड़ गई हूँ फिर भी
मेरी चूत को कूट रहा है… निकाल बाहर… प्लीज, प्लीज ना!’ मैं उसे गाली भी दे रही थी
और रिक्वेस्ट भी कर रही थी.
मैं पूरी थक गई थी, मुझे आराम
चाहिये था, उसने उसका लौड़ा बाहर निकाला तो मुझे कुछ सुकून मिला, उसने मुझे मेरे दोनों
हाथों से सीढ़ी को पकड़ने के लिए बोला.
‘क्या कर रहा है ये? मुझे सीढ़ी
क्यों पकड़ने के लिए बोल रहा है?’ मैं मन ही मन सोच रही थी, और उसके कहे जैसे सीढ़ी पकड़
ली.
मेरे पीछे खड़ा रहकर उसने भी मेरे
जैसे ही सीढ़ी पकड़ ली, उसका लंड मेरी गांड को चुभ रहा था, उसने एक हाथ से मेरा एक पैर
पकड़ के हवा में उठा लिया, और पीछे से अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया.
‘ओह गॉड! तो उसको पीछे से चोदना
था इसलिए मुझे ऐसा खड़ा किया है!’
उसने पीछे से एक जोर का धक्का
दिया, वैसे मैं दर्द से चिल्ला उठी- आऽऽऽह…
मैं अपना पूरा मुँह खोल कर चिल्लाई पर उस पर कोई असर नहीं हुआ.
‘ऐसा चोदता है क्या तेरा पति?’
उसने मुझसे पूछा.
‘हरामखोर छोड़ मुझे!’ मैं दर्द
से बोली.
‘अब गालियाँ दे… मजा आता है तेरे
मुँह से गालियाँ सुनने में!’ ऐसा कहकर वो मेरी कमर पकड़कर जोरदार धक्के लगाने लगा और
मेरी गांड पे चपत लगाने लगा. एक हाथ से वो मेरे स्तन दबा रहा था, दूसरे हाथ से मेरी
गांड पे चपत लगा रहा था और अपने विशाल लंड से मेरी चूत को कूट रहा था, ऐसे तीनों तरफ
से चढ़ाई कर रहा था.
‘भोसडी के जल्दी कर…’ मैंने अपने
पति से सुनी हुई गाली उसको दी.
‘अच्छी गाली देती हो, पति ने
सिखाई क्या?’
गाली के साथ मुझे मेरा पति भी
याद आ गया और उसका खाने का टाइम भी याद आ गया, मैंने घबरा कर दीवार पर देखा पर वहाँ
पर घड़ी ही नहीं थी, पेंट करने के लिए उतार कर रखी थी.
‘मेरे पति का घर आने का टाइम
हो गया है!’ मैंने घबराते हुए उससे कहा.
उसने झट से अपना लंड मेरी चूत
से निकाला और मुझे हाथ से हिलाने के लिए बोला, उसने नीचे से मेरी पेंटी उठाई और अपना
सारा वीर्य मेरी पेंटी पे गिरा दिया, उसके लंड से वीर्य की पिचकारी निकल रही थी और
मेरी पेंटी पर गिर रही थी.
उसने फिर अपना शर्ट हैंगर से
लिया और मोबाइल निकाल के टाइम देखा- अभी तो 12:30 ही बजे हैं, तेरे पति के आने में
अभी एक घंटा बाकी है.
‘हाँ… पर मुझे खाना तो बनाना
है ना, हटो अब मुझे खाना बनाने दो!’ मैं उसे बाजु करने लगी तो उसने मुझे अपने पास खींचा
और एक किस किया- मजा आया ना?
मुझसे पूछा.
मैंने हाँ में सर हिलाया तो वो
मुझे और एक किस करके बाजु हट गया.
मैंने अपने सारे कपड़े ढूंढे,
पेंटी मिली पर वो पेंटर के सफ़ेद रंग से रंगी हुई थी, पर ब्रा नहीं मिल रही थी. मैंने
बाकी के कपड़े पहन लिए पर ब्रा मिल नहीं रही थी, मैं परेशान हो गई.
पेंटर ने अपने कपड़े पहन कर काम
करना शुरू कर दिया था, उसने प्राइमर का डिब्बा उठाया तो मेरी ब्रा उस डिब्बे में मिली,
उसने ब्रा बाहर निकली, पेंटी पे उसने खुद रंग डाला था, और मेरी ब्रा निकाल कर उसने
डिब्बे में डाली थी, इस तरह से उसने मेरे दोनों अंडर गारमेंट्स को रंग दिया था.
मैंने ब्रा को कचरे में फेंक
दिया और पेंटी को धो दिया.
फिर नहा कर फ्रेश हो गई, गाऊन
पहना और नीचे आकर खाना बनाया.
पेंटर नीचे के रूम को रंग रहा था, थोड़ी देर में मेरे पति आ गये, बाकी सब जगह सामान पड़ा था तो हम किचन में ही खाना खाने वाले थे, मैं किचन काउंटर पे खड़ी थी, मेरे पति ने पीछे से आकर मुझे गले लगा लिया, आज वो बहुत मूड में दिख रहे थे, पर उसको क्या पता था एक घंटे पहले ही मैं जम कर चुदी थी.
‘क्या कर रहे हो, पेंटर घर में
है!’ मैंने पेंटर के डर से मेरे पति को दूर धकेल दिया.
‘आज तुम्हारी स्मेल कुछ अलग ही
आ रही है!’ मैं डर गई पर चेहरे पर कुछ नहीं दिखाया.
‘घर में पेंट चालू है, तो बीवी
से फूलों जैसी स्मेल थोड़ी आएगी!’ मैंने उससे कहा.
‘उसने मुझे पीछे से जोर से पकड़
लिया और मेरे कान में बोला- बहुत बड़ा आर्डर मिला है, मुझे दिल्ली जाना पड़ेगा.
‘अरे वाह…’ मैंने कहा.
‘जाने से पहले मेरा मुँह मीठा
कर दो!’ उनका मुँह मीठा करना मतलब सेक्स करना!
‘हे भगवान… अभी एक घंटे पहले
मुझे पेंटर ने जमकर चोदा था, इतनी जल्दी मैं कैसे सेक्स करने वाली थी, मेरा तो जान
ही जानी बाकी रह गई थी, पर ना बोला तो उनको शक होगा!’ मैंने मन ही मन सोचा.
‘क्या हुआ मेरी जान… इतना क्या
सोच रही हो?’ उसने मुझे पूछा.
‘कुछ नहीं, अभी घर में पेंटर
है, काम चालू है, कैसे करेंगे?’ मैंने पूछा.
‘अरे हम किचन में ही करेंगे क्या,
ऊपर जाते हैं ना बैडरूम में!’ पति ने बोला.
‘पर उसे कुछ चीज़ की जरुरत पड़ी
तो?’ मैंने पूछा.
‘एक बार काम शुरू किया तो उनको
कुछ नहीं लगता!’ ऐसा कह कर हम खाने से पहले सेक्स करने का प्लान बना कर ऊपर जाने लगे,
मेरे पति पहले चले गए.
मैं पेंटर के कमरे में गई और
उसे बोला कि कुछ जरूरत हो तो आवाज देना, हम ऊपर हैं.
‘चुदाई करने जा रहे हो क्या?’
मैंने ‘हाँ’ में सर हिलाया और
हंस कर वहाँ से ऊपर जाने लगी, ऊपर जाके मैंने दरवाजा बंद किया.
मैंने दरवाजा बंद किया.
मेरे पति ने झट से मेरा गाउन
निकाल लिया, मेरी पेंटी को निकाल दिया और खुद अपने सारे कपड़े उतार कर, अपना लंड मेरे
मुँह के पास लाया, मुझे उनका गोरा लंड अब छोटा और पतला लगने लगा, मेरा मन अब पति और
पेंटर के लंड की तुलना करने लगा था, मेरे पति का गोरा पतला और छोटा था तो पेंटर का
काला लंबा और मोटा था.
‘क्या देख रही हो लंड की तरफ?’
पति ने पूछा.
कुछ जवाब देने के बजाय मैं उसका लंड चूसने और चाटने लगी, उसको शक ना हो इसलिए दुगने जोश में उसका लंड चूसने लगी.
‘हाऽऽई सोनम कपूर डार्लिंग, आज
क्या कमाल चूस रही हो तुम!’ पति खुश होकर बोला.
बैडरूम के की-होल से पेंटर हमें
देख रहा था और हमारी बातें सुन रहा था.
‘धीरे से चूसो, नहीं तो मेरा
हो जायेगा.’
मुझे भी यही चाहिए था पर मैं
रुक गई, उनके लंड पर कंडोम चढ़ाया और खुद पीठ के बल लेट गई- जल्दी डालो!
मैंने जानबूझ कर ‘मुझे जल्दी
है’ ऐसा दिखाया.
उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल
दिया.
‘आज तो एकदम से चला गया लंड चूत
में?’ उसने आश्चर्य से कहा.
मैंने मन में बोला ‘जायेगा नहीं
तो क्या… कितना बड़ा लंड लिया है मेरी चूत ने!’
उसके धक्कों से मेरी चूत का दर्द
और बढ़ने लगा पर सहन करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था.
‘जोर से करो ना जानू!’ मैंने
उसे प्यार से कहा तो वो मुझे जोर से धक्के देने लगा, पर वो धक्के भी पेंटर के धक्के
के सामने कुछ भी नहीं थे.
कुछ देर के बाद वो थक कर पीठ
के बल लेट गया और मुझे ऊपर बुला लिया, उसको शक ना हो इसलिए मैं उस पर सवारी करने लगी,
मुझे दर्द हो रहा था फिर भी जोर से ऊपर नीचे हो रही थी, मेरी स्पीड के वजह से उसने
अपना वीर्य मेरे अंदर, कंडोम में उड़ेल दिया.
‘क्यों इतनी जल्दी झड़ गए, मेरा
अभी बाकी था!’ मैं उसे दोष देते हुए उसके ऊपर से नीचे उतरी, उसने लंड से कंडोम निकाल
कर टेबल लैंप के टेबल पर रखा.
‘दो घंटे बाद की फ्लाईट है, खाना
खाते हैं.’
मैंने उठा कर गाउन पहना, दरवाजे
पर कुछ हलचल दिखी, शायद पेंटर नीचे चला गया था.
खाना खाते वक्त मैं बोली- घर
का कलर का काम चल रहा है, आप भी जा रहे हो, काम कैसे होगा?
‘खाना खाने के बाद पेंटर से बात
करता हूँ!’ पति ने मुझसे कहा.
खाना खाने के बाद पति ने पेंटर
को बोला- साहिल काम जल्दी खत्म करो!
‘हाँ साहब, लेकिन क्या करें,
आदमी लोगों का प्रॉब्लम है, देखता हूँ नहीं तो नाईट शिफ्ट में भी काम करता हूँ.’
‘हाँ चलेगा, दो तीन नाईट शिफ्ट
में हो जायेगा क्या?’
‘देखते हैं लेकिन पूरा जोर लगा
दूंगा सहाब, नाईट शिफ्ट में कोई डिस्टर्ब करने वाला भी नहीं रहता न!’ वो डबल मीनिंग
बोल रहा था.
दो घंटे बाद पति एयरपोर्ट चले गए, पेंटर जल्दी जल्दी हाथ चला रहा था, उसको नाईट शिफ्ट करने में काफी इंटरेस्ट था.
लगभग 8 बजे वो चला गया और दस
बजे फिर से आ गया, मैंने मेन डोर लॉक किया, वो तो तैयारी में ही आया था, उसने मेरी
गांड पर चपत लगाई.
‘अब कुछ नहीं हाँ… चुपचाप अपना
काम करो!’ मैंने उसे ना बोलने का प्रयास किया.
‘हाँ काम ही करना है!’
मैं गाउन मैं थी, पति से सेक्स
के बाद मैंने सिर्फ गाउन पहना था, अंदर कुछ भी नहीं पहना था.
उसने हॉल में ही गाउन निकाल कर
फेंक दिया और मुझे पूरी नंगी कर दिया, उसने मुझे धक्का देकर सोफे पर गिरा दिया और मेरे
पैर फैला कर मेरी बुर को चाटने लगा, उसके लपालप चूसने के वजह से मेरी बुर ने पानी छोड़
दिया- उई माँआआ आआ… स्सस्स…
‘देखा कितनी चुदासी है तू… आज
तेरी चुदास मिटाता हूँ!’ ऐसा कह कर उसने जीभ का हमला मेरे चूत पर जारी रखा, मेरी चूत
का कोना कोना वो चाट रहा था.
मैं उसके बालों में हाथ डाल कर
उसका सिर अपनी चूत पे दबा रही थी और ख़ुशी मेरे सिर को इधर उधर घुमा रही थी.
‘ऊपर बैडरूम में चल!’ मुझे उठाते
हुए वो बोला, मैं भी उसके पीछे चल पड़ी.
उसका तगड़ा शरीर, उसका सेक्स करने
का जोश देख कर मैं उसका गुलाम हो गई थी, उसके लंड की, उसके गंदे बोलने की मुझे लत लग
गई थी.
बैडरूम में जाकर उसने अपने सारे
कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा हो गया, मुझे घोड़ी बना कर पीछे से मेरी चूत चाटने लगा.
‘ इऽऽऽऽय… ये क्या कर रहे हो…’
जिंदगी में पहली बार किसी ने मेरी चूत को पीछे से चाटा था, पर वो रुकने वाला नहीं था,
मेरी बुर चाटने के बाद उसने मेरी गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया.
‘इऽऽऽऽ गंदा… उधर क्या कर रहे?’
मैंने उसे रोकते हुए कहा.
‘लगता है तेरी गांड भी बहुत चुदासी
है, जरा जबान लगाने से साली को करंट लगता है!’ मेरी गांड चाटने के बाद उसने मुझे बेड
पर बिठाया और खुद बेड पर खड़ा हो गया, मैंने उसका लंड हाथ में पकड़ लिया, थोड़ी देर हिलाने
के बाद चूसने लगी.
‘माँ कसम क्या चूसती है!’
वो मेरे मुँह में धक्के देने
लगा, थोड़ी देर मैंने मेरे मुँह से लंड को बांहर निकाल लिया.
‘यहाँ पे डालो!’ मैं बुर की तरफ
हाथ दिखा कर बोली.
‘मतलब?’ उसने जानबूझ कर पूछा.
‘मतलब चूत में डाल भोंसड़ी के
!’ मैं उसे बोली.
‘और अंदर डाल कर क्या करूँ?’ वो मुझे परेशान कर रहा था.
मुझे भी चुदाई का खुमार छा गया
था, मैंने उसे उसके अंदाज से जवाब देने के बारे में सोचा- अरे तेरा मूसल जैसा लंड मेरी
चूत में डाल और चोद मुझे!
वो सुन कर खुश हुआ- अब आ गई न
औकात पर रंडी साली, गन्दी बातें करने में ही मजा आता है.
वो मुझे चुदाई ज्ञान सिखाने लगा,
उसने मुझे पीठ पे लेटाया, अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया और पूरी ताकत से अंदर डाला.
‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… हरामखोर…
फड़ेगा क्या मेरी चूत!’ उसने दोपहर के जैसे मेरी तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और जोरदार
धक्के देना चालू कर दिया, उसके बलवान शरीर के नीचे मैं पिस गई थी, पर उसके विशाल लंड
की जोरदार चुदाई से मैं सातवें आसमान में पहुंच गई थी.
उसने मुझे उठाया और खुद पीठ के
बल लेट गया, मैं उसके ऊपर चढ़ गई.
‘ऐसे ही चुद रही थी न अपने पति
से? अब मैं दिखाता हूँ इस पोजीशन में कैसे चुदाई करते हैं.’
मैंने ऊपर नीचे होना शुरू किया,
वो नया कुछ भी नहीं कर रहा था, फिर मैंने उसके छाती पे हाथ रखकर स्पीड बढ़ाई और उसने
मेरे स्तनों को कस से पकड़ा और नीचे से धक्के देना शुरू कर दिया.
‘तू स्पीड कम मत कर!’ मुझे बोल
कर उसने नीचे से जोरदार धक्के देने शुरू कर दिए.
मैं ऊपर होती थी तब मेरे पति
ने कभी भी नीचे से धक्के नहीं दिए थे, यह नई बात मुझे साहिल पेंटर से पता चली, मुझे
इस आसन में अजीब सा मजा मिल रहा था, मेरा ऊपर नीचे होना और उसका नीचे से जोरदार धक्कों
की वजह से मैं जोरदार तरीके से झड़ गई.
वो अब एक सी स्पीड में धीरे धीरे
से मुझे नीचे से चोद रहा था, मुझे अब उसके धक्के सहन नहीं हो रहे थे, मुझे ऐसा लगा
कि वो भी झड़ने वाला है- अरे, तुमने कंडोम नहीं पहना?
‘मुझे अच्छा नहीं लगता!’
‘पर कुछ हो गया तो?’
‘अपुन फुल कण्ट्रोल में है, दोपहर
को भी बाहर ही माल गिराया था.’
‘पर मुझे अंदर लेने में मजा आएगा,
ऐसे करो अंदर ही पिचकारी मार दो!’
‘पर कुछ हुआ तो?’
‘कुछ नहीं होगा, मैं गोली खा
लूँगी.’
उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो मैंने
उसे रोका और नीचे पीठ के बल लेट गई, वो अपने जंगली तरीके से मुझको चोदने लगा और मेरी
चूत के अंदर ही पिचकारी मार दी, उसके साथ ही मैं भी फिर से झड़ गई.
वो पूरी रात मुझे नये नये आसनों
में मुझे चोदता रहा.
उसके बाद के दो दिन और दो रातें
वो मुझे हर तरह से यूज़ करता रहा, मैंने भी उसका पूरा साथ दिया.
‘दीवारों के कलर शेड से ज्यादा
शेड सेक्स में होते हैं!’ यह बात मुझे साहिल पेंटर से पता चली.
बारिश में भीगने के बाद मेरे
स्कूल के सिक्योरिटी गार्ड में मेरी कामुकता की आग पर अपने प्यार की जो बारिश की… मैं
धन्य हो गई…
मैंने अपना चश्मा निकाल के नीचे
टेबल पर रखा और आँख मलने लगी। टाइम देखा तो शाम के 6:30 हो गए थे। काम करते वक़्त टाइम
का ध्यान ही नहीं रहा। मेरा नाम सोनम कपूर है और मैं एक टीचर हूँ। मैं जिस स्कूल मैं
पढ़ाती हूँ, उसके टीचर्स रूम में अकेली बैठी थी, स्कूल भी दोपहर को छूट गया था और दूसरे
टीचर्स और स्टाफ भी चला गया था।
मैं स्कूल की परीक्षा के पेपर
तैयार कर रही थी, मैं पढ़ाती हूँ उस विषय के और दूसरे टीचर्स के दो और विषय के!
मेरी बारहवीं के बाद मैंने अपने
मनपसंद कोर्स डी.एड. का कोर्स किया और फिर घर वालों की मर्जी से एक किसान के पढ़े-लिखे
लड़के के साथ शादी करके मुम्बई से गांव में आ गई।
शादी के एक महीने बाद ही मेरे
पति पढ़ने के लिए अमेरिका चले गए। उन एक महीने में भी हमने सेक्स का आनंद सिर्फ 15 दिन
ही उठाया, बाकी के दिन पैकिंग और तैयारी में ही निकल गए। उस 15 दिनों मैं मेरी सेक्स
की भूख बहुत बढ़ गई थी पर समाज के बंधनों की वजह से मैंने अपने आप पर काबू रखा था। दिन
भर स्कूल के कामों में अपने आपको व्यस्त रखा था और रात को हाथ की उंगलियां तो थी ही।

































































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