मौनी राय, श्वेता तिवारी, पलक तिवारी, शिल्पा शेट्टी भाभी की चुदाई

मौनी राय, श्वेता तिवारी, पलक तिवारी की चुदाई


 मेरा नाम साहिल है और मैं मुंबई का रहने वाला हूँ | मेरा कद 5 फुट और 6 इंच है और रंग गोरा है | मेरी बॉडी फिट है और मैं एक औसत हाइट वाला लेकिन स्मार्ट लड़का हूँ | मेरी उम्र २१ साल है |
मेरी एक गर्लफ्रेंड थी जिसका नाम मौनी राय है और वो मेरे कॉलेज में ही पढ़ती थी | मैं उसे बहुत प्यार करता था और वो भी बहुत करती थी लेकिन जब हमारा कॉलेज समाप्त हुआ तो वो कहने लगी की घर पर बात नही हो पाएगी और ये कह के उसने मुझे छोड़ दिया | मैंने बहुत कोशिश की की वो मुझे नही छोड़े लेकिन उसने मुझे हर जगह ब्लाक कर दिया और मुझे छोड़ दिया | मैं उसको बहुत मिस करता था और रोता भी था कई बार लेकिन उसको कोई फर्क नही पड़ा | खैर, ये थी ३ महीने पहले की बात | अभी कुछ दिन पहले अचानक से मेरे पास एक नंबर से 5 मिस्ड कॉल आयीं | जब मैंने कालबैक किआ तो पता चला ये मौनी राय का नंबर था | वो मेरे पास वापस आना चाह रही थी | मैंने बोला की मैं बाद में बात करता हूँ | फिर मैंने सोचा की अगर मैं उसके पास वापस गया तो कहीं फिर से मुझे छोड़ कर न चली जाये | एक बार इतना रोने के बाद दोबारा रोने की हिम्मत नही थी मुझमे | सो मैंने सोचा की क्यूँ न इस बात का फायदा उठाया जाये | मैंने उसको काल किया और बोला की मैं एक ही शर्त पर तुम्हारे पास वापस आऊंगा और वो शर्त ये है की तुम मेरे साथ एक रात गुजारो | वो रोने लगी और बोली की नही, ये नही हो सकता | मैंने बोला कोई बात नही | ये कह के मैंने काल एंड कर दी | कुछ दिन बाद उसकी फिर से कॉल आई और वो बोली की पक्का न ऐसा करने के बाद तुम मेरे हो जाओगे | मैंने कहा हाँ | फिर हमने प्लान बनाया की हम किस तारीख में मिलेंगे |
प्लान के मुताबिक मैंने उसको पिक किया और मेरे दोस्त के फ्लैट पर ले गया | वहां कोई और नही रहता और पुरे फ्लैट में बस मैं और मेरी गर्लफ्रेंड मौनी राय थी | फ्लैट में घुसने के बाद मैंने दरवाजा बंद कर दिया | फिर हम दोनों बैठे और बातें करने लगे | धीरे धीरे मेरा हाथ उसके हाथों पर गया और हम दोनों करीब आ गये | फिर हमने किस करना शुरू किआ धीरे धीरे मेरे हाथ उसके दूध पर जाने लगे | मैंने उसके दूध दबाना शुरू कर दिया | वो भी आह आह उह आह करना शुरू कर दिया | मैंने अब उसकी गर्दन पर किस करना शुरुर कर दिया | वो भी अब गर्म होने लगी थी | मैंने अब उसका टॉप उतार दिया और बसकी ब्रा के ऊपर से उसके दूध दबा रहा था | क्या मस्त दूध थे उसके.. बड़े बड़े.. मस्त | मुझसे रहा नही गया और मैं ब्रा के ऊपर से ही चूसने लगा | वो भी आह उह्ह उ हह आह्ह करने लगी | फिर मैंने उसकी ब्रा उतारी | वाह.. क्या लाजवाब दूध थे उसके.. बड़े बड़े.. गुलाबी निप्पल.. एक दम सॉफ्ट.. | मैंने प्यार से उसके निप्पल को अपने होठों से लगाया | वो उछल पड़ी.. बोली आराम से करो.. तुम्हारी ही हूँ आज मैं | मैंने कहा ठीक है डार्लिंग | फिर मैंने उसको लिटाया और अपनी टीशर्ट भी उतर दी | फिर मैंने उसके ऊपर आ गया और उसके निप्पल पर किस करने लगा | वो भी पूरा एन्जॉय कर रही थी | उसके पिंक निप्पल को लग रहा था कभी उसने खुद भी नही मसला होगा | दोस्तों बता नही सकता की क्या नजारा था वो.. एकदम गोर दूध.. बड़े बड़े.. बहुत ही प्यारे.. | मैं उन्हें चुस्त जा रहा था और वो मस्ती में ऊह्ह उ उह्ह उह्ह उआ अ अ अ आआ अ अ आःह ह ह ह हाहा आहा हाहा अहह कर रही थी | फिर मैंने उसको पीछे पलट दिया और उसकी पीठ को चूमने लगा | वो भी मदमस्त हो गयी और उह आहा आह आ आ अहह करने लगी | धीरे धीरे मैंने उसकी पैंट उतार दी और उसके चूतडों को पेंटी के ऊपर से दबाने लगा | क्या मस्त चुतड थे उसके | एकदम गोरे गोरे | मुझे कंट्रोल नही हुआ और मैंने उसकी पेंटी भी निकल दी | उसके चूतडों को दबाते हुए मैंने उसे वापस पलट दिया और इस तरह मुझे उसकी चूत के दर्शन हुए | एक दम लाजवाब चूत थी उसकी.. गुलाब की पंखुड़ियों जैसी.. गुलाबी सी.. चिकनी.. बाल का एक भी रेशा नही था.. देख कर ही मजा आ आ गया मुझे | एक बहुत प्यारी सी खुशबु आ रही थी उसकी चूत से.. मन कर रहा था की देखता ही रहूँ | मैं ऊपर आ गया और फिर से उसे किस करने लगा | वो भी पूरी गर्म हो चुकी थी अब तक | किस करते करते धीरे धीरे मैं वापस नीच एजाने लगा और इस बार बिना देर किये मैंने अपनी जीभ उसकी चूत से लगा दी | वो चिहुंक उठी | बोली बाबू आराम से | मैंने बोला ठीक है | फिर मैंने अपनी जीभ उसकी प्यारी सी चूत में घुसा दी | पहले मुझे डाउट था लेकिन अब कन्फर्म हो गया था की उसकी चूत की चुदाई कभी नही हुई थी | मैं उसकी चूत चाट रहा था और वो मस्ती में ऊउह उ हह ऊउह आह आ अ आह्ह्ह्ह आहा उह्ह.. आ ह आह.. आह्ह्ह. उह्ह.. कर रही थी | मुझे भी मजा आ रहा था | मस्त स्वाद था उस्की चूत का | थोड़ी देर बाद वो बोली की मैं झड़ने वाली हूँ | मैंने बोला की ठीक है मेरे मुंह में ही दे दो अपना माल | उसने अपना माल मेरे मुंह में दे दिया | मुझे भी अच्छा लगा उसके माल का स्वाद |

 अब बारी उसकी थी | मैंने अपने सरे कपड़े निकल दिए और लेट गया | अब वो धीरे धीरे मेरे ऊपर आने लगी और मेरे सीने पर किस करने लगी | मुझे अच्छा लग रहा था | उसकी गर्म गर्म सासें मेरे सीने में लग रही थीं | अब वो धीरे धीरे अंडरवियर के ऊपर से मेरा लंड सहलाने लगी और मेरे शारीर पर किस करने लगी | जैसे ही सुके कोमल हाथों का स्पर्श मेरे लंड पर लगा, वो तुरंत खड़ा हो गया | वो बोली “इसको क्या हो गया अचानक से “ | मैंने कहा “तुम्हारा हाथ है ही इतना सॉफ्ट की उसका टच मिलते ही मेरा खड़ा हो गया” | वो बोली “अच्छा, देखती हूँ” | मैंने कहा “ ठीक है, अंडरवियर निकल कर देख लो” | वो बोली “ठीक है” | अब वो धीरे धीरे नीचे जाने लगी और उसने मेरा अंडरवियर निकाल दिया | जैसे ही उसने मेरा लंड देखा, वो चौंक गयी | वो बोली “इतना बड़ा” | मैंने कहा “हाँ, क्यूँ पसंद नही आया क्या?” | वो बोली “ऐसा नही है | मुझे तो ये बहुत पसंद है” | मैंने कहा “फिर देर क्यूँ कर रही हो? जल्दी से इसे हाथ में लो और चूसने स्टार्ट कर दो“ | वो बोली “ठीक है” | फिर उसने मेरा लंड हाथ में लिया और सहलाने लगी | मुझे एक अजीब सा एहसास हो रहा था | थोड़ी गुदगुदी भी लग रही थी लेकिन साथ ही मजा भी आ रहा था | मैंने कहा “बेबी अब देर मत करो और जल्दी से इसको मुंह में ले लो” | वो बोली “हाँ बेबी, बस लेने ही जा रही” | फिर वो अपना मुंह मेरे लंड के पास ले गयी और अपनी जीभ मेरे लंड पर लगाने लगी | मुझे एक अजीब से ख़ुशी हुई उस वक़्त | असल में ज़िन्दगी में पहली बार मेरा लंड किसी लड़की ने मुंह में लिया था | मुझे बहुत अच्छा लगा | फिर वो मेरे लंड को चूसने लगी | मुझे बहुत अच्छा लग रहा था | मैं “उम्म्म बेबी पूरा लो, गुड बेबी.. मजा आ रहा है.. पूरा लो.. “ कहने लगा | वो पहले तो नार्मल चूस रही थी लेकिन थोड़ी देर बाद किसी एक्सपर्ट की तरह पूरा लंड मुंह में लेने लगी और लोलीपोप की तरह चूसने लगी | दोस्तों, मैं बस बता नही सकता की क्या आनंद था उस वक़्त | एक दम लग रहा था की जैसे जन्नत में हूँ मैं | इसी तरह वो मजे से मेरा लंड चुसे जा रही थी और मई चुसवाए जा रहा था | मैंने कहा “बेबी, ये बताओ की माल तुम्हारे मुंह में दूं या बाहर निकल दूं?” | वो बोली “बेबी, मुझे आपका माल पीना है | पिला दो मुझे और तृप्त कर दो” | मैंने कहा “लो बेबी, मेरा निकलने वाला है | लो पि जाओ सारा | एक बूँद भी मत छोड़ना” | ऐसा कहते कहते मैंने उसके मुंह में ही आह्ह्हा हा अहह कहते कहते अपना माल निकल दिया | वो भी पुरे मन से मेरा माल पीने लगी | मुझे बहुत मजा आया |
हम दोनों एक दुसरे से लिपटे लेते थे | थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद फिर हमने फिर से किस करना शुरू किआ | मैं उसके लिप्स पर जोर से किस किये जा रहा था और वो भी मेरा साथ दे रही थी | फिर मैंने धीरे धीरे कहा “ बेबी, अब वो करे जो हम करने आये थे?” | वो बोली “ओके बाबु” | मैं उसके स्तनों को किस करते हुए नीचे उसकी चूत में ऊँगली करने लगा | वो आःह्ह.. उह्ह.. अ आ आह आह आ आया आहा आहा अह्ह्ह आहा हा आ हा हा अह हा हा हा हा अह हा अह अह हाहाह हहहह्हा आहा हा अआः अआहा.. करने लगी | मुझे उसका ऐसे चिल्लाना अच्छा लग रहा था और मुझे और उत्तेजित कर रहा था | मैंने अब एक की बजाय दो उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दी | वो एकदम से उछल पड़ी | बोली “बाबु आराम से करो जो भी करना है | आज तुम्हारी ही हूँ, तुम्हारे पास ही हूँ | जो भी करना है करो लेकिन आराम से” | मैंने भी बोला “ओके बेबी” | फिर मैं उसकी चूत में ऊँगली अन्दर बाहर करने लगा | वो सिसकियाँ ले रही थी और बड़े मजे से आह.. आआअ.. ऊ. ऊ उआ आया अ अ आहा आहा आहा आहा हा ह अह अह अह अह अह अह अह अह अह्आआआ आअहह्हहह अहः उई आः आःह्ह्ह करने लगी | उसकी सिसकियाँ सुन के मुझे जोश आ गया | अब मैंने फैसला किआ अब मैं उसे तुरंत चोद कर ही दम लूँगा |
मैंने अब उसके पैर फैलाये और अपना बड़ा सा लंड उसकी चूत से रगड़ने लगा | उसकी चिकनी गुलाबी चूत देख कर मेरा लंड एक दम सीधा खड़ा हो गया और उसकी चूत को सलामी देने लगा | मैंने उसकी टांगों को पकड़ा और अपना लंड धीरे से घुसाने लगा | मेरी गर्लफ्रेंड मौनी राय उईईईईईईईईईईईई करके चिल्ला पड़ी एकदम से | मैंने लंड निकाला नही फिर भी | मैंने थोडा इंतजार करने के बाद फिर लंड को उसकी चूत में घुसाने का प्रयास किआ | वो रो पड़ी | मैंने देखा की उसकी बड़ी बड़ी आँखें सच में छलछला पड़ी | मैंने उस पर तरस कहा कर अपना लंड वापस निकला तो देखा की उसकी सील टूट चुकी थी और मेरे लंड पर उसकी चूत का खून लगा था | अब मैं समझ गया की वो ऐसे क्यूँ चीखी थी | 

 मैंने उसको उठाया और उसके लिप्स पर किस करने लगा | फिर मैंने उसके आंसूं पोछे | जब वो थोडा नार्मल हुई तो मैंने बहुत आराम से उसकी चूत में फिर से अपना लंड डाल दिया | इस बार भी उसे दर्द हुआ लेकिन पिछली बार से थोडा कम | अब मई धीरे धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा | मुझे मजा आ रहा था क्युन्किन उसकी चूत बहुत टाइट थी | वो अभी भी थोडा रो रही थी लेकिन साथ ही साथ थोड़े मजे भी ले रही थी | उसके मुंह से लगातार आह्ह हह आया अ आया ऊऊ आया आह्ह आहा हा अह अह अह अह अहाह अह अह अह अह अह अह अह अह अआः अह हा हा हा अह अह अहा अअ अ औऊ उ उ उ उ ऊ ऊऊऊउ उ ऊ उ आःहा आः आहा हा हा हा हा हा हा हा हा अह अह आहा अ अ अ अ आह्ह्ह्हा हह्ह्ह्हा अ अह्ह्ह्हा हहह्हा आहा ह अह अह अह आहा हा उईईईईईईईईईईईई निकल रहा था | मैं उसे छोड़ते हुए उसके स्तनों को भी मसल रहा था | दोस्तों मई आप लोगों को बता नही सकता की क्या ससेने था | ऐसा लग रहा था मानो जन्नत मिल गयी हो | अगर ऐसी लड़की चोदने को मिल जाये तो जन्नत धरती पर ही है | मैंने चोदते हुए उसे किस करना चालू रखा ताकि उसे थोडा अच्छा लगे | अब हम लोगों ने सोचा की चलो अब 69 पोजीशन का मजा लेते हैं | मैंने उसको लिटाया और खुद उसके ऊपर दूसरी दिशा में लेट गया | अब मेरा लंड उसके मुंह के ठीक सामने था और मेरा मुंह उसकी चिकनी सी चूत के ठीक सामने था | मैंने बिना देरी किये उसकी चूत में अपनी जीभ घुसा दी | उसे अच्छा लगा | उसने भी बदले में मेरा लंड अपने मुंह में लिया और अच्छे से चूसने लगी | दोस्तों उसकी चिकनी चूत की वो खुशबू मैं आज तक नही भूल पाया हूँ और शायद कभी भूल भी न पाऊं | वो मेरा लंड चुसे जा रही थी और साथ ही उसकी सिसकियाँ भी चालू थीं | वो आह्ह अह्ह्ह अहहहा हा हा हा अह हां अह अह अह अह हा हा हा हाआआ ऊऊ उ उ उ ऊ उ ऊऊ ऊ उ उऔउऔऔअ आआऔऊऊ कर रही थी | मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाली और अन्दर बाहर करने लगा | मैंने उससे मेरे टट्टे चाटने को बोला | वो मान गयी और उसने मेरे टट्टे अपने मुंह में ले लिए | वो उन्हें अच्छे से साफ़ करने लगी | मेरे लंड को टोपे को अब वो बार बार बहुत प्यार से किस कर रही थी | मुझे बहुत अच्छा लग रहा था | मैं भी उसके चूत के दाने को अपनी जीभ से कहते जा रहा था और उसको उत्तेजित कर रहा था | धीरे धीरे हम दोनों काफी गरम हो गये और हमने सोचा की चुदाई फिर से शुरू करते हैं | मैंने बोला की इस बार अलग पोजीशन में करते हैं | मैं लेट गया और उसको बोला की मेरे लंड पर आके बैठ जाये | वो आई और मेरे लंड पर बैठ गयी | मुझे उसके बैठने का तरीका बहुत अच्छा लगा | मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर था | मौनी धीरे धीरे मेरे लंड पर उछलने लगी और साथ ही सिसकियाँ लेने लगी | उसके मुंह से आह्ह अहः अह अह अह अह अह अह अह अह अहौउऔऊ आः हा हा हा हह्ह्हा अह आहा हा ह ह ह हाहाह अह हा हा हा हा हा औऊउह्ह अह आहा हाह हा हा हा हा हा अहहह्हहाहा हा अह अह आहा उईईई उई इ इ ई इ इ इ इ ऊऊउ उ उ ऊ उ ऊऊई निकल रहा था | मैंने उसके दूध दबाना शुरु कर दिया और उसके निप्पल को मसलने लगा | क्या बताऊँ दोस्तों क्या नजारा था | मैंने उसके चूतडों को भी हलके से दबा दिया | क्या कोमल से बड़े से चुतड थे उसके | एकदम मस्त | फिगर तो वैसे भी उसका बहुत अच्छा था | मैं उसकी चुदाई किये जा रहा था और वो ऊ ऊऊउ ऊऊ उईइ आआ अआहह्ह्ह आहा हा हा हा हा उई अल्ला आः आआअह्ह्ह्ह अहह हा हा हा हाहाहा किये जा रही थी | मुझे लगा की वो झड़ने वाली है | इसीलिए मैंने कहा की रुको पोजीशन बदलते हैं | मैंने उसको घोड़ी बनने को बोला | अब मैं उसके पीछे आ गया और उसकी चूत में अपना लंड घुसेड़ने लगा | मैंने एक झटके में पूरा लंड डाल दिया | वो चिल्ला पड़ी लेकिन मैंने इस बार निकाला नही | मैंने सोच लिया था किस इस बार जोरदार चुदाई करूंगा | मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसकी चूत की जोरदार चुदाई शुरू कर दी | वो आआ आआ अह्ह्ह हा हा हा हा हा औऊउ ऊऊईइ ऊऊ ई ईईइ इ इ इ इ इ इऊउ ईईईऊऊऊ उई आआ आःह्हा अह आहा हहहहः ऊऊ उ उ उ ऊऊ ईई इ इ ई ई इ चिल्लाये जा रही थी और मैं था की रुकने का नाम ही नही ले रहा था | मैंने अब उसके चूतडों पर थप्पड़ मारना शुरू कर दिया | उसके प्यारे से चुतड सेब की तरह लाल हो गये | मैंने उसकी चूत को बेतहाशा चोदना चालू रखा | वो आआअ अहहहा अह हा हा हाह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हा अह्हहहह्हाहा हा अह अह अह हा हा अह हा अह ऊऊ उ इ इ ई इ ई इ ऊ ऊऊ ई इ ई इ ईईईईईईई इ इ ई इ इ इआ अ अ अ अ ह्ह्ह करना बंद ही नही कर रही थी | उसकी नशीली आवाज़ से मुझे और जोश आ रहा था और मैं उसे और जोर से चोद रहा था | वो बोली की वो झड़ने वाली है | मैंने कहा ठीक है थोड़ी देर में मैं भी झड़ने वाला हूँ | मैंने पूरा जोर लगा के उसकी चूत को चोदना चालू कर दिया | वो ऊऊ ऊऊऊऊ ईई ऊउईईई आआ अ अ अ अ आआह्ह्ह हा अह अह अह हा अह़ा अह अह अह अह अह अह अह अह अह़ा अ अ आआआ ऊऊऊ ईईइ ईई इ इ ई ईइअ करते हुए झड गयी | मैंने तुरंद उसकी चूत से लंड निकाला और उसको बिठा के उसके मुंह में घुसेड दिया | अब मेरा भी निकलने वाला था | मैं उसके मुंह में ही झड गया | मेरा ढेर सारा माल वो पी गयी | अब हम दोनी थक कर लेट गये और साथ में सो गये |
 शिल्पा शेट्टी भाभी की चुदाई
ये घटना पिछले साल की है | मैं बेरोजगार हूँ तो मेरा ज्यादा समय घर में ही कटता था | मैं अपना टाइम या तो टीवी देखने में या मोबाइल में बात करते हुए निकाल देता था | मेरी एक गर्लफ्रेंड भी है तो उससे भी बात होती है मेरी लेकिन वो मुझे सिर्फ ऊपर ही ऊपर खेलने देती है अगर मैंने उसकी चुदाई की होती तो मैं आप लोगो जरुर बताता | मेरे घर के बाजू में एक भाभी रहती है जिसका नाम शिल्पा शेट्टी है और वो 38 साल की है | उसके दो बच्चे हैं एक लड़का है और एक लड़की है | उसका पति प्राइवेट जॉब करता है और वो दिल्ली में रहता है | उसके घर में वो और उसकी सास रहती है | उसकी सास भजन कीर्तन वाली है तो जब उसका सारा टाइम तो मंदिर और यहाँ वहां के भजन में कट जाता है | भाभी अक्सर हमारे घर आती रहती है और कभी कभी मैं भी उनके घर चला जाता हूँ क्यूंकि उनकी जो बेटी है वो मुझे बहुत पसंद करती है | मैं भी उसके साथ खूब खेलता हूँ | मुझे छोटे बच्चे पसंद है | एक दिन की बात है उस समय दोपहर थी तो मैंने सोचा कि मिनी ( भाभी की बेटी ) घर आ गई होगी तो मैंने सोचा कि उसके साथ खेल लूं | जब मैं घर गया तो देखा कि दरवाजा बंद था | मैंने कई बार दरवाजा खटखटाया पर कोई दरवाजा नहीं खोला | मुझे लगा शायद घर में कोई नहीं होगा तो अपने घर वापस आने लगा तभी मेरा एक दोस्त मिल गया तो मैं उससे बात करने लगा | तभी एक दम से दरवाजा खुला और वहां से एक 40-45 साल का आदमी वहां से निकल रहा था | मुझे अजीब लगा अगर आदमी अनजान निकल रहा है तो भाभी ने दरवाजा क्यूँ नहीं खोला और मेरे जाने के बाद ही दरवाजा क्यूँ खोला ? मैं अपने दोस्त से बात करने के बाद भाभी के पास गया और कहा भाभी ये अंकल कौन हैं ? तो वो घबराते हुए पूछी कौन अंकल ? तो उन्होंने कहा अरे वो मेरे ससुर के दोस्त हैं और कभी कभी हमारे घर आते जाते रहते हैं | तो मैंने पूछा कि फिर आपने दरवाजा क्यूँ नहीं खोला मैंने तो कितनी बार दरवाजा खटखटाया था ? तो वो और घबरा गई | मैं समझ गया कि कुछ तो लोचा है | मैंने भाभी से पूछा कि बंकू और मिनी कहाँ हैं ? तो उन्होंने कहा कि वो अपनी दादी के साथ मंदिर गए हैं | अब तो मेरा शक पूरा सच में बदल गया | मैंने भाभी से पूछा भाभी देखो मुझसे झूट मत कहना तभी भाभी ने मुझसे कहा अभी मत बोलो जो बोलना है अन्दर आओ फिर बोलना | उसके बाद उन्होंने मुझे अन्दर बैठाया और कहा हाँ अब पूछो | तो मैंने पूछा कि भाभी देखो मुझसे झूट मत कहना | मुझे सच सच बताओ कि वो कौन आदमी है और जब आप अकेले हो तब वो यहाँ क्या कर रहा था और इतना दरवाजा ठोकने के बाद भी आपने दरवाजा क्यूँ नहीं खोला | पहले तो भाभी बहुत देर तक मुझसे झूट बोलती रही और मैं बस उसी बात पे टिका रहा | काफी देर हो गई और उतने में भाभी और बच्चे भी आ गए तब मैंने कहा भाभी मुझे जवाब चाहिए मैं कल सुबह आऊंगा | भाभी तब भी शांत रही | फिर मैंने मिनी को गोद में उठाया और उससे पूछा कि मिनी चले खेलने तो उसने भी कहा हाँ भैया और बंकू टीवी देखने लगा | दादी काम में लग गई और भाभी भी उठ के चले गई | फिर अगले दिन जब मैं उनके घर गया तब सुबह के 11 बज रहे थे | भाभी उस समय अकेले रहती हैं | मैं भाभी के गया तब भाभी काम कर रही थी तो मैंने उनको आवाज़ लगाया तो वो आ गई | पर फिर भी शांत ही थी | मैंने भाभी से पूछा कि भाभी अगर आज आपने सच नहीं बताया तो मैं आपकी सास को सब कुछ बताद उंगा | तब भाभी ने कहा नहीं उनको मत बताना मैं तुम्हे सच बताती हूँ | असल में वो मेरे पति के दोस्त हैं और मेरा और उनका अफेयर चलता है | जब घर में कोई नहीं रहता तब मैं उनको बुला लेती हूँ | फिर मैंने कहा फिर तो चुदाई भी होती होगी | तो भाभी ने हाँ कह दिया |
मैंने कहा भाभी आप उनसे चुद्वाती हो इससे अच्छा मुझसे चुदवा लिया करो | आपको चुदाई भी मिल जायगी और कोई डर भी नहीं रहेगा | भाभी कुछ नही बोली तो मैंने थोडा जोर दिया तब भाभी ने मुझे मना कर दिया | मुझे गुस्सा आ गया तो मैंने भाभी का हाँथ पकड़ा और कहा कि अगर मुझे चुदाई नही मिली तो मैं सब को बता दूंगा | ये बात सुन कर भाभी की गांड फट गई तो भाभी ने हाँ कह दिया | फिर मैंने भाभी से पूछा कि ये लोग कब तक घर आयेंगे ? तो भाभी ने कहा कि अभी तो बहुत टाइम है | फिर मैं दरवाजे की तरफ गया और दरवाजा बंद कर दिया | फिर मैंने भाभी को अपनी बांहों में लिया और उनके होंठ को चूसने लगा तो भाभी साथ दे नहीं रही थी इस बात पर मुझे गुस्सा आ गया | मैंने कहा साली बूढ़े लंड पसंद हैं क्या ? जवान लंड मिल रहा है तो साथ दे वरना | फिर भाभी मेरे होंठ में अपने होंठ रख कर किस करने लगी | 

 मैं भी भाभी के होंठ को अच्छे से चूस रहा था | 10 मिनट किस करने के बाद मैंने उनके गाउन को उतार दिया और और ब्रा के ऊपर से ही उनके दूध को दबाने लगा तो उनके मुँह से आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह निकलने लगी | फिर मैंने उनके ब्रा को भी उतार दिया और उनके दूध को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा तो वो आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह करते हुए आन्हे भरने लगी | मैं उनके दूध को जोर जोर से मसलते हुए चूस रहा था और वो आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह करते हुए मेरे सिर के बाल को सहला रही थी | उसके बाद मैंने उनकी पेंटी उतारी और फिर सोफे पर लेटा कर उनकी टांगो को चौड़ा कर दिया और चूत को चाटने लगा तो वो आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह करते हुए सिस्कारियां भरने लगी |
मैं उसकी चूत चाटते हुए ऊँगली डाल कर चोदने भी लगा तो वो आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह करते हुए मेरे मुँह को अपनी चूत में दबाने लगी | उसके बाद मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया | वो मेरा लंड देख कर जीभ होंठ में फेरने लगी और झट से मेरे लंड पर अपनी जीभ फेरने लगी तो मेरे मुँह से भी आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह की आवाज़ निकलने लगी | मेरे लंड को चाटने के बाद उसने अपने मुँह में डाला और चूसने लगी तो मैं भी आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह करते हुए उसके मुँह में अपना लंड पेलने लगा | उसके बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत में सहलाया और अन्दर डाल दिया और चोदने लगा तो वो आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह करते हुए सिस्कारियां लेने लगी | कुछ देर चोदने के बाद मैंने अपनी चुदाई तेज कर दिया और जोर जोर से चोदने लगा तो वो भी आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह करते हुए अपनी कमर उठा उठा कर चुदवा रही थी | फिर मैंने उसे वहीँ घोड़ी बनाया और पीछे से लंड डाल कर चोदने लगा तो वो भी आहा ऊनंह ऊम्म्ह आहाआ ऊंह ऊम्मंह अह़ा ऊनंह ऊमंह ऊनंह करते हुए अपनी गांड आगे पीछे करते हुए चुदाई में साथ दे रही थी | करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना वीर्य उसकी गांड में छोड़ दिया 
 श्वेता तिवारी और पलक तिवारी की चुदाई
यह बात काफी साल पहले की है. मेरी और श्वेता तिवारी रानी की शादी के करीब तीन या चार महीने के बाद की. शादी के दौरान श्वेता तिवारी रानी की बेटी पलक और उसके पति अभि से एक बार परिचय तो हुआ था लेकिन शादी की भागमभाग में सब दिमाग से निकल गया था. सिर्फ यह याद था कि श्वेता तिवारी की एक उसके जैसी ही सुन्दर सी, सेक्सी सी बेटी है. तब तो सिर्फ श्वेता तिवारी रानी के पेटीकोट में मैं हर वक़्त घुसा रहता था और उसकी बुर के जूस के फुव्वारों में डूबा रहता था.
हमारी शादी के तीन चार महीने बाद इन दोनों की चचेरी बेटी की शादी भी थी मेरठ में. श्वेता तिवारी रानी ने हुक्म दे दिया था कि हमें शादी में जाना है, हर फंक्शन में अटेंड करना है और वापिस लौटने की कोई जल्दी नहीं मचानी है. इसलिए मैंने दस दिन की छुट्टी ले ली और शादी से दो दिन पहले और दो दिन बाद तक वहां रहने का प्लान बना लिया. यह तय हुआ कि शादी की बाद हम लोग बाकी की छुट्टी अपने अपने साले अभिषेक के घर पर बिताएंगे.
यह वही अभिषेक है जिसकी बेटी रीना रानी है, जिसकी चूत का उद्घाटन मैंने ही किया था.  
खैर शादी से दो दिन पहले मैं और श्वेता तिवारी रानी मेरठ पहुँच गए शाम के चार साढ़े चार बजे. उन्होंने ठहरने का अच्छा इंतज़ाम कर रखा था. शहर के बाहरी इलाके में एक मैरिज हाल में सब घर वालों के रुकने का था और वहीं शादी के सभी रस्मो रिवाज़ होने थे.
बारातियों के रुकने के लिए नज़दीक के ही एक होटल में किया गया था.
मैरिज हाल एक काफी बड़े लॉन में था. उसमें दो बैंक्वेट हाल थे: एक छोटा, एक बड़ा और 16 कमरे थे. शादी के लिए बड़ा वाला बैंक्वेट तय किया गया था और भोजन बाहर लॉन में. कमरे तो परिवार वाले मेहमानों को दे दिए गए. बुड्ढे लोग, बिन ब्याहे लड़के और लड़कियों के लिए छोटे वाले बैंक्वेट में फर्श पर बिस्तर बिछा दिए गए थे. एक तरफ लड़के लोग, दूसरी तरफ लड़कियां और हा हा हा हा दोनों के बीच में बुज़ुर्ग लोग, ताकि कोई भी कुछ गड़बड़ न कर सके. उस ज़माने में आजकल जैसा खुलापन नहीं था.
पलक और अभि हमसे पहले आ चुके थे. वो अपने दोनों बच्चे अपनी सास के पास छोड़ के दोनों मियां बीवी ही आए थे. तो हमको एक कमरा दे दिया गया, जो पलक वाले कमरे के बगल वाला था. तब मैंने पलक को भली भांति देखा. कम्बख्त क्या गज़ब की क़ातिल जवानी थी. पटियाला कट सलवार और प्रिंट की शमीज़, पांव में जूतियाँ. हल्का सा मेकअप, गले में सोने की चैन, कलाइयों में गुलाबी चूड़ियां और एक एक सोने का कंगन. पैरों में चांदी की खन खन की आवाज़ करने वाली पायजेब. 
श्वेता तिवारी रानी और और पलक दोनों बेहद सुन्दर तो थी हीं, कामुक भी बहुत थीं. एक सी कद काठी, एक सी हसीन बाहें, एक से खूबसूरत हाथ और पैर. पलक बहुत गोरी चिट्टी थी परन्तु श्वेता तिवारी रानी जैसी अँगरेज़ सरीखी गोरी नहीं. श्वेता तिवारी रानी के सामने तो वो काली दिखती थी. उसके चूचे श्वेता तिवारी रानी के चूचों से काफी बड़े और भारी थे.
जैसे ही उससे आँखें चार हुईं, मुझे फ़ौरन मालूम हो गया कि इस क़यामत को चोदना तो पड़ेगा ही, वर्ना चैन नहीं मिलेगा. उसकी आँखों में मैंने तैरती हुई जो नंगी वासना देखी उससे यह भी पक्का हो गया कि उसको पटाने में ज़्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी.
उसका महा चूतिया पति अभि. मेरे सामने कहीं से कहीं ठहरता ही नहीं था. साला पांच फुट पांच इंच का मरियल सा आदमी. औरतों जैसी पतली आवाज़. हाथ मिलाया तो पिलपिला सा हाथ. बेटी का लंड एक मरदाना छिपकली सा लगता था. उधर मैं घाट घाट का पानी पिया हुआ पांच फुट ग्यारह इंच का हट्टा कट्टा, हैंडसम आदमी जिसके बदन से ताकत फूटी पड़ती थी. कोई तुलना थी ही नहीं. यह तो पक्का था कि पलक जैसी कामुक पटाखे को झेलना अभि के बस का रोग तो था नहीं. इसका अर्थ यह हुआ कि श्वेता तिवारी रानी की यह बेटी एक ज़ोरदार मर्दानी चुदाई के लिए तरसती रहती होगी.

 शाम को ज़्यादातर मेहमान छोटे वाले बैंक्वेट में जमा हो गए. चाय पकोड़ों के दौर चलने लगे, जैसा शादियों में हुआ करता है. श्वेता तिवारी रानी अपने रिश्तेदारों से गप्पे मरने में व्यस्त हो गई. पलक मेरे आस पास मंडराती रही. दो तीन बार चाय लाकर भी दी. अभि भी साथ बैठा था और कुछ कुछ बोले जा रहा था. मैं भी उस चूतिये को झेलता हुआ हूँ हाँ हूँ हाँ किये जा रहा था जबकि मेरा पूरा ध्यान पलक पर केंद्रित था. उसके एक एक हाव भाव को, उसकी चाल को, उसके बदन के हर एक अंग को बड़े गौर से देख रहा था और अपने बेसाख्ता अकड़े हुए लौड़े को गहरी गहरी साँसें लेकर बिठाने की चेष्टा कर रहा था.
बार बार मैं उसे अपनी तरफ देखता हुआ पाता. जब भी आँखें मिलतीं तो वह निगाह पलट लेती. कभी माथे पर आयी हुई अपने बालों की लट को वापिस सिर तक ले जाती, नाज़ुक से सुन्दर से हाथों से. कभी अपने कानों के बुंदों को कुछ करती, तो कभी बैठ के अपने पैरों के बिछुओं के साथ कुछ घसर पसर करती. मैं उसकी नज़रों में भयंकर काम वासना बिजली की तरह कौंधती हुई देख रहा था.
कई बार मैंने उसको अपने लौड़े वाली जगह पर ताकते हुए पाया जैसे अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रही हो कि मेरी पैंट के पीछे जो औज़ार छुपा है वो कैसा है, कितना लम्बा है, कितना मोटा है. इसमें तो कोई संदेह था ही नहीं कि ये हरामज़ादी चुदने को बेक़रार थी. सवाल ये था कि कहाँ और कैसे. और दूसरा महत्वपूर्ण सवाल ये था कि पहल कैसे की जाए. उसने तो सब संकेत दे दिए थे तो अब यह जिम्मेदारी मेरी थी कि पहला क़दम उठाऊँ और चुदाई के लिए कोई जगह का इंतज़ाम भी करूं.
किस्मत से यह मौका जल्दी ही मिल गया. हुआ यह कि डिनर से पहले सबने कहा कि एक ग्रुप फोटो हो जाए. सब लोग ग्रुप फोटो के लिए फोटोग्राफर की सुझाई हुई जगह पर इकट्ठे होने लगे. बच्चे लोग बैठ गए. उनके पीछे बुज़ुर्ग लोग कुर्सियों पर बिठा दिए गए. उनके पीछे बचे हुए लोग खड़े हो गए. श्वेता तिवारी रानी और पलक साथ साथ खड़ी थीं लेकिन मैं उन दोनों के बीच घुस गया. अभि भी मेरी देखा देखी पलक की दूसरी तरफ खड़ा हो गया. फोटोग्राफर ने सबको दाएं बाएं सरका कर एडजस्ट किया ताकि सबकी फोटो आ जाए.
जब तक वो यह सेटिंग जमा रहा था, मैंने एक हाथ श्वेता तिवारी रानी के नितम्बों पर फेरना शुरू किया और दूसरे हाथ से पलक के नितम्ब सहलाने लगा. श्वेता तिवारी रानी ने ज़ोर से मेरी बांह पर नोचा. मैंने और ज़ोर से उसके चूतड़ दबाये. श्वेता तिवारी रानी ने दो तीन बार नोच कर हथियार डाल दिए. वह जानती थी कि मैं रुकने वाला नहीं तो मज़े से चूतड़ दबवाने का मज़ा क्यों न लिया जाए. वैसे भी उसको मेरी छेड़ छाड़ में, चूतड़ या चुची या जांघें सहलवाने में बड़ा आनन्द आता है, जबकि सब लड़कियों की तरह ऊपर से नक़ली गुस्सा दिखाती है.
पलक ने कुछ नहीं कहा, न ही मेरा हाथ हटाने की कोशिश की, वो चुपचाप नितम्ब पर हाथ फिरवाती रही.
मैं उसके मुलायम नितम्ब सहला रहा था और उसके शरीर में बार बार एक तेज़ झुरझुरी आ रही थी. मैं समझ गया था कि उसकी चूत बुरी तरह से सुलगने लगी है. परन्तु चुदाई के लिए तो अभी प्रबंध करना बाकी था. मैं दिमाग दौड़ा रहा था कि क्या किया जाए.
खैर फोटो सेशन पूरा हुआ और सब लोग डिनर के लिए चल दिए. डिनर बाहर लॉन में लगाया गया था. वहां जाते हुए श्वेता तिवारी रानी ने फिर से मेरी बांह पर चुटकी काट कर फुसफुसाते हुए कहा- ये क्या बदमाशी कर रहा था तू… हैं? बेटीचोद आराम से फोटो नहीं खिंचवा सकता था?
मैंने कहा- डार्लिंग श्वेता तिवारी रानी, तेरे साथ तो हर वक़्त ऐसी बदमाशी करने का मन करता रहता है, तो बोल क्या करूँ?
“चुप रह कमीने… लोग देख लेते तो क्या सोचते… कुछ तो ध्यान रखा कर कि कहाँ है, किसके सामने है!”

 मैंने कहा- श्वेता तिवारी रानी…. श्वेता तिवारीरानी… कौन देखता… या तो शादीशुदा मर्द देखते तो उनको भी अकल आ जाती कि अपनी पत्नियों को कैसे प्यार करना चाहिए… अगर शादीशुदा लड़कियां देखती तो वो अपने पतियों को डांटती कि कमीने ऐसे प्यार किया जाता है… और अगर कुंवारे लड़के या लड़कियां देख लेती तो उनको पता चल जाता कि कैसे इश्क़ लड़ाना चाहिए… इसमें प्रॉब्लम क्या है सबके फायदे का दृश्य होता न.
श्वेता तिवारी रानी ने नक़ली गुस्से से कहा- और बुड्ढे लोग देखते तो?
मैंने हँसते हुए कहा- बेटीचोद अगर बुड्ढे लोग देखते तो साले अफ़सोस करते कि क्यों ज़िन्दगी में अच्छे से प्यार नहीं किया… कसमें खाते कि अगले जनम में बेहिसाब प्यार करेंगे. जवानी बर्बाद नहीं होने देंगे.
श्वेता तिवारी रानी ने आँखें तरेर के कहा- हरामी, तुझ से बातों में आज तक कोई जीता है जो मैं अपना दिमाग ख़राब करूँ… मैं जा रही हूँ उर्मिल दीदी से बातें करने… तू चुपचाप अच्छा बच्चे की तरह यहाँ बैठ… मैं थोड़ी देर में आती हूँ फिर खाना साथ खाएंगे… और हाँ फिर कोई बदमाशी नहीं करियो…समझ गया न?
मैंने कहा- जी हाँ मैडम श्वेता तिवारी रानी जी, अच्छा बच्चा बन के बैठा रहूंगा आपके आने तक. और कोई हुकुम रानी जी का?
लॉन में पहुँच कर श्वेता तिवारी रानी उर्मिल दीदी से बातचीत में लग गयी. इधर पलक मेरे पास आयी और बोली- वहां क्या गड़बड़ कर रहे थे आप… कितने सारे लोग थे… देख लेते तो कितनी बदनामी होती न!
मैं बोला- मैंने कुछ नहीं किया… आपके पति अभि ने किया होगा.
पलक की हंसी छूट गई, बोली- वो तो अकेले में भी ऐसा नहीं करते तो सबके सामने क्या करेंगे… दूसरे आप यह बताइये कि अगर अपने कुछ नहीं किया तो आपको क्या पता कि मैं किस गड़बड़ की बात कर रही हूँ.
मैंने कहा- पलक जी, कान पकड़ता हूँ कि आगे से ऐसी गड़बड़ किसी के सामने नहीं करूँगा.
पलक- अच्छा जी… मतलब यह कि गड़बड़ करनी ज़रूर है… यही हुआ न आपकी बात का मतलब?
मैं- अच्छा अब खाना खा लें या गड़बड़ पुराण ही चलता रहेगा… पलक जी आपसे बहुत सी बातें करनी हैं… यहाँ इतनी भीड़ भाड़ में तो हो नहीं पायँगी… कल दिन में तो कुछ काम है नहीं… क्यों न किसी होटल में मिल लें और तसल्ली से बातें करें.
पलक ने इठलाते हुए कहा- राज जी, कल की कल देखी जायगी.
इतना बोल के वह भी श्वेता तिवारी रानी की तरह इधर उधर सरक ली किसी से गप्पें चोदने. बेटीचोद इन लड़कियों को गपास्टिक चोदने में कितना आनन्द आता है. घंटों बिना थके गप्पें लगा सकती हैं.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उसने यह नहीं कहा कि होटल में क्यों जाना है… यहीं बात क्यों नहीं हो सकती… ऐसी क्या बातें हैं जिसके लिए होटल में जाना ज़रूरी है… वग़ैरा, वग़ैरा.
मेरा पहला क़दम बिल्कुल सही था, तीर निशाने पर लगा था. वो तैयार थी होटल में चलने के लिए. तैयार न होती तो यह न कहती कि कल की कल देखेंगे बल्कि साफ़ साफ़ मना कर देती.

अब मुझे होटल का इंतज़ाम करना था. सुबह सबसे पहले यही करने का फैसला कर लिया. अभी अगर रात के साढ़े दस न बज गए होते तो इसी वक़्त कोई होटल तलाश कर लेता.
खैर कुछ समय के बाद श्वेता तिवारी रानी उर्मिल दीदी से फ्री होकर आ गयी और हम लोग खाना खाने बैठ गए. डिनर के बाद जैसे ही कमरे में गए तो मैंने तीन चार घंटों से अकड़े लौड़े की वजह से टट्टों में होते हुए दर्द से विचलित होकर श्वेता तिवारी रानी की जम के चुदाई की. बेटी की लौड़ी को तीन बार चोदा.
उसकी चूत से हमेशा की भांति जूस की ज़बरदस्त बरसात हुई. रोज़ की तरह खूब दिल खोल के पिया वह अलौकिक रस. यारों तभी तो उसका नाम श्वेता तिवारी रानी रखा है. सोचा कि अगर इसकी बेटी पलक भी रस निकालने की ऐसी ही चैंपियन हुई तो बेटीचोद मज़ा आ जायगा. लंड ने भी फ़ौरन फुदक के अपनी सहमति जताई.
वैसे तो वह चुदाई के बाद सोना चाहती है लेकिन पलक को चोदने, भोगने, चूसने के ख्यालों के कारण मैं बहुत अधिक भड़का हुआ था, तो मैंने उसको सोने नहीं दिया. पहली चुदाई के बाद जैसे ही उसको आंख लगी तो मैंने उसके घुटनों के पीछे जीभ फिराई. कूँ कूँ कूँ करके जग गई और झट से चुदाई को तैयार.
दूसरी चुदाई के बाद उसकी नींद लगते ही मैंने उसकी नाभि में जीभ फिराई तो उसका भी वही नतीजा निकला जो पहले निकला था. ऊँऊँऊँऊँऊँ… श्वेता तिवारी रानी फिर से मचल गई चुदने के लिए.
चुदाई में वह शोर भी बहुत मचाती है. ज़ोर ज़ोर से किलकारियां मारना, चोदन सुख में मदमस्त होकर आहें भरना और चीखें निकालना, बार बार मेरा नाम लेकर चिल्लाना, ज़ोर ज़ोर से धक्के ठोकने की गुहार लगाना उसकी आदत है. जब वह इतनी आवाज़ करती है तो मैं भी उत्तेजना से भर के श्वेता तिवारी रानी… श्वेता तिवारी रानी चिल्लाता हूँ, खासकर झड़ते समय तो और भी ज़्यादा. 
मेरी सेक्सी कहानी में आपने अभी तक पढ़ा कि ससुराल की रिश्तेदारी में एक शादी थी, वहां मेरी बड़ी साली पलक आई हुई थी, बहुत खूबसूरत चोदने लायक माल… वो भी चुदासी ही दिख रही थी. मैंने उसे अगले दिन के किसी होटल में जाकर बात करने के लिए बोला तो उसने कोई जवाब नहीं दिया, मतलब वो तैयार थी.
अगली सुबह मैं तो 8 बजे ही श्वेता तिवारी रानी को सोता छोड़कर होटल की तलाश में चल दिया. फरवरी की मीठी मीठी सर्दी में रात को शादी के माहौल में सब लोग देर से ही सोये थे, इसलिए कोई भी जगा हुआ नहीं मिला. लॉन में जाकर पहले तो दो कप चाय पी और फिर बाहर निकल के एक रिक्शा पकड़ा. रिक्शा वाले से पूछा कि यहाँ नज़दीक कोई अच्छा सा होटल है क्या. वो बोला कि हाँ साहिब पास में ही बेगम पुल पर होटल विजय बार है वहां ले चलूँ? मैंने कहा कि चल देखूं कैसा होटल है.
विजय बार एंड होटल उसका नाम था. जहाँ हम ठहरे हुए थे, वहां से रिक्शा से पांच मिनट से भी कम के फासले पर था. बहुमंज़िला इमारत थी. रिसेप्शन पर जाकर पता किया तो रूम मिल सकते थे. किराया भी कोई ज़्यादा महंगा नहीं था. मैंने रूम देखने को कहा तो उन्होंने एक रूम खोल कर दिखा दिया. रूम काफी अच्छा था. साफ सुथरा, अच्छा साफ़ बाथरूम और अच्छे साफ़ सफ़ेद तौलिये. मैंने रूम बुक करवा दिया, मिस्टर एंड मिसेज़ राज कुमार के नाम से, और बोला कि ग्यारह बजे के करीब चेक-इन करेंगे. वह अच्छा ज़माना था, होटल बुक करने के लिए आजकल की तरह कोई आइडेंटिटी प्रूफ, कोई एड्रेस प्रूफ नहीं देना पड़ता था. बस नाम लिखो, कुछ एडवांस पेमेंट करो और रूम आपका.

 वापिस आया तो साढ़े आठ बजे थे. कमरे में आया तो श्वेता तिवारी रानी गहरी नींद में थी. यह बहुत महत्वपूर्ण था. अगर जगी हुई होती तो वह ज़रूर पूछती कि इतनी सुबह सर्दी में कहाँ और क्यों जा रहे हो.
10 बजे तक लोग तैयार होकर नाश्ते के लिए आने लगे थे. मैं तो तैयार पहले ही हो गया था. श्वेता तिवारी रानी भी तकरीबन तैयार हो ही चुकी थी. नाश्ता बाहर लॉन में बढ़िया धूप में लगा था.
पलक और वो अभि भी वहां मिल गए. पलक बहुत ही कामुक लग रही थी. एकदम सेक्स बम. हरामज़ादी ने बड़े भड़कीले मैरून रंग की प्रिंट वाली पटियाला सलवार और हल्की गुलाबी शमीज़ डाल रखी थी. गले में गहरे गुलाबी रंग का दुपट्टा और पैरों में बेल बूटेदार, सुर्ख जयपुरी जूतियां. मौका मिलते ही मैंने उसको बोल दिया कि होटल विजय बार बिलकुल पास में है वहां ग्यारह बजे मिलेंगे, दिल खोल के बहुत सी बातें करेंगे.
मैंने कहा- बाहर निकल के रिक्शा ले लेना, चार पांच मिनट में होटल आ जायगा. उसने सिर हिला दिया किन्तु बोली कुछ नहीं.
नाश्ते के दौरान जैसे ही उसने मौका देखा तो मेरे पास आयी और बोली- तुम लोग कितना हल्ला गुल्ला करते हो… रात भर सोने नहीं दिया तुम दोनों के शोर ने… सारी दुनिया को पता लग गया होगा कि आप किरण को श्वेता तिवारी रानी कहते हैं.
मैंने हंसकर कहा- पलक जी, आप क्यों जाग रही थी उस टाइम… आपको भी शायद अभि जी सोने नहीं दे रहे होंगे. अगर आप सोई होती तो शोर आपको कहाँ सुनाई पड़ता… और पता चल गया श्वेता तिवारी रानी का नाम तो चलने दो क्या फर्क पड़ता है.
पलक के चेहरे पर दुःख की एक गहरी छाया दौड़ गई. शायद मैंने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया था.
नाश्ते के बाद मैंने श्वेता तिवारी रानी से कहा कि मेरठ में मेरा एक दोस्त रहता है प्रदीप, मैं उससे मिलने जा रहा हूँ. वैसे भी शाम तक तो कुछ काम है नहीं. बारात आएगी 8 बजे, उसके पहले ही आ जाऊंगा. तू आराम से अपनी चचेरी ममेरी बहनों से गप्पें मार.
श्वेता तिवारी रानी ने कहा- ठीक है तू जा अपने दोस्त के पास. मैं तो सोने जा रही हूँ… तूने बहुत ही ज़्यादा तंग किया था रात भर… सारा बदन दुःख रहा है. दो चार घंटे नींद लूंगी तो ठीक रहेगा.
करीब पौने ग्यारह बजे मैं होटल जा पहुंचा और लॉबी में बैठ कर पलक का इंतज़ार करने लगा. पंद्रह बीस मिनट के बाद पलक आ गई.        
मैं उठकर उसके पास चला गया और उसको रूम में साथ ले चलने लगा. पलक ने कहा- अरे आपने तो रूम ले लिया… मैं तो समझी थी हम रेस्टोरेंट में बैठ कर बातचीत करेंगे.’
मैंने कहा- पलक जी जो बातचीत करनी है वह रेस्टोरेंट में नहीं हो सकती… उसके लिए तो कमरा ही चाहिए… रेस्टोरेंट में करनी होती तो वहीं कर लेते न… यहाँ क्यों आपको आने की तकलीफ देता. आइये रूम में चलिए.’
हम रूम की तरफ चल दिए जो कि फर्स्ट फ्लोर पर था. रास्ते में मैंने पलक से पूछा- आप क्या बहाना लगा के आईं होटल में? मैंने तो श्वेता तिवारी रानी से कहा कि एक दोस्त से मिलने जा रहा हूँ.
पलक ने हँसते हुए कहा- मैंने भी इनसे यही कहा कि मेरी स्कूल में साथ पढ़ी एक सहेली है जो मेरठ में रहती है… उसको मिलना चाहती हूँ.

 हम दोनों अपनी बहानेबाज़ी पर हँसते हुए रूम तक पहुँच गए. रूम नंबर 102 का लॉक खोल कर मैं अंदर घुसा फिर पलक को अंदर आने का इशारा किया.
पलक जैसे ही अंदर घुसी मैंने बिजली की तेज़ी से दरवाज़ा बंद करके उसको ज़ोर से आलिंगन में बांध लिया और अपने तपते होंठ उसके होंठों से लगा दिए. मैंने इतना कस के भींचा था और इतने ज़ोर से होंठ से होंठ चिपकाए थे कि पलक को शायद साँस घुटती महसूस हुई क्यूंकि थोड़ी देर मचलने के बाद उसको खांसी आ गयी. मैंने थोड़ी पकड़ ढीली की और होंठ हटा लिए. उसने जल्दी जल्दी गहरी गहरी साँसें लीं और फिर बोली- यहाँ बातचीत करने बुलाया था या मेरा दम घोंटने को… और यह क्या हरकत की? अगर किसी को भनक भी पड़ गई तो क्या हशर होगा कुछ ध्यान भी है आपको… मेरी तो इज़्ज़त का जनाज़ा निकल जायगा… बताइये क्यों बुलाया था… और हाँ ज़रा दूर से.
मैंने हँसते हुए कहा- पलक तू इतनी भोली तो न बन… तू दूध पीती बच्ची नहीं है… यहाँ होटल में बुलाया था तो इतनी तुझ में भी समझ तो है कि होटल में रामायण का पाठ तो नहीं करेंगे… पाठ तो होगा ज़रूर लेकिन कामदेव का.
इतना बोल के मैंने फिर से उसको दबोच लिया और होंठ चूसने लगा.
उसको बाँहों में बांधे बांधे सरकता हुआ मैं बिस्तर तक जा पहुंचा और उसको लिए लिए बेड पर आ गया. अब तक उसने भी प्रतिरोध करने का नाटक बंद कर दिया था और अपनी सुलगती हुई चूत की बात मान कर मज़े से होंठ चुसवाने लगी. अपनी टांग उसने मेरी टांग के ऊपर लपेट ली और उसके नाख़ून मेरी पीठ में चुभने लगे. अब वो भी मुझे कस के लिपटी हुई थी.
थोड़ी देर चुम्बन के बाद अचानक पलक ने अलग किया और खड़ी होकर बोली- रुकिए ज़रा… सारी कमीज़ मुस मुसा जायेगी… थोड़ी सी तो मुस भी गयी.
उसने अपने कपड़ों को हाथ से तह करके ठीक करना शुरू किया. मैंने उसके कन्धों पर हाथ रख कर उसको बिस्तर पर बिठा दिया और नीचे बैठ कर उसकी जयपुरी जूतियां उतार दीं.
जूतियों की गिरफ्त से आज़ाद होते ही उसके खूबसूरत पैरों ने मेरा मन मोह लिया. पहले मैंने जूतियां सूंघी जिनमें उसके पांवों की नशीली महक आ रही थी. आआ आआआह!
पलक बोली- यह क्या कर रहे हैं आप… छोड़िये इन जूतियों को.
मैं बोला- आपके इन हद से ज़्यादह सुन्दर पैरों की खुशबू ले रहा हूँ इन जूतियों में… काश मैं ये जूती होता तो आपके इन मादक चरणों से लिपटा तो रहता हर समय!
पलक ख़ुशी से झूम उठी और बोली- अच्छा महाराज… डायलॉग बहुत हो गए अब बताइये कौनसा पाठ पढ़वाने को बुलाया था?
उसकी शराबी सी आँखों में हवस के लाल लाल डोरे तैर रहे थे. जो मैंने उसकी जूतियां सूंघ कर उसके पांवों की प्रशंसा की उससे उसकी कामेच्छा और भी अधिक भड़क उठी थी.            
लौड़े ने पूरी तरह अकड़ के चार पांच तुनके मार कर सूचना दी कि हाँ उसको भी जूतियों से आयी हुई पलक के पैरों की सुगंध से मज़ा आया. लेकिन पलक की बात से और उसकी आँखों से यह साफ़ लग रहा था कि वो चुदने के लिए ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना चाहती. तभी तो पाठ पढ़ने की बात शुरू की थी कुलटा ने. माँ की लौड़ी को अभी अच्छे से पढ़ाऊंगा कामदेवता का मस्त पाठ. हरामज़ादी बाकी के सब पाठ भूल जायगी.   

 मैंने उठकर रूम की बत्तियां बुझा दीं, केवल बेड की साइड में रखा हुआ टेबल लैंप जलने दिया. टेबल लैंप की रोशनी वासना को बहुत तीव्र करने वाली होती है इसलिए होटलों में बेड की दोनों तरफ टेबल लैंप रखे जाते हैं. यह मद्धम रोशनी वासना तो भड़काती ही है, आँखों को भी सुहाती है.
मैं फिर फर्श पर लगे गलीचे पर बैठ गया और पलक की पटियाला सलवार का कमरबंद खोल दिया. पलक अपनी कुहनियों के बल अधलेटी सी थी. आराम से उसने सलवार खोल लेने दीं. कुछ देर तक मैं स्तब्ध सा उसकी रेशम जैसी चिकनी मुलायम टांगों की सुंदरता आँखों में बसाता रहा, फिर पलक को हौले से उठाकर उसकी शमीज़ भी उतार डाली. पलक ने शर्म से आँखें बंद कर रखी थीं परन्तु ज़रा सा भी प्रतिरोध नहीं कर रही थी. उसके बदन में कंपकंपी छूट रही थी. अब वह सिर्फ ब्रा और चड्डी में थी.
वाह! वाह! वाह! माशाअल्लाह… क्या बदन था हरामज़ादी का. एकदम परफेक्ट! उसकी नाभि अधिकतर नाभियों के भांति भीतर घुसी हुई नहीं थी बल्कि बाहर उभरी हुई थी. ऐसा लगता था किसी नवजात शिशु की नन्ही सी लुल्ली हो.
मेरे मुंह से खुद ब खुद इस गीत की कुछ पंक्तियाँ गुनगुनाते हुए निकल गयीं. यह गाना लड़की की कामुक सौंदर्य का बखान करने के लिए सबसे उत्तम है. पाठकों को सलाह है कि यह पूरा गीत यू ट्यूब पर ज़रूर देखें अपनी माशूका के साथ नंगे लेट कर और उसे कहें कि यह गाना मैं तेरे लिए गाना चाहता था लेकिन मेरी आवाज़ इतनी अच्छी नहीं है, इसलिए मोहम्मद रफ़ी की मस्त आवाज़ में यह तेरी नज़र करता हूँ. फिर देखिये क्या ज़बरदस्त, भेजा उड़ा देने वाला मज़ा वो आपकी लौंडिया चुदाई में देगी.
पलक मुनमुनाई- झूठे कहीं के. शायरी के साथ झूठ बोल रहे हैं.
किन्तु उसके चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि वो ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी. मादरचोद जानती तो थी ही कि वह एक बहुत सुन्दर लौंडिया है.
मैं बोला- ना ना पलक, झूठ ज़रा भी नहीं. सच तो यह है कि मैंने तेरी पूरी जनम कुंडली जान ली है और इसी लिए वह गाना तेरे लिए एकदम सही बैठता है.
पलक ने आँखें खोल लीं, और उचक के बैठ गयी. ‘अच्छा जी… आप क्या ज्योतिषी भी हैं? अभी परखती हूँ आपको… बताइये क्या हैं मेरी जनम कुंडली?
मैंने हँसते हुए कहा- बात यह है पलक कि तुझे दूसरों की तरह विधाता ने नहीं गढ़ा… उसने जब तुझे बनाने का टाइम आया तो जनाब ने कामदेव को यह कार्य सौंप दिया… कामदेव ने अपनी पूरी कलाकारी तेरे में भर डाली… हुस्न और सेक्स से भरपूर एक कन्या का निर्माण किया जो बड़ी होकर पलक रानी कहलायी… यह है तेरी जनम की दास्तान.’
शर्म से पलक का गोरा बदन सुर्ख हो गया, वो भर्रायी सी आवाज़ में बोली- आप बड़े वो हैं… जाइए मैं नहीं आपसे बात करती.
कह के उसने पलटी खायी और दोनों बाँहों के बीच में सिर घुसा कर उलटी होकर लेट गई.
मेरी ऊपर की साँस ऊपर और नीचे की नीचे रह गई. उसकी मलाई जैसी पीठ, मस्त गोल गोल चूतड़ और सांचे में ढली हुई टाँगें. सुन्दर सी एड़ियां और गुलाबी मुलायम तलवे. ऐसा लगा कि दिल की धड़कन रुक गयी हो. लौड़ा उछल उछल के अलग से पागल किये दे रहा था. उसकी चड्डी के पीछे का भाग इकठ्ठा सा होकर दोनों नितम्बों के बीच आ गया था जिसके कारण दोनों चूतड़ पूरे के पूरे अच्छे से दिख रहे थे.

 उस मोहक, मादक दृश्य को निहारते हुए मैंने जल्दी जल्दी अपने कपडे उतार दिए. लौड़ा हरामी पूरे ज़ोरों से तन्नाया हुआ था, काफी देर से पैंट की क़ैद में फंसकर अकड़ा हुआ था और काफी परेशान था. बिस्तर पर चढ़ कर मैंने धीमे से अपनी जीभ पलक की पीठ पर फिराई, और मेरा एक हाथ उसके चूतड़ों पर जाकर उनको सहलाने लगा. जब पिछली शाम यह चूतड़ फोटो सेशन में सहलाए थे तो यह नहीं मालूम था कि ये इतने नायाब निकलेंगे. सचमुच यह जवानी किसी शायर का ख्वाब का सत्य हो जाने समान थी.
मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसके दोनों तरफ घुटनो के बल बैठ कर पीछे से हाथ डाल कर चूचे पकड़ लिए, हौले हौले से उनको सहलाया. बेटीचोद काफी बड़े संतरे जैसे चूचे थे हरामज़ादी के. अभी तो उनका दर्शन करना शेष था. बिना देखे ही दबाने में जब इतना मज़ा आया तो देख के क्या हाल होगा. वाकई में यह कुतिया तो महा मर्दमार आइटम थी.
जैसे ही मेरे हाथ उसके मम्मों पर लगे एक तेज़ कंपकंपी उसके बदन में आयी. उसके मुंह से ऊँऊँऊँऊँऊँ… ऊँऊँऊँऊँ की ध्वनि निकली- ‘क्या करते हैं… प्लीज़ तंग न करिये ना.’
मैंने झुक कर उसकी रेशमी पीठ पर रीढ़ की हड्डी पर जीभ फिराई. नीचे से ऊपर तक, ऊपर से नीचे तक. मुंह में पलक जैसे पके हुए फल का स्वाद लूटने के लिए लार टपके जा रही थी इसलिए जीभ बहुत गीली थी. पलक ने सिसकारियाँ लेनी शुरू कर दीं. वह अपना सिर दाएं बाएं हिला रही थी जिससे उसके लम्बे बाल इधर उधर झटक रहे थे. धीरे धीरे पूरी पीठ पर जीभ घुमानी शुरू कर दी. पलक तड़प रही थी, आअह आअह आह आह कर रही थी.
मैं सोच रहा था कि जब साली बेहद गर्म हो जायगी तभी चूत में लंड दूंगा. जितनी तड़पेगी उतना ही चुदाई का आनन्द पाएगी मादरचोद रंडी.   
पीछे से हाथ बढ़ाकर मैंने पलक की चूचियां पकड़ के हल्के से दबायीं. पलक चिहुंक उठी और आह आह आह करते हुए कांपने लगी. मैंने मम्मों को और ज़ोर से दबाया. पलक ने और ज़ोरों से आहें भरीं. मैंने रंडी को उठाया और पलट कर सीधा कर दिया. फ़ौरन ही पलक ने अपनी आँखों को दोनों बाँहों से ढक लिया. नंगी थी तो संभवतः शर्म लग रही होगी हरामज़ादी को. मैंने तसल्ली से उसके चूचुक पर निगाहें जमायीं. काफी बड़े संतरों जैसे गोल गोल गोल गोल चूचे थे. काली बड़ी बड़ी घुंडियां जिनके हल्के काले, काफी बड़े आकार के दायरे. बेटीचोद निप्पल अकड़े हुए थे मानों कह रहे हों कि आओ मसल मसल के, कुचल कुचल के हमारी अकड़न दूर कर दो.
मैं पलक के मुंह के पास लंड ले गया और उसकी बाँहों को आँखों पर से हटा कर बोला- हरामज़ादी रांड, ले इस लौड़े को देख… तेरी शान में मादरचोद तन्नाया हुआ है… जब से तुझे देखा है तब से यह कमीना अकड़ अकड़ के नाक में दम किये हुए है.
मैंने लौड़ा पलक की नाक से लगा दिया. पलक ने फ़ुनफ़ुनाते हुए लंड को देखा तो देखती रह गई. सुपारा फूल के कुप्पा था. लाल सुर्ख हो रहा था. लंड की नसें अकड़न से उभरी हुई थीं और अंडे सख्त हो रहे थे. लौड़ा बार बार तुनक रहा था.
पलक ने लंड को गहरी गहरी साँसें लेते हुए अच्छे से सूंघा, सुपारी की खाल पीछे करके अपने गालों पर फिराया, फिर जीभ निकाल के सुपारी का स्वाद चखा. फिर अचानक से उसने लंड को जड़ से पकड़ लिया और उस पर चुम्मियों की बरसात कर डाली.
मैं बोला- बेटीचोद वेश्या, आया पसंद तुझे यह लंड? कुतिया, अब से यही तेरा मालिक है माँ की लौड़ी… अब से तू इसकी गुलामी करेगी हरामज़ादी… समझ गयी ना.’ 

 पलक ने फंसी फंसी आवाज़ में कहा- बहुत सुन्दर है यह नाग… एकदम कोबरा जैसा… मैं तो हो गई इसकी गुलाम… मैं तो तुम्हारी गुलाम उस दिन ही हो गई थी जिस दिन तुम्हे पहली बार शादी में देखा था… लेकिन तुम इतनी गन्दी भाषा क्यों बोलते हो.
“सुन मादरचोद रंडी की औलाद… ये प्यार की भाषा है… सच बोल तुझे अच्छी लगी न मेरी गालियां? आज से मैं तुझे पलक रानी कहा करूँगा… ठीक है न? और तू मुझे साहिल कहा करेगी.”
 “जब तुम्हारी गुलामी ही कर ली तो जो तुम कहो सब मंज़ूर है… साहिल साहिल साहिल… अब वो पाठ भी तो पढ़वाओ जिसके लिए यहाँ लेकर आए थे.”
मैं हंसकर बोला- क्यों, बहुत बेसब्री हो रही चुदने की… रुक ज़रा सा पहले तुझे अपनी जीभ का करिश्मा तो दिखा दूँ.
 जवाब में पलक रानी ने सिर्फ मुंह से आह आह आह की.
मैंने रानी के कान के पीछे अपनी जीभ गीली करके फिराई तो पलक रानी कसमसाई. मैंने उसके कान की लौ को चूसा और फिर जीभ कान के अंदर घुमाई. पलकरानी मस्ती में आकर ऊँ… ऊँ… .ऊँ… करने लगी.
उसका बदन अब बार बार कंपकंपाने लगा था. मैंने उसका मुखड़ा हाथों में लेकर उसके रसीले होंठ चूसे तो उसने भी आनन्दमग्न होकर चुम्‍मे में मेरा पूरा साथ दिया. उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और उसके मुखरस का मज़ा लेते हुए मैं उसकी छोटी सी जीभ चूसने लगा
 फिर मैंने उसकी चूचियाँ निचोड़नी शुरू कीं. पहले मैं हौले हौले निचोड़ रहा था. रानी ने आहें भरनी शुरू कर दीं.
उसने अपनी टांगें मेरी टांगों से कस के लपेट दीं. मैंने चूची अब थोड़ा ज़ोर से दबाईं. पलक को और मज़ा आया और वो सिसकारियां भरने लगी. मैंने चूचियाँ निचोड़ते हुए पलक रानी के पेट को चाटना आरंभ किया. पेट पर जीभ गीली कर मैं दाएं से बायें चाटता, एक सिरे से दूसरे सिरे तक. उस सिरे पर पहुंच कर फिर चाटता हुआ वापस आता. इस चटाई ने तो रानी को बौरा दिया और वो अजीब अजीब सी आवाज़ें ऐसे निकाल रही थी जैसे उसका गला भिंच गया हो. अब वो कामावेश से तीव्र रूप से ग्रस्त थी.
मैं अब चूचियों को पूरी ताक़त से दबा रहा था, साथ साथ पलक रानी के पेट को चाटते हुए अब मैं उसकी उभरी हुई नाभि तक जा पहुंचा था. नाभि को मुंह में लेकर मैंने चूसना शुरू कर दिया. फिर क्या था मज़े से पागल होकर रानी ने टांगें छटपटानी शुरू कर दीं. मैंने अपने दोनों अंगूठे रानी की चूचुक में पूरी ताक़त से गाड़ दिये.
वो मस्ता के बार बार साहिल साहिल साहिल पुकारने लगी, बोली- अब कितनी देर और इंतज़ार करवाओगे तुम? नीचे सारा जूस निकल गया… आहहह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… साहिल साहिल साहिल… कमीने… हाय हाय हाय… किस ज़ालिम से फंसी मैं… ओ… ओ… ओ… ओ… हो.
आप से तुम और तुम से तू पर आ गयी थी पलक रानी और एक गाली भी दी थी, हा हा हा आ गई हरामज़ादी लाइन पर. 
 मैं बोला- चुप रह कुतिया… अब पड़ी रह और मज़ा भोग… फालतू बक बक की तो हरामज़ादी की मां चोद दूंगा.
 अब उसकी चूत पर ध्यान देने के इरादे से मैंने उसकी पैंटी से नाक लगा कर गहरी सांस लेते हुए सूंघा. चूत की विशेष सुगंध से मेरे नथुने भर गए. आआह आआह आआह… दुनिया की सबसे नशीली सुगंध होती है चूत की सुगंध. मैंने नाक और भीतर घुसाने के कोशिश की तो कुछ सख्त सख्त सा महसूस हुआ. पलक रानी ने सैनिटरी पैड लगाया हुआ था. क्या पलक रानी माहवारी में थी? लेकिन चूत से माहवारी वाली खास गंध तो नहीं आयी. मैंने फिर से अच्छे से सूंघा. नहीं, माहवारी वाली सुगंध नहीं थी. फिर क्यों लगाया इस कुतिया ने पैड? 

 इसका उत्तर तुरंत ही मिल गया. जब मैंने पैंटी उतारी तो पाया कि वो पैड पूरी तरह से सना हुआ था. यहाँ तक की पैंटी का भी कुछ भाग सना हुआ था. समझ में आ गया कि चूत का रस है. लेकिन बहुत गाढ़ा गाढ़ा.
इसके पहले मैंने सिर्फ अलिया भट्ट रानी की चूत में गाढ़ा जूस देखा था. अलिया भट्ट रानी के बारे में जानने के लिए कहानी पढ़ें
लेकिन पलक रानी का जूस कोई सामान्य जूस नहीं था, यह तो शहद जैसा गाढ़ा था. यह कह लो कि मर्द के लौड़े के लावा जैसा. इसी लिए रांड ने सेनेटरी पैड लगाया हुआ था वर्ना साली की पैंटी और सलवार में पिच्च पिच्च हो जाती.  
मैंने मस्त होकर उछलते हुए कहा- पलक रानी… यार तेरी चूत का जूस नहीं है, मलाई है… क्रीम है… रुक ज़रा चख के देखता हूँ.
मैंने पैड को ही अच्छे से चाटा. मादक स्वाद से भेजा भन्ना गया, शरीर में चुदास की ज़ोरदार तरंगें अपना ज़ोर मारने लगीं. चिकना चिकना, बहुत ही तेज़ नशे में टुन्न कर देने वाली मलाई थी. मैंने पैंटी को भी सूंघ सूंघ के चाट डाला. रानी की चूत और गांड की सुगंधों से नाक और मलाई के ज़ायके से मुंह के मज़े लग गए. भयंकर उत्तेजना से अंडे भारीपन से भर गए.
“आह आह आह… पलक रानी तू तो हरामज़ादी सच मच में मर्द मार क़ातिल है. बेटीचोद ऐसा जूस, जिसके सेवन से आदमी की रूह फड़क उठे! माँ की लौड़ी इसको रस कहना तो सरासर ग़लत होगा… ये तो मधु कहलाना चाहिए.”
इतना बोल कर मैंने पलक रानी के झांट प्रदेश को चाटना आरम्भ किया. झांटें पांच छह रोज़ पहले साफ की गई थीं. बाल थोड़े थोड़े उगे हुए थे, किन्तु यह दिख रहा था कि बहुत गहरे काले रंग के झांटों के रोयें हैं. इसके अलावा झांटों का प्रदेश भी काफी बड़ा था. रानी के मुंह से बेसाख्ता सिसकारियाँ निकल रही थीं.
रानी बार बार मेरा नाम पुकारे जा रही थी. अब मैंने रानी की चूत के होंठों पर ध्यान दिया. चूत के होंठ काफी बड़े थे और गुलाबी गुलाबी थे. देखते ही अब मुझ पे पागलपन छा गया. मैंने होंठ चौड़े किये तो पूरी तरह मलाई से भरी गुलाबी चूत के जो दर्शन हुए तो यारों मेरा क्या हाल हुआ मैं बता नहीं सकता.
बुर से रस फफक फफक कर बहे जा रहा था. चूत के होंठों के ऊपर उसके स्वर्ण रस का प्यारा छोटा सा छेद दिखा जो कि ढका हुआ था. स्वर्ण रस के छेद की खाल को ज़रा सा ऊपर खींच कर छेद को नंगा कर दिया और अपनी जीभ अकड़ा के ज़ोर से छेद पर टुकुर करके मारी.
बस क्या था पलक रानी तो जैसे बिदक गई. इतनी ज़ोर से सीत्कारें भरीं कि मैं डर गया कि होटल वाले दूसरे यात्री शिकायत ना कर दें कि इस कमरे में बहुत चोदाई का शोर हो रहा है.
मैंने जीभ से बार ज़ोर ज़ोर से स्वर्ण रस के छेद पर प्रहार किये तो रानी दसियों बार झड़ी. गिड़गड़ाने लगी- साहिल, अब तो बख्श दे अब इतना तो मज़ा भी बर्दाश्त नहीं हो रहा.
 मैंने गुर्रा कर कहा- अच्छा… तो बिल्कुल भी सबर नहीं हो रहा हराम की चुदक्कड़ पैदाइश… चल तू भी क्या याद करेगी अब ठोक ही देता हूँ तेरी मलाई वाली चूत को… भोसड़ी वाली रांड, अब हो जा तैयार इस लौड़े को झेलने!
मैं अपनी साली की जाँघों के बीच घुटनों के बल बैठा और एक ही शॉट में लंड चूत में ठोक दिया. रानी ने एक चीख मारी और तड़पने लगी, ज़ोर ज़ोर से अपना सिर इधर से उधर हिलाने लगी.

 शॉट इतना तगड़ा था कि लौड़े के सुपारे ने पलक रानी की यूटरस के दरवाज़े पर ज़ोरदार दस्तक दी. चूत ने दनादन गर्म गर्म मलाई उगली. चूत मलाई से पूरी भर चुकी थी जिसमें लंड ख़ुशी ख़ुशी धंसा हुआ था. चूत अच्छी कसी हुई थी. खैर जब उसका नालायक पति चुदाई ज़्यादा नहीं कर पाता होगा तो चूत ढीली होती भी कैसे.
पलक रानी ने मस्ती में आकर अपनी टाँगें कस के मेरी कमर से लिपटा लीं और उनको पूरी ताक़त से भींच लिया.
 मैंने उसके चूचुक मसलते मसलते धक्के लगाने शुरू किये. मैं धक्कों की स्पीड मिक्स कर रहा था. कभी कुछ धक्के हौले हौले, फिर कुछ धक्के तेज़ और फिर एक या दो धक्के बहुत तगड़े. रानी अच्छे से मस्ता गई थी, वो कुछ बोलना चाहती थी लेकिन मुंह से केवल आहें ही निकल रही थीं.
रानी भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल उछाल के चुदवा रही थी. दन दन दन… धक्के पे धक्का, धक्के पे धक्का, और धक्के पे धक्का!!! हर धक्के पर पलक रानी की क़ातिल चूचियां उतने ही तेज़ी से थिरकतीं. ऊपर नीचे, दाएं बाएं, हर तरफ. क्या मज़ेदार नज़ारा था! मैं एकटक उन चूचियों का नाच देखे जा रहा था. हवस की लगातार बढ़ती हुई तेज़ी धक्कों की रफ़्तार को और भी तेज़ किये जा रही थी. पलक रानी के बाल तितर बितर हो गए थे. अधखुली आँखें, होंठों पर मंद से मुस्कान, माथे पर आयी हुई ज़ुल्फ़ों की दो चार लटें. हम दोनों ही तीव्र गति से चरम सीमा की ओर दौड़े जा रहे थे.
पलक रानी ने मेरी पीठ पर मस्ती में अपने नाखून गड़ा दिये और ज़ोर ज़ोर से खरोंचने लगी. भिंची भिंची आवाज़ में बोली- साहिल… कम्बख्त… इतने ज़ोर से उरोज कुचल रहा था… साले बेरहम जानवर… बस झड़ने वाली हूँ मैं… .अब धक्का दे… हाँ… हाँ दे… दे… दे… हाँ हाँ ऐसे ही दिये जा साहिल… हाय साहिल मैं कहाँ उड़े जा रही हूँ… लगता है अब गिरी और अब गिरी… आह आह आह!
और एक तेज़ झुरझुरी के साथ पलक रानी स्खलित हो गई.
रानी इतने ज़ोर से स्खलित हुई कि झड़ने से ज़रा पहले बदहवास होकर, चूतड़ उछाल उछाल के उसने बेड हिला के रख दिया. यहाँ तक कि उसकी सू सू भी थोड़ी सी निकल गई. उसका स्वर्ण रस छूटा और हम दोनों की जाँघें भीग गयीं. थोड़ा सा बिस्तर भी भीग गया. उसके स्वर्ण रस की गर्मी जैसे ही मुझे महसूस हुई मैं भी चरम आनन्द तक जा पहुंचा और आठ दस बार ज़बरदस्त पेलमपेल मचा के झड़ गया, ढेर सारा लावा पलक रानी की चूत में भर गया.
मैं निढाल होकर उसके उपर ढेर हो गया. मेरा वज़न पलक रानी कैसे झेल गई पता नहीं.
पलक रानी की आहों से कमरा गूंज उठा. मैंने उसके होंठों पर होंठ लगाए तब जाकर कुतिया का शोर बंद हुआ. थोड़ी देर होंठ चूसकर मैंने कहा- जान… तेरी चूत है या अँधा कुआं… बेटीचोद इतनी ढेर सारी मलाई और ऊपर से ढेर सारा लावा… सब का सब लील गई. कितनी जगह है इस छोटी सी बुर में?
पलक रानी ने प्यार से एक चपत मुझे लगायी- मूरख चंद… सर्प शांत होकर छोटा हो गया ना तो बन गई जगह… बहुत आनन्द आया साहिल… बरसों की आग बुझ गई.
इतना कह के पलक रानी ने मेरे मुंह पर चुम्मियों की झड़ी लगा दी.

 चुदाई के बाद हम दोनों ही थोड़ा थक गए थे. पलक रानी से तो हिला भी नहीं जा रहा था. आपस में लिपट कर, चूमते हुए हम लेटे रहे. पलक रानी की तो आँख भी लग गई. एक विस्फोटक चुदाई के बाद की मस्ती भरी थकन की नींद में खोयी पलक रानी की सुंदरता को निहार निहार के मैं कुछ समय तक यूँही पड़ा रहा. पलक रानी तो मस्ती में धुत्त गहरी नींद में चली गई थी.
जब दिल की धड़कनें और साँसें सामान्य हो गयीं तो मैंने उठ कर स्थिति का मुआयना किया. मेरा लंड मेरी साली की गीली चूत में से फिसल के कब का बाहर निकल चुका था. मैंने पलक रानी को हौले से सीधा कर दिया और उसकी टाँगें थोड़ी से फैला दीं. रानी ने ऊँआ… ऊँआ..ऊँआ किया लेकिन जागी नहीं.
चूत के आस पास का सारा भाग, जांघों का काफी बड़ा भाग, समस्त झांट प्रदेश पलक रानी के मधु और मेरे वीर्य से सना हुआ था. स्वर्ण रस छूट जाने के कारण शरीर के यह सब भाग भीगे हुए भी थे. बाथरूम जाकर तौलिया लाया और अपना लौड़ा, टट्टे इत्यादि को पोंछ दिया. उसके बाद पलक रानी की चूत, जांघों और झांट प्रदेश को चाट के साफ किया. पलक रानी थोड़ी हिली डुली तो, लेकिन ‘क्यों तंग कर रहे हो?’ मुनमुना कर फिर सो गई.
 मैं भी आराम से कुर्सी पर बैठा इस हुस्न और कामुकता की जीवित तस्वीर को देखता रहा.
लेकिन कुछ ही देर में मेरे लंड ने फिर से अपनी मौजूदगी जतानी शुरू कर दी. इस सेक्स बम को देखे जाऊंगा तो लौड़ा कब तक चुप रह सकता था.
मैंने नीचे फर्श पर बैठ कर पलक रंडी के पैरों के गुलाबी तलवों पर जीभ फिरानी शुरू कर दी. वाह क्या स्वाद था!
फिर मैंने मदमस्त होकर जीभ निकाल के रानी के पंजे को खूब चाटा. बीच बीच में मैं पूरा पंजा मुंह के अंदर घुसा लेता था. मैं पंजा चूसता, एक एक करके अंगूठे और उंगलियों पर जीभ फिराता, उंगलियों के बीच के स्थान को चाटता. मेरा मुंह पानी से भरे जा रहा था.
इस चाटने चूसने की क्रिया से पलक रानी की नींद भी खुल गई. सिसकारियाँ लेते हुए पलक रानी ने इसी प्रकार प्रसन्नतापूर्वक अपने दोनों पैर चटवाये. मैंने उसके मुलायम मुलायम तलवे चूसे, उतने ही मुलायम एड़ी पूरी मुंह मे लेकर चूसी. बीच बीच में अनेक बार मैंने उसके टखने भी चाट लिये.
अब पलक रानी के मुंह से भी उत्तेजना से भरी हुई सीत्कार आने लगी थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ लगता था कि मेरी दूसरी रानियों की तरह यह रांड भी पांव चटवा के बहुत मज़ा पाती थी.
 साहिल साहिल साहिल मैं तेरी गुलाम बन गई… अब से मैंने तेरी रखैल… इतना मज़ा!!! हाय… हाय… .बदन जल के स्वाहा हो जायेगा मेरा.’ पलक रानी इतनी गर्म हो चुकी थी कि उस से बोला भी नहीं जा रहा था.
वो मेरे ऊपर आ गई और उसकी नरम नरम, गरम गरम, गोल गोल चूचियाँ मेरे लंड को बीच में लेकर लंड को मसलने लगीं. फूल से नाज़ुक किन्तु अकड़े हुए चूचुक अपने इधर उधर पाकर लौड़े की तो ऐश लग गई. वो बार बार तुनक तुनक के रानी को सलामी देने लगा.
रानी अब ज़ोर ज़ोर से सी सी उम्म अहह.. शस्स… की आवाज़ निकाल रही थी. उसने उठकर अपने आप को सही पोसिशन में सेट किया और लंड के सुपारे को अपनी मधु से लबालब बुर के मुंह पर जमाया और ‘राज.. ए.. ए.. ए… ए… ए…’ की एक लम्बी पुकार के साथ वो फचाक से लंड के ऊपर बैठती चली गई.

 मेरी साली की चूत रस से बिल्कुल तर बतर थी, इसलिये मेरा लौड़ा बड़े आराम से उसके भीतर घुसता चला गया और सुपारा जाकर पलक रानी की बच्चेदानी को चूमने लगा. रस या कह लो मधु चूत से फफक फफक के बाहर निकल कर इधर उधर फ़ैल गया. उससे मेरी झांटें भी सन गई थीं.
लंड उस उत्तेजित चूत में डूब कर मतवाला हो गया. पलक रानी ने धीमे धीमे चूतड़ और चूत हिला हिला कर चोदना शुरू किया और आगे को जितना झुक सकती थी, उतना झुक गई. उसने अपने चूचुक मेरे मुंह से लगाये और धीरे से बोली- चल साहिल, अब जल्दी से मेरे दूध को दबा दबा के चूस… पूरी मुंह में लेकर ज़ोर से दांत गाड़ दे इनमें. तभी इनकी सख्ताई कुछ घटेगी…
अपनी बड़ी साली की चूची मुंह में लेकर मैं मस्त होकर चूसने लगा, कभी कभी निप्पल को और कभी कभी चूची को कस के काट भी लेता. लेकिन रानी इतनी मस्त थी कि वो खुद ही अपने मम्मे नाख़ून घुसा घुसा के निचोड़ रही थी और धक्के भी मारती जाती थी. मैं भी अपने नितम्ब उछाल कर रानी के धक्कों में धक्के मिला रहा था.
सब लड़कियों की तरह पलक रानी को भी चुदाई का कण्ट्रोल अपने हाथ में लेकर बड़ा मज़ा आ रहा था. उसने अपना निचला होंठ दांतों में दबा रखा था और हचक हचक कर मुझे चोद रही थी.
रानी ने अब धक्के तेज़ तेज़ टिकाने शुरू कर दिये. उसके मुंह से हाय उम्म हाय मम्म आह आह ऊ ऊ ऊ जैसी आवाज़ें मेरी ठरक को कई गुना करे जा रहीं थीं.
फिर उसने थोड़ा पीछे को सरक कर अपने पांव मेरे कंधों पर जमा दिये और बाज़ू मेरे घुटनों पर. इस प्रकार सेट होकर पलक रानी ने जो धमाचौकड़ी मचाई है कि पूछो मत. इस पोज़ में वो बड़े तगड़े तगड़े धक्के मार सकती थी और वैसा ही कर रही थी. चूत के गाढ़े रस में लिपटा हुआ मेरा लंड जब घुसता तो फच्च फच्च की ऊँची आवाज़ आती. बुर से बहते हुए मधु से मेरा सारा कटि प्रदेश गीला हो चुका था.
पलक रानी की साँसें उखड़ने लगीं थीं. वो अब भैं भैं करके हांफ रही थी, जैसे घोड़ी लम्बी दौड़ लगाते हुए हांफती है या कुतिया गर्मी में हांफती है.
अब पलक रानी ने अपने को पूरा घुमा के अपनी पीठ मेरी तरफ कर ली और हाँफते हुए बोली- साहिल… मेरे हाथ दुख गये दूधों को दबाते दबाते… अब तू इनको ज़रा ताक़त लगा के मसल. पीछे से जकड़ेगा तो ज़्यादह ताक़त लगा पायेगा… समझ ले तुझे इनका कीमा बनाना है.
मैंने वही किया जो पलक रानी की फरमाईश थी. साली के चूचे कस कर जकड़ लिए और दोनों पंजे अकड़ा कर उँगलियाँ अंगूठे उनमें गाड़ कर ऐसे मसलने लगा जैसे सचमुच में उनका कीमा बनाना हो. निप्पल को उंगली और अंगूठे के बीच ज़ोर ज़ोर से उमेठ देता जैसे निम्बू का रस निकलते हैं. कुचों और निप्पल के इस प्रकार हो रहे मर्दन से मेरी पलक रानी बौरा सी गयी थी. बेतहाशा फुदक फुदक कर चोदन खेल खेल रही थी. कमरिया उछाल उछाल के अपने जीजा को चोद रही थी. क्या ज़बरदस्त चुदक्कड़ थी मेरी ये हरामज़ादी साली! क्या धक्के लगाती थी!! क्या सीत्कारें भरती थी!!! सुभानअल्लाह!!!!
हर धक्के पर मेरा टोपा धाड़ से जाकर रानी की बच्चेदानी पर धमाका करता जिसकी ठनक मुझे सिर तक महसूस होती. बहुत ही जबरजंग चुदाई हो रही थी.

 अचानक से पलक रानी ने चार पांच धक्के बिजली की तेज़ी से ठोके और एक गहरी सीत्कार भरते हुए साहिल… साहिल… साहिल… मेरे साहिल पुकारते हुए स्खलित हो गई. वो एक बार नहीं कई दफा झड़ी. बुर की रसमलाई की तेज़ फुहारें मेरे लंड पर चारों तरफ से पड़ती हुई महसूस हुईं.
और तभी मुझे यूं लगा कि मेरे भीतर एक पटाखा फूटा. बड़े ज़ोर से मैं भी झड़ा जैसे कोई ज्वालामुखी फटा हो. दनादन मेरे लंड से वीर्य के मोटे मोटे लौंदे एक के पीछे एक बड़ी रफ़्तार से छूटे. रानी की सारी चूत भर गई मेरे मर्द मक्खन से. मेरा गर्म गर्म लेस चूत में जाते ही पलक रानी फिर से झड़ी और एक दम से मेरे ऊपर गिर पड़ी. क्योंकि उसकी पीठ मेरी तरफ थी, इसलिये उसका मुंह मेरे घुटनों पर आ गया. उसके मुंह से गर्म गर्म साँसें हाँफते हुए मेरे घुटनों को भी गरम कर रही थीं.
मैंने पलक रानी के निश्चल से निढाल शरीर को उठाकर अपनी बगल में लिटा दिया और खुद करवट लेकर उसकी तरफ मुंह करके लेट गया. आपकी बार मैंने पलक रानी की चूचियों को सहलाता रहा जिससे रानी चुदने के नशे में फिर से न सो जाए. लगता है यह दोनों लौड़ाखोर बहनों की खासियत है कि चुदाई हुई और इन्हें नींद आयी. श्वेता तिवारी रानी का भी यही हाल है. उसको भी बार बार चोदने के लिए मुझे जगाये रखना पड़ता है क्यूंकि मेरा लंड इतना हरामी है कि कमबख्त को जब तक तीन बार चूत में घुसकर उसकी खबर अच्छे से न मिले तब तक जान में आफत किये रखता है.
हालाँकि इस खासियत का बाद में बहुत फायदा मिला जब कुछ रानियां घर में आने जाने लगीं. तब श्वेता तिवारी रानी को एक बार चोद के सुला दिया और चले गए घर में ठहरी हुई रानी की आगोश में.
पलक रानी ने मेरी नाक को उंगली और अंगूठे से बीच कर दो तीन बार हिलाया और मुस्कुराते हुए बोली- कितना दुखी करेगा साले वहशी दरिंदे… अभी तो दूध ऐसे दुःख रहे हैं जैसे इनका कचूमर निकल गया हो.’
मैं- तूने ही तो कहा था कमीनी रंडी इनका कीमा बना दो… तो बजा दिया रानी का हुक्म.
पलक रानी- बड़े आए हुक्म बजाने वाले… तुम जैसों से तो मैं दूर से ही भली… पता नहीं तुम्हारी श्वेता तिवारी रानी तुम्हें कैसे झेलती है.
मैं- जैसे तूने झेला, वैसे ही वो भी झेलती है… क्यों आनन्द आया ना? सच सच बोलियो साली बदचलन रंडी.
पलक- हाँ आया हरामी… खूब आया. जैसा मैंने तुझे पहली बार देख कर सपना लिया था वैसा ही मज़ा आया बल्कि उससे भी ज़्यादा.
मैंने पूछा- अच्छा? कब सपना देखा तूने इस चुदाई का?
पलक बोली- मैं क्यों बताऊँ? मैं न बताती अपने सपने को… यह तो मेरा प्राइवेट मामला है.’
मैंने ज़ोर से पलक रानी के उरोजों को भँभोड़ा, तो रानी हुमक उठी.
“हरामज़ादी बोलेगी या असल में कीमा बना दूँ तेरा.”
“साले भेड़िये… बोलती हूँ न अब छोड़ भी दे… नहीं तो दर्द की गोली लेनी पड़ेगी… जिस दिन मैंने तुझे पहली बार देखा ना तुम्हारी शादी में उसी वक़्त श्वेता तिवारी से जल भुन के मैं तो फुंक गई थी. ऐसा सजीला पति उसको मिला तो मेरी क्या गलती थी जो मेरे नसीब में अभि जैसा निकम्मा आदमी लिखा था… पता नहीं क्यों मुझे लगने लगा था कि तू चुदाई के लिए एक जोरदार मर्द होगा… फिर कल जब तुझे फिर से देखा तो सच कहती हूँ साहिल मेरी चूत ने बगावत कर दी… मुझ से एक एक पल काटना भारी पड़ रहा था… रात को जो तुम दोनों ने शोर मचाया ना उसने तो सच में जलती आग में घी टपका दिया… मुझे बहुत ज़्यादा जलन होती है श्वेता तिवारी से… मैं तो खुद ही चाह रही थी कि तू कुछ आगे क़दम बढ़ाए तो तेरा लंड का मैं भी स्वाद चखूं, मेरी चूत भी चखे… तू तो निकला एक नंबर का बदमाश… चोद ही डाला न मुझको.”

 मैंने हँसते हुए कहा- रानी, मेरा भी यही हाल था. कल जब तुझे देखा तो लंड में तेज़ सुगबुगाहट सी हुई. जब तूने गांड पर हाथ फेरने पर कुछ नहीं कहा तो समझ में आ गया कि तू चुद लेगी… कल तेरे हाव भाव भी मुझे लुभाने वाले थे.
पलक रानी- ओये… लड़की हूँ… तुझे और कैसे संदेशा देती अपनी इच्छा का… मैंने कहा अगर समझदार होगा तो यह इशारे पढ़ लेगा, नहीं तो यह है ही नहीं मेरे लायक… अच्छा एक बात बता तू किरण को श्वेता तिवारी रानी क्यों कहता है. तुझे उसकी चूत का जूस बहुत अच्छा लगता है इसी लिए ना?
मैं बोला- दो कारण हैं… चूत रस बहुत पसंद है वह तो बात है ही परन्तु उसकी चूत से रस इतना ज़्यादा निकलता है जितनी उसकी सू सू निकलती है… जूस की फैक्ट्री है… इसलिए श्वेता तिवारी रानी.
इन सब बातों से पलक रानी उत्तेजित होनी शुरू हो गयी थी. उसके हाथ मेरे लंड को सहलाने लगे थे. लंड को तो अकड़ने में देर ही कितनी लगती है. बेटीचोद रानी के हाथ लगते ही फुंफकारें मारने लगा. पलक रानी ने धीरे से अण्डों को सहलाया तो लौड़ा और ज़ोर से उचका.
पलक रानी ने कहा- साहिल अब तेरी पलक रानी तुझे इनाम देगी… तूने बहुत मस्त कर दिया अपनी पलक रखैल को… अब चुप चाप बिना हाथ पैर हिलाए पड़ा रह और इनाम का मज़ा लूट.
इतना कह कर रानी उठ बैठी और मेरी टाँगें चौड़ी करके उनके बीच में बैठ गयी. झुक के लंड पर चुम्मियों पर चुम्मियाँ दागीं. फिर उसने सुपारी की खाल पूरी पीछे कर के सुपारी नंगी कर दी. जहाँ सुपारी का लंड पर टांका होता है वहां जीभ घुमाने लगी.
“आह! आह! आह!”
कुतिया जैसे जीभ पूरी बाहर निकाल के सुपारी को खूब अच्छे से लप लप लप करके चाटा. लंड की नीचे वाली मोटी सी उभरी हुई नस को दबाते हुए रानी ने गप्प से लौड़ा होंठों में दबा लिया और लगी चूमने. मज़े की अधिकता से लौड़ा फड़क उठा. कमीना पूरा फूल गया और रानी के मुंह की गर्मी का आनन्द उठाने लगा.
अब रानी ने हौले हौले मेरे टट्टे झुलाने शुरू किये और सुपारी पर जीभ से टुकुर टुकुर करने लगी. उसके मुंह में लौड़ा घुसा होने की वजह से हरामज़ादी के मुंह में पानी भर आया था. इसलिए जीभ खूब गीली थी और उसकी टुकुर टुकुर से मेरे तमाम बदन में एक तेज़ झनझनाहट ऊपर नीचे, नीचे ऊपर दौड़ने लगी.
मस्ती में डूबकर मैं चिल्लाया- हाँ हाँ मादरचोद रंडी… चूसे जा साली… ऐसे ही चूसती रह… बहुत मस्त चूसती है बेटी की लौड़ी… कमीनी कुतिया… तेरी बेटी को चोदूँ साली… हराम की ज़नी को बीच सरे बाजार नंगी नचवाऊं.
पलक रानी ने लण्ड बाहर निकाल के कहा- चुप करके पड़ा रह साहिल… अब ये मेरा है… मेरा जैसा दिल में आएगा वैसा चूसूंगी… बिलकुल मत बोल बीच में… यह तेरा इनाम है बस मज़ा लूट.

 यह कह के रानी ने गप्प से लण्ड को फिर से होंठों में दबा लिया और लगी पहले की तरह टुकटुकारने. काफी देर तक रानी ऐसे ही चूसती रही. कुछ समय पश्चात् पलक रानी ने लंड को बाहर निकला, खाल पीछे करके एक बार फिर से टोपा पूरा नंगा कर दिया. सिर्फ टोपा मुंह के अंदर ले कर रानी ने खाल ऊपर नीचे करना शुरू किया.
उसका मुंह बहुत गरम था और तर भी. लंड के मज़े लग गये.
अचानक रानी ने जीभ की नोक सुपारी के छेद में घुसाने की कोशिश की. मेरे पूरे बदन में एक सरसरी सी दौड़ गयी. मज़े की पराकाष्ठा हो चली थी. उसने तेज़ तेज़ लंड को हिलाना शुरू कर दिया. उसकी जीभ कमाल का आनन्द दे रही थी. कभी वह अपनी गरम गरम राल से तर जीभ टोपे पर घुमा घुमा के चाटती और कभी वह दुबारा जीभ को मोड़ के नोक लंड के छेद में डाल के एक तेज़ करंट मेरे बदन में फैला देती. क्या बढ़िया इनाम था!
यकायक पलक रानी ने लंड पूरा का पूरा मुंह में घुसा लिया. वह ब़ड़े प्यार से अंडों को सहला रही थी और तेज़ तेज़ सिर को आगे पीछे करती हुई लंड को मुंह में अंदर बाहर, अंदर बाहर, अंदर बाहर कर रही थी. उसके घने बाल इधर उधर लहरा रहे थे.
मज़े के मारे मेरी गांड फटी जा रही थी. मैं बड़ी तेज़ी से चरम सीमा की ओर बढ़ रहा था. मेरी साँसें तेज़ हो चली थीं और माथे पर पसीने की बूंदें झलक आईं थीं.
पलक रानी ने रफतार और तेज़ कर दी. उसे महसूस होने लगा था कि मैं जल्दी ही झड़ सकता हूँ. रानी का मुंह रस से लबालब था, लौड़ा अंदर बाहर होता तो सड़प… सड़प… सड़प की आवाज़ें निकलती थीं.
पलक रानी ने लंड और गांड के बीच में जो मुलायम सा भाग होता है, उसे ज़ोर से दबा दिया. उसने अपने दोनों अंगूठे उस कोमल जगह पर गाड़ दिये. एकदम से एक तेज़, गरम बिजली के करंट जैसी लहर मेरी रीढ़ से गुज़री, मेरे मुंह से एक ज़ोर की सीत्कार निकली और मैं झड़ा, मैंने रानी के बाल जकड़ के एक ज़ोरदार धक्का मारा. लंड बड़ी तेज़ी से उसका पूरा मुंह पार करता हुआ धड़ाम से उसके गले से जाकर टकराया.
ऊँची ऊँची सीत्कार की आवाज़ें निकलता हुआ मैं बहुत धड़ाके से झड़ा.
मेरे लौड़े ने बीस पचीस तुनके मारे और हर तुनके के साथ गरम वीर्य के मोटे मोटे थक्के पलक रानी के मुंह में झाड़े. सारा मक्खन निकल गया. मैं बिल्कुल निढाल हो कर बिस्तर पर फैल गया और अपनी सांसों को काबू पाने की चेष्टा करने लगा.
मेरा लंड झड़के मुरझा चुका था और रानी की लार व मेरे माल की बूँदों से लिबड़ा एक तरफ को पड़ा हुआ था. रानी ने सारा वीर्य पी लिया था और फिर उसने मेरे लौड़े को चाट चाट कर अच्छे से साफ किया, नीचे से ऊपर तक.
पलक रानी ने लंड के निचले भाग में जो मोटी सी नस होती है, उसे दबा दबा के निचोड़ा. वीर्य की एक बड़ी बूंद टोपे के छेद से निकली जिसे उसने जीभ से उठाया और पी लिया. अब वह मेरे बगल में आकर लेट गई और प्यार से मेरे बालों में उंगलियाँ फिराने लगी- सच बता न साहिल… आया मज़ा मेरे राजा को?
मैं- हाँ पलक रानी, बहुत मज़ा आया… तू वाकई में चुदाई और चुसाई दोनों की बेहतरीन खिलाड़ी है… मस्त कर दिया रंडी तूने मुझे… तेरे इनाम पर मैं जाऊं कुर्बान!
  “अच्छा साहिल ज़रा टाइम तो देख कितना हुआ है?”
घड़ी मैंने उतार कर टेबल पर रख दी थी, मैं उठ कर गया और देखा कि पौने छह बज चुके थे. पलक रानी ने कहा- तो काफी टाइम हो गया अब चलना चाहिए.
मैंने कहा- ठीक है, पहले तू निकल होटल से, तेरे जाने की दस पंद्रह मिनट की बाद मैं चलूँगा. दोनों का एक साथ पहुंचना गलत हो जायगा.
“सच कहता है तो साहिल… पहले मैं ही निकलती हूँ.” कहकर पलक रानी ने अपने कपड़े पहने, बाथरूम में जाकर मुंह हाथ धोये और हल्का सा मेक अप करके तैयार हो गई.
मैंने भी तब तक अपने कपड़े पहन लिए थे. चलते चलते एक बहुत लम्बी चुम्मी ली, रानी की चूचियां थोड़ी सी निचोड़ी और थोड़े से नितम्ब दबाये. आलिंगन में बंधे बंधे हमने आगे चुदाई के प्लान बनाये.
मैंने उसके प्रशांत भाई की बेटी जूही को सेट करने को कहा. जूही तब कम उम्र की थी परन्तु वो क्या आफत बनने वाली थी यह दिखने लगा था. जूही की नथ खुलने का किस्सा फिर कभी.
फिर रानी बाय कहकर चली गई. पूरे पंद्रह मिनट बाद मैंने भी होटल का बिल अदा किया और वापिस वहीं चला गया जहाँ से आए थे.
तो यारो, यह थी मेरी अपनी बड़ी साली पलक रानी की साथ चुदाई के संबंधों की शुरुआत.



Comments